फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Are we ready for men to take the contraceptive pills

शुक्राणु पर अंकुश वाली गोलियां बाजार में क्यों नहीं आती

Thu, 31 Oct 2019 07:43 PM IST
बीबीसी Published by: अनिल पांडेय Updated Thu, 31 Oct 2019 07:43 PM IST
विज्ञापन
Are we ready for men to take the contraceptive pills
पुरुष प्रजनन - फोटो : Pexel

दुनिया भर के वैज्ञानिक लगभग आधी सदी से पुरुषों के इस्तेमाल के लिए गर्भनिरोधक जैसी गोली विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इससे जुड़ी कई बेहतरीन रिपोर्ट तो देखने को मिलती हैं लेकिन अभी भी इन गोलियां मेडिकल स्टोर्स तक नहीं पहुंच पाई हैं।

विज्ञापन


पैसों की कमी और पुरुषों की उदासीनता की वजह से इन गोलियों का उत्पादन बड़े पैमाने पर नहीं हो पाया। इसके अलावा अभी भी महिलाओं से ही यह उम्मीद की जाती है कि गर्भ न ठहरने की जिम्मेदारी वो उठाएं। हालांकि कई रिसर्च से यह पता चला है कि अगर पुरुषों के लिए ऐसी गोलियां होतीं तो पुरुष आसानी से उसे स्वीकार कर लेते।
विज्ञापन


ब्रिटेन में सेक्शुअली सक्रिय लोगों में एक तिहाई लोगों ने माना है कि वे गोली या फिर प्रत्यारोपण की तकनीक के इस्तेमाल से संतान उत्पति पर अंकुश का रास्ता अपनाना चाहते हैं। मौजूदा समय में ब्रिटेन में लगभग एक तिहाई महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

किसकी जिम्मेदारी गर्भनिरोध

सर्वे में शामिल 10 में से आठ लोगों का मानना है कि गर्भनिरोध किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है इसे महिला और पुरुष दोनों को आपस में शेयर करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में 18 से 44 साल के आयुवर्ग के सेक्शुअल सक्रिय लोगों में 77 प्रतिशत लोगों ने पुरुष नसबंदी और कंडोम के बदले किसी अन्य तरीके वाले निरोधक के इस्तेमाल में दिलचस्पी दिखाई है।


ऐसे में सवाल यही उठता है कि सार्वजनिक तौर पर इतनी स्वीकार्यता मिलने और लैंगिक भूमिका से छुटकारा मिलने के बाद क्या पुरुषों के लिए निरोधक गोलियां वास्तविकता बन पाएंगी?

दुनिया भर में गर्भनिरोध का सबसे आम तरीका क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक दुनियाभर में सेक्शुअली सक्रिय कपल्स में से एक तिहाई कपल्स किसी भी तरीके के गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। इसके साथ ही जो कपल्स गर्भनिरोध का इस्तेमाल करते हैं, उनमें महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक अपनाने का चलन ज्यादा है।

शादीशुदा या सेक्शुअल संबंध रखने वाली महिलाओं में करीब 19 प्रतिशत महिलाएं गर्भनिरोध के लिए नसबंदी पर भरोसा करती हैं, 14 प्रतिशत महिलाओं क्वाइल का इस्तेमाल करती हैं जिसे कॉपर टी भी कहा जाता है, नौ प्रतिशत महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों और पांच प्रतिशत महिलाएं इंजेक्शन का इस्तेमाल करती हैं।

पुरुषों से जुड़े गर्भनिरोधक के जो तरीके मौजूद हैं, उनका चलन पुरुषों में बेहद कम है। महज आठ प्रतिशत पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करते हैं, जबकि दो प्रतिशत पुरुष नसबंदी कराते हैं।

गर्भनिरोधक गोलियों से पहले क्या होता था?

गर्भनिरोधक गोलियों से पहले, पुरुषों को गर्भनिरोध की प्रक्रिया में शामिल होना होता था, उदाहरण के लिए उन्हें कंडोम इस्तेमाल करना होता था। 1960 के दशक में जब महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियां बड़े पैमाने पर तैयार होने लगीं तब गर्भनिरोध का फ़ैसला महिलाओं के नियंत्रण हो गया। महिलाएं यह काम अपने सेक्शुअल पार्टनर को बिना बताए भी कर सकती थीं।

आज, दुनियाभर में 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियां इस्तेमाल करती हैं। यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में यह गर्भनिरोध का सबसे प्रचलित तरीका है। वहीं अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में गर्भनिरोधक गोलियां गर्भनिरोध का दूसरा सबसे प्रचलित तरीका है। जबकि एशिया में यह तीसरा सबसे प्रचलित तरीका है।

