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कोरोना संक्रमित मां से जन्मे कुछ बच्चों में पहले ही बन जाती हैं एंटीबॉडी
Tue, 23 Jun 2020 02:00 PM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 23 Jun 2020 02:00 PM IST
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सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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कोरोना संक्रमित मां से जन्म लेने वाले कुछ बच्चों में एंटीबॉडी पहले ही बन जाती हैं। रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्स एंड गाइनेकोलॉजी के उपाध्यक्ष डॉ. पैट्ररी ओ ब्रायन का कहना है कि बच्चे जब मां के गर्भ में होते हैं। तभी उनके भीतर वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
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हालांकि, सभी में ऐसा हो यह जरूरी नहीं। 427 गर्भवती पर हुआ अध्ययन हाल ही में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि एंटीबॉडी का काम संक्रमण से लड़ना होता है। रोगी के ठीक होने के बाद भविष्य में दोबारा वायरस सक्रिय होता है तो एंटीबॉडी सक्रिय हो जाती हैं।
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गर्भनाल में संक्रमण का खतरा कम...
मां से बच्चे को सभी जरूरी पोषक तत्व गर्भनाल से मिलते हैं। इम्यूनोग्लोबिन एम (आईजीएम) एंटीबॉडी तब बनती है, जब शरीर पहली बार संक्रमण की चपेट में आता है। ऐसे में गर्भनाल से मां से बच्चे को संक्रमण की संभावना कम है। इसका मतलब यह है कि मां जब संक्रमण की चपेट में आए तो शिशु के शरीर ने बचाव के लिए एंटीबॉडीज बना ली। आईजीएम एंटीबॉडी बन जाती है और शरीर को वायरस को खत्म करने के लिए तैयार कर देती है।
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बच्चे की हालत गंभीर होने का खतरा कम
डॉ. ब्रायन बताते हैं कि मां से बच्चों को कोरोना वायरस के कारण हालत गंभीर होने का खतरा बहुत कम है। उन्होंने कहा कि दूसरे लोगों की तुलना में गर्भवती महिलाओं में संक्रमण के कारण स्वास्थ्य को नुकसान कम होगा, बशर्ते उन्हें किसी तरह की दूसरी जीवनशैली से जुड़ी परेशानी ना हो। अध्ययन में शामिल केवल 10 फीसदी संक्रमित गर्भवती महिलाओं को ही वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। इस तरह के गंभीर मामले पहले भी आते थे जब कोरोना नहीं था।
प्रसव के दौरान पांच गर्भवती महिलाओं की मौत
शोध के अनुसार पांच गर्भवती महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हुई जो एक फीसदी से भी कम है। इसमें से भी अधिकतर मौतों की वजह कोरोना वायरस की स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ थी। केवल पांच फीसदी यानी 20 बच्चों को कोरोना संक्रमण हुआ जिसका कारण गर्भनाल हो सकता है, लेकिन वह कहते हैं कि इस कड़ी में अस्पताल स्टाफ से संक्रमित होने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
संक्रमित मां से बच्चे को अलग न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमित मां से बच्चे को अलग नहीं करना चाहिए। मां नियमित समय पर बच्चे को स्तनपान कराए ताकि बच्चे को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें। डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद बच्चे को मां का दूध नहीं पिलाया गया तो भविष्य में उसे कोरोना से भी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी शिकायत हो सकती है। कुछ मामलों में जन्म के बाद बच्चे को कोरोना वायरस हो सकता है क्योंकि कई मामलों में बच्चों में भी इसके लक्षण नहीं दिखते हैं।