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Pakistan Army: बढ़ती बदनामी के बीच फिर सफाई देने पर मजबूर हुई पाकिस्तान की सेना

Wed, 26 Apr 2023 02:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 26 Apr 2023 02:05 PM IST
सार

पाकिस्तान की सेना आतंकवाद के मसले पर भी घिरी हुई है। देश में लगातार आतंकवादी हमले हो रहे हैं, जिसके आगे सेना लाचार नजर आ रही है। आईएसपीआर के महानिदेशक ने इस मामले में सेना की बचाव की कोशिश में दोष विदेशी एजेंसियों पर डाला...

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Amid growing of defamation, Pakistan army was again forced to clarify
Pakistan army DG ISPR Major General Ahmed Sharif Chaudhry - फोटो : Agency

विस्तार

अपनी लगातार बढ़ रही बदनामी से परेशान पाकिस्तान की सेना को फिर से सफाई देनी पड़ी है। मंगलवार को सेना के जन संपर्क विभाग की तरफ से आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया कि पाकिस्तान की सेना एक ‘राष्ट्रीय सेना है’ और उसकी नजर में सभी राजनेता और राजनीतिक दल ‘सम्माननीय’ हैं।

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हाल में एक पत्रकार ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया पाकिस्तान के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को अंधेरे में रख कर कश्मीर के सवाल पर भारत के साथ समझौते की तैयारी कर ली थी। इससे पाकिस्तान की सेना नए सिरे से आलोचनाओं के केंद्र में आई है। प्रेस कांफ्रेंस में बाजवा के सेना पर जारी प्रभाव के बारे में सवाल पूछा गया। इस पर इंटरसर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के प्रवक्ता ने कहा- ‘हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन सत्ता का असल केंद्र राष्ट्र है।’

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प्रेस कांफ्रेंस को आईएसपीआर के महानिदेशक मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने संबोधित किया। आईएसपीआर के महानिदेशक पद संभालने के बाद चौधरी की यह पहली प्रेस कांफ्रेंस थी।

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मेजर जनरल चौधरी ने सफाई दी- ‘सेना किसी विचारधारा या पार्टी का समर्थन नहीं करेगी।’ सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ चलने वाले अभियान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सेना का इस्तेमाल राजनीतिक या धार्मिक मकसद से करने पर देश अफरातफरी की तरफ जाएगा। उन्होंने कहा कि आम जन और सेना दोनों की यही राय है कि सेना किसी खास राजनीतिक दल से ना जुड़े। मे.ज. चौधरी ने कहा- ‘राजनेताओं को हमारी सोच को मजबूत करना चाहिए। सेना और राजनेताओं के बीच गैर-राजनीतिक रिश्ते हैं, इसलिए सेना को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं होगा।’

पाकिस्तान की सेना आतंकवाद के मसले पर भी घिरी हुई है। देश में लगातार आतंकवादी हमले हो रहे हैं, जिसके आगे सेना लाचार नजर आ रही है। आईएसपीआर के महानिदेशक ने इस मामले में सेना की बचाव की कोशिश में दोष विदेशी एजेंसियों पर डाला। मे.ज. चौधरी ने दावा किया कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूच विद्रोही और विदेशी जासूसी एजेंसियों ने आपसी संपर्क बना रखा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना के पास इस बात के पक्के सबूत हैं।

इस साल के आरंभ में पेशावर में एक मस्जिद पर भीषण आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे। मे.ज. चौधरी ने दावा किया कि यह हमला जमात-उल-अहरार नाम के संगठन ने टीटीपी के आदेश पर किया था। इस हमले के लिए जिस फिदायीन का इस्तेमाल हुआ, उसे अफगानिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस हमले में सहायक बने लोगों की गिरफ्तारी से यह सच सामने आया है।

हाल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तेजी से तनाव बढ़ा है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब फिर पाकिस्तान की सेना ने पाकिस्तान में बढ़ रही दहशतगर्दी के लिए अफगानिस्तान पर जिम्मेदारी डाली है। इससे दोनों देशों का तनाव और बढ़ सकता है। मे.ज. चौधरी ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान से लगी 98 फीसदी यानी 3,141 किलोमीटर की पाकिस्तान की सीमा पर घेराबंदी कर दी गई है, ताकि आतंकवादियों की घुसपैठ रोकी जा सके। 

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