पिछले कुछ दशक में गर्भनिरोधक गोलियों के चलते महिलाओं की जिंदगी थोड़ी आसान हुई है। वे अपनी सुविधा से यह तय कर पा रही हैं कि वे कब मां बनना पसंद करेंगी। इससे उन्हें उच्च शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में फ़ायदा भी हुआ है। यह भी एक वजह है जिसके चलते इसे महिला अधिकारों की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जाता है। वैसे इसकी गिनती 20वीं शताब्दी के सबसे महान आविष्कारों में होती है।

महिला-पुरुष बराबरी

समाज में जेंडर समानता की बात बढ़ रही है, उसका दायरा विस्तृत हो रहा है। तब यह बात खटकती है कि गर्भनिरोध से संबंधित दुष्प्रभावों के अलावा भावनात्मक, सामाजिक, वित्तीय और समय से संबंधित चुनौतियों का सामना केवल महिलाओं को ही करना पड़ रहा है। ऐसे में, हम लोगों के पास अभी तक पुरुषों वाली गर्भनिरोधक गोलियां क्यों नहीं है?

महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियों की जब खोज हुई, उसके एक दशक के भीतर ही ये आम लोगों के लिए उपलब्ध हो गईं थीं। पुरुषों की गोलियों के बाजार में पहुंचने में इतना लंबा वक्त क्यों लग रहा है, जबकी इसका पहला ट्रायल 1970 में हो गया था।

कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का विकास करने की प्रक्रिया महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल है। पुरुषों की गर्भनिरोधक गोलियां स्पर्म उत्पादन को रोक कर अपना काम करती है, लेकिन ऐसा करने के लिए जिस तरह के हॉर्मोन की जरूरत होती है उसके साइड इफेक्ट्स होते हैं।

इसके अलावा सामाजिक और आर्थिक कारकों की भी अपनी भूमिका है। प्रजनन संबंधी विज्ञान और मेडिसीन की दुनिया मुख्य तौर पर महिलाओं के शरीर पर केंद्रित है, इसमें पुरुषों की अनदेखी होती है।

उदाहरण के लिए, हर कोई यह तो जानता है कि गायनोकोलॉजिस्ट क्या करते हैं लेकिन लोगों को एंड्रोलॉजिस्ट के बारे में मालूम नहीं होता। एंड्रोलॉजिस्ट उन विशेषज्ञों को कहा जाता है जो पुरुषों के प्रजनन संबंधी विज्ञान में दक्ष होते हैं।

क्यों रुका हुआ है काम?

महिलाओं की गर्भनिरोधक गोलियों के कई दशकों के बाद पुरुषों के लिए ऐसी गोलियों पर काम शुरू हुआ और इसके बाद यह काम फ़ंड की कमी के चलते अटकता रहा।

पुरुषों के लिए ऐसी ही एक गोली 'क्लीन शीट्स' पर रिसर्च रुकी हुई है, यह गर्भनिरोधक गोली सेक्स के दौरान पुरुष में वीर्य नहीं बनने देती। असल में वीर्य के निकलने को पुरुषों की सेक्शुअलिटी में अहम माना जाता है।

हालांकि कई दशक पहले हुए शोध के मुताबिक लंबे समय तक संबंधों में रहने वाली महिलाएं अपने पुरुष साथी पर भरोसा करती हैं और जहां बात कैजुएल सेक्स की आती है तो महिलाएं पुरुषों पर कम भरोसा करती हैं फिर चाहे पुरुष गर्भनिरोध का ही इस्तेमाल क्यों ना कर रहे हों।

'ये महिलाओं का काम है'

गर्भनिरोध को महिलाओं के काम के तौर पर देखा जाता है, ये धारणा भी है कि पुरुष गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल नहीं करते। वैसे अब जेंडर की भूमिका बदल रही है और पुरुष घर की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं और बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

यह संतुलन गर्भनिरोधक तक बढ़ सकता है क्योंकि शोध अध्ययन बता रहे हैं कि युवा पुरुष इसे साझा जिम्मेदारी के तौर पर देख रहे हैं। पुरुषों के कुछ समूह, जो कहीं ज्यादा शिक्षित हैं, प्रभावी हैं और परंपरागत तौर पर जेंडर भूमिकाओं में विश्वास नहीं रखते हैं वे पुरुषों की गर्भनिरोधक गोली को लेकर उत्सुक हैं।

भले ही पुरुष इन गर्भनिरोधक गोलियों का स्वागत कर रहे हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी पुरुष इन्हें इस्तेमाल करने लगेंगे। हम नसबंदी के मामले में यह देख सकते हैं। पुरुषों की नसबंदी की प्रक्रिया 200 साल पहले शुरू हो गई थी लेकिन फिर भी महिलाओं की नसबंदी पुरुषों की तुलना में 10 गुना ज्यादा होती है।

पुरुषों की गर्भनिरोधक गोलियों को विकसित करने के लिए सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटना होगा। इसमें सबसे जरूरी और पहला कदम है लैंगिक समानता का दायरा बढ़ाना। हम पुरुषों की गर्भनिरोधक गोली का इंतजार 50 साल से कर रहे हैं, अब और 50 साल का इंतजार नहीं कर सकते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed