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वीडियो गेम दुनिया में बढ़ रही हिंसा का कारण: ट्रंप

Fri, 09 Mar 2018 09:08 PM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Updated Fri, 09 Mar 2018 09:08 PM IST
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video games cause of rising violence in the world says Donald Trump
डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वीडियो गेम और दुनिया में बढ़ रही हिंसा जुड़े हुए हैं। ट्रंप ने वीडियो गेम उद्योग के लीडर्स के साथ बैठक के दौरान यह बात कही। 

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ट्रंप ने इंटरटेनमेंट सॉफ्टवेयर एसोसिएशन के साथ बृहस्पतिवार को बैठक की। ट्रंप ने कई शोध रिपोर्ट का उदाहरण देते हुए जोर दिया कि वीडियो गेम से हिंसा बढ़ती है। गेम उद्योग के विशेषज्ञों ने ट्रंप से असहमती जताई। उनका कहना था कि वर्चुअल हिंसा से दुनिया में हिंसा नहीं बढ़ती है। 
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मालूम हो कि पिछले महीने फ्लोरिडा के स्कूल में हुई गोलाबारी के बाद से पूरे अमेरिका में बंदूक पर बहस छिड़ी हुई है। इस गोलाबारी में 17 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में बंदूक के चलते होने वाले हिंसा का यह सबसे नया मामला है। हर साल अमेरिका में बंदूक संबंधी हिंसा में तीन हजार लोगों की मौत हो जाती है। 
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बड़ी बहस और बाजार
अमेरिकी साइकोलॉजिकल एसोसिएशन और अमेरिकी एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक सलाह दे चुके हैं कि बच्चों और किशोरों को हिंसक वीडियो गेम नहीं खेलने चाहिए। पर 200 से ज्यादा विशेषज्ञ इस रिपोर्ट पर भी सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि वीडियो गेम और हिंसा में कोई संबंध नहीं है। मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी न्यूजू की मानें तो वीडियो गेम सालाना 100 अरब डॉलर का बाजार है। 

बचपन में हिंसा से किशोरावस्था में मनोवैज्ञानिक विकार का खतरा

video games cause of rising violence in the world says Donald Trump
Video Games

बचपन में हिंसा, दर्दनाक घटना और कमजोर सामाजिक आर्थिक स्थिति का अनुभव मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे किशोरावस्था में आंतरिक विकार जैसे अवसाद, बेचैनी और बाहरी मनोवैज्ञानिक विकार जैसे ध्यान में कमी, अतिसक्रियता की आशंका बढ़ जाती है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और फेडरल स्कूल ऑफ साओ पाउलो ने हालिया शोध में यह दावा किया है। 

शोधकर्ताओं के मुताबिक मनोवैज्ञानिक विकार के लक्षण वाले किशोरों में से 60 प्रतिशत ने बचपन में हिंसा की एक न एक घटना का अनुभव जरूरी किया था। शोध के लिए ब्राजील के साओ पाउलो के एक शहरी और एक ग्रामीण इलाके के 180 बच्चों का अध्ययन किया, जिनकी उम्र 12 साल थी।

मुख्य शोधकर्ता सिल्विया मार्टिस के मुताबिक करीब एक चौथाई (22 प्रतिशत) बच्चों में मनोवैज्ञानिक विकार पाया गया। इसमें से ज्यादा अवसाद और ध्यान में कमी-अतिसक्रियता के मरीज सबसे ज्यादा थे। क्रमश: 9.5 प्रतिशत और नौ प्रतिशत। इसके बाद छह प्रतिशत बेचैनी के शिकार थे। ब्राजील के मनोरोग जनरल में यह शोध प्रकाशित हुआ है।

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