{"_id":"f7368cd6-d8b6-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"us-taliban-talks","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका-तालिबान के बीच शांति वार्ता","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
अमेरिका-तालिबान के बीच शांति वार्ता
Updated Wed, 19 Jun 2013 01:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने तालिबान से सीधे शांति वार्ता करने की घोषणा की है।
विज्ञापन
इस तरह की पहली बैठक क़तर की राजधानी दोहा में आने वाले चंद दिनों में होगी जहां तालिबान ने हाल में अपना पहला आधिकारिक कार्यालय खोला है।
अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि तालिबान से बातचीत में शामिल होने के लिए वो भी एक प्रतिनिधिमंडल दोहा भेज रहे हैं।
ये घोषणा ठीक उसी दिन आई है जब अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सुरक्षा बलों ने फ़ौज की कमान अफ़ग़ान सेना को सौंपी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि क़ैदियों की अदला-बदली बातचीत का एक मुख्य मुद्दा होगा लेकिन पहले हफ़्ते में दोनों पक्ष एक दूसरे के मुद्दों को समझने की कोशिश करेंगे।
'बातचीत की शर्त'
हालांकि ये बातचीत इस शर्त पर हो रही है कि तालिबान हिंसा छोड़ेगा, अल-क़ायदा से संबंधों को तोडे़गा और अफ़ग़ानिस्तान के संविधान का आदर करेगा साथ ही इसमें महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार भी शामिल है।
विज्ञापन
अमेरिकी अधिकारियों ने रिपोर्टरों को बताया है कि अमेरिका और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच पहली आधिकारिक बैठक अगले हफ़्ते दोहा में होगी।
उनका कहना था कि इस बैठक के बाद सरकार की उच्च शांति परिषद और तालिबान के बीच बातचीत होगी।
विश्वास
वैसे अफ़गान सरकार और तालिबान के बीच विश्वास का स्तर की बात की जाए तो उसे 'कम' ही बताया जाता है।
इससे पहले तालिबान हमेशा करज़ई या उनकी सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत को नकारता रहा और उन्हें वांशिगटन का कठपुतली कहता रहा है।
उच्च शांति परिषद के सचिव मासुम स्तनज़ई ने इस बातचीत की निर्धारित तारीख़ो के बारे में तो जानकारी नहीं दी लेकिन ये ज़रुर कहा की बातचीत 'कुछ ही दिनों के भीतर होगी'।
विज्ञापन
उन्होंने बीबीसी को बताया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत में सभी पक्षों का 'सहज और आत्मविश्वासी' होना जरुरी है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि ये बहुत लंबी प्रक्रिया है और ये बातचीत सफ़ल होगी इसकी कोई गारंटी नहीं है।