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भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल में ओली से अपनी ही पार्टी ने मांगा इस्तीफा
Fri, 26 Jun 2020 07:02 AM IST
संदीप भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 26 Jun 2020 07:02 AM IST
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भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी में दो फाड़ हो गई है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से उनकी ही पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ व कुछ अन्य नेताओं ने इस्तीफे की मांग की है। पूर्व पीएम प्रचंड ने बृहस्पतिवार को कहा कि ओली सरकार हर मोर्चे पर विफल रही, जनता की उम्मीदें बुरी तरह टूटी हैं। ऐसे में केपी शर्मा ओली को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। हालांकि ओली ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में प्रचंड ने ओली के इनकार के बाद पार्टी को तोड़ने की भी धमकी दी है। दो बार प्रधानमंत्री रहे प्रचंड ने कहा, सरकार और पार्टी के हित के लिए उन्होंने चक्रिय प्रणाली के तहत खुद प्रधानमंत्री न बनकर ओली को मौका दिया था। लेकिन ये शायद उनकी सबसे बड़ी गलती थी। प्रचंड को ओली के खिलाफ पार्टी के अंदर भी सहयोग मिला है। पार्टी के दो पूर्व पीएम समेत कई सांसदों ने विरोधी सुर दिखाते हुए ओली के इस्तीफे की मांग की है। गौरतलब है कि नेपाल ने पिछले हफ्ते अपने नए नक्शे को पास किया है। इसमें रणनीतिक रूप से भारत के तीन इलाकों को नेपाल का हिस्सा बताया गया है। इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव आया है। भारत ने नेपाल के नए नक्शे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधूरा भारत के अभिन्न अंग हैं। हालांकि नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने दोनों सदनों से पास हो चुके दूसरे संविधान संशोधन विधेयक को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी।
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पार्टी के नेता कर रहे विपक्ष जैसा बर्ताव
दूसरी ओर पीएम केपी शर्मा ओली ने कहा, सरकार और प्रशासन देशहित में जुटा हुआ है। जबकि सत्ताधारी पार्टी के नेता ही विपक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं।- केपी शर्मा ओली, प्रधानमंत्री
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विपक्षी नेपाली कांग्रेस ने उठाया चीनी अतिक्रमण का मुद्दा
दूसरी ओर विपक्ष की नेपाली कांग्रेस ने संसद में प्रस्ताव देकर सरकार से चीन के अतिक्रमण के खिलाफ कदम उठाने और उसके कब्जे में गई जमीन वापस लाने की मांग उठाई। हालांकि इस पर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नेपाल और चीन के बीच कोई सीमा विवाद नहीं है। दरअसल नेपाल के कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि देश की कुल 10 जगहों पर चीन ने कब्जा कर लिया है। वहीं पेइचिंग ने 33 हेक्टेयर जमीन पर नदियों की धारा बदलकर प्राकृतिक सीमा बना कब्जा किया है। इसके बाद नेपाली कांग्रेस के सांसद देवेंद्र राज कंदेल, सत्य नारायण खनाल और संजय कुमार गौतम ने निचले सदन में प्रस्ताव देकर ओली सरकार से अपनी जमीन वापस लाने की मांग की। इसमें दोलका, हुमला, सिंधुपलचौक, संखूवसाभा, गोरखा और रसूवा जिलों की 64 हेक्टेयर की जमीन पर चीनी अतिक्रमण का दावा किया गया है।