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अमेरिका सरकार ने तहाव्वुर राणा की रिहाई का किया विरोध, कहा - देश से भागने का खतरा
Tue, 01 Dec 2020 12:46 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Tue, 01 Dec 2020 12:46 PM IST
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तहाव्वुर राणा (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
अमेरिकी सरकार ने कैलिफोर्निया की फेडरल अदालत में अर्जी देकर पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यापारी तहाव्वुर राणा की रिहाई का विरोध किया है। तहाव्वुर राणा को भारत द्वारा 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले में भारत भगोड़ा घोषित किया गया था। अमेरिकी सरकार ने कहा है कि उसके देश छोड़कर भागने का खतरा है।
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डेविड कोलमैन हेडली के बचपन के दोस्त राणा (59) को भारत के अनुरोध पर 10 जून को लॉस एंजिलिस से गिरफ्तार किया गया। भारत ने 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के सिलसिले में राणा के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है। हमले में छह अमेरिकी नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए थे।
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सरकारी गवाह बना डेविड कोलमैन हेडली
लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तानी-अमेरिकी सदस्य हेडली 2008 मुंबई आतंकवादी हमले के षड्यंत्र में शामिल था। वह इस मामले में सरकारी गवाह बन गया था और फिलहाल हमले में अपनी भूमिका के लिए अमेरिका की जेल में 35 साल की सजा काट रहा है।
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राणा को भारत ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है और उसके प्रत्यर्पण पर सुनवाई 12 फरवरी को होनी है। लॉस एंजिलिस के अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की जज जैकलीन शेलोनियन की अदालत में सोमवार को दी गई अर्जी में अमेरिकी अधिवक्ता निकोला टी. हना ने अदालत से राणा को रिहा करने का आवेदन खारिज करने का अनुरोध किया।
सरकार वकील हना ने राणा को हिरासत में रखने का अनुरोध किया
वकील ने कहा कि राणा यह साबित करने में असफल रहा है कि वह देश छोड़कर नहीं भागेगा और उनके प्रत्यर्पण की अर्जी लंबित होने के कारण विशेष परिस्थिति बन रही है और उसे हिरासत में रखना आवश्यक है। राणा कोविड-19 महामारी का लाभ उठाकर प्रत्यर्पण से पहले हिरासत से अपनी रिहाई का प्रयास कर रहा है जबकि हना ने अर्जी देकर उसे फरवरी में सुनवाई होने तक हिरासत में ही रखने का अनुरोध किया है।
राणा को कोरोना के मद्देनजर रिहा करने की अपील
राणा के वकील ने अनुरोध किया है कि महामारी के मद्देनजर उसे रिहा कर दिया जाए। वहीं सरकारी वकील हना का कहना है कि प्रत्यर्पण का सामना कर रहे एक भगोड़े अपराधी को उसी सूरत में जमानत मिल सकती है जब वह साबित करे कि उसके देश छोड़कर भागने का खतरा नहीं है और उसे हिरासत से रिहा करने के लिए कोई ‘विशेष परिस्थिति’ बन रही है।
राणा ने अदालत में दी गई अपनी अर्जी में कहा है कि ब्यूरो ऑफ प्रिजन कोविड-19 का प्रभावी प्रबंधन करने की क्षमता नहीं रखता है इसलिए उसे हिरासत से रिहा किया जाए। हना ने दलील दी है कि ब्यूरो कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध है और हिरासत में मौजूद सभी बंदियों की सुरक्षा कर रहा है।