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नाटो शिखर सम्मेलन में यक्ष प्रश्न: रूसी हमले रोकने का उसके पास उपाय क्या है?

Mon, 21 Mar 2022 06:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Mar 2022 06:13 PM IST
सार

जानकारों के मुताबिक ब्रसेल्स सम्मेलन में बाइडन को चीन के बारे में अपने सहयोगी देशों की राय जानने का मौका भी मिलेगा। वे संभवतः यह सवाल भी वहां रखेंगे कि अगर चीन ने रूस को सैनिक मदद देने का फैसला किया, तो पश्चिमी देश उस पर क्या कदम उठाएंगे...

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Apart from NATO leaders at the Brussels summit, Biden will also have a summit with leaders of the G-7
नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग - फोटो : NATO

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के नेताओं के साथ शिखर बैठक में भाग लेने के लिए जब रवाना हुए, तब अमेरिकी विश्लेषकों में ये आम राय देखी गई कि इस बैठक से यूक्रेन में तुरंत युद्ध खत्म कराने में सफलता नहीं मिलेगी। इसके लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर नाटो निर्णायक दबाव डाल सकने की स्थिति में नहीं है। ब्रसेल्स में तय इस बैठक में रूस के खिलाफ कुछ और प्रतिबंधों पर सहमति बन सकती है। लेकिन पुतिन अब तक ऐसे प्रतिबंधों के दबाव में नहीं आए हैं।

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ब्रसेल्स में नाटो नेताओं के अलावा बाइडन की जी-7 के नेताओं के साथ भी शिखर बैठक होगी। इसके अलावा वे यूरोपियन काउंसिल के विशेष सत्र में भाग लेंगे। सोमवार से बुधवार तक ब्रसेल्स में बाइडन का व्यस्त कार्यक्रम है। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में यह धारणा गहरा गई है कि यूक्रेन को समर्थन देने की उनकी रणनीति का अब तक सीमित परिणाम ही रहा है।

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जेलेंस्की की ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित करने की मांग

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों पर अधिक प्रभावशाली कदम उठाने के लिए लगातार दबाव बना रखा है। जेलेंस्की ने बार-बार मांग की है कि नाटो यूक्रेन को ‘नो फ्लाई जोन’ घोषित करे। साथ ही वे रूस पर जवाबी हमले में सहायक हो सकने वाले लड़ाकू विमान और अन्य हथियारों की मांग भी कर रहे हैं। लेकिन इन मांगों की पश्चिमी देशों ने अब तक अनदेखी की है। ब्रसेल्स में होने वाली बैठकों में ये मुद्दे भी उठेंगे। लेकिन उन पर कोई फैसला होगा, इसकी संभावना कम है।

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के जमाने में नाटो और यूरोपीय सुरक्षा के प्रभारी विदेश उप मंत्री रह चुके इयन ब्रेजिन्स्की ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘जेलेंस्की लगातार बाइडन को चुनौती दे रहे हैं कि लोकतांत्रिक देशों का नेता होने के नाते वे अपनी जिम्मदारियां निभाएं। वे बता रहे हैं कि नाटो चुनौती पर खरा नहीं उतरा है, इसलिए हमें दूसरी तरह की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विचार करना होगा। इससे आज के दौर में नाटो की प्रासंगिकता का सवाल उठ खड़ा हुआ है। ब्रसेल्स शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि इससे ही तैयार हुई है।’

चीन को बाइडन की चेतावनी

जानकारों के मुताबिक ब्रसेल्स सम्मेलन में बाइडन को चीन के बारे में अपने सहयोगी देशों की राय जानने का मौका भी मिलेगा। वे संभवतः यह सवाल भी वहां रखेंगे कि अगर चीन ने रूस को सैनिक मदद देने का फैसला किया, तो पश्चिमी देश उस पर क्या कदम उठाएंगे। पिछले हफ्ते बाइडन की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से 112 मिनट की वार्ता हुई। उस दौरान बाइडन ने चेतावनी दी कि अगर चीन ने रूस को सैनिक मदद दी, तो उसके गंभीर नतीजे होंगे। लेकिन शी उसके दबाव में आते नहीं दिखे।



ब्रसेल्स शिखर बैठक के बारे में नाटो में अमेरिका के राजदूत रह चुके कुर्ट वोल्कर ने कहा है- ‘यह बेहद महत्त्वपूर्ण शिखर सम्मेलन है। यह एक संकट से पैदा हुई असाधारण स्थिति के बीच हो रहा है। इसे यह सुनिश्चित करने के लिए आयोजित किया गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश एकजुट हैँ। लेकिन व्लादमीर पुतिन को एक ठोस संकेत भेजने के लिहाज से भी यह एक महत्त्वपूर्ण मौका होगा।’

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