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अमेरिका चुनाव: लंबी लाइनें लेकिन भारत जैसा शोर नहीं
बीबीसी
Updated Wed, 07 Nov 2012 01:15 AM IST
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सुबह से ही वाशिंगटन में सूरज बादलों को चीर कर निकला और मतदान केन्द्रों के बाहर लगी लम्बी कतारों में खड़े लोगों के चेहरों पर चमकता रहा। मैंने वाशिंगटन में तीन मतदान केंद्रों का दौरा किया। एक मतदान केंद्र स्कूल के अन्दर था, दूसरा लायब्रेरी और तीसरा एक गिरजाघर के अन्दर।
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भारत में मतदान केन्द्रों के बाहर जिस तरह से लोग खड़े होते हैं उसी तरह से यहां भी खड़े थे और धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए मतदान केंद्र के अन्दर वोट डाल रहे थे। सुबह जब मैं अपने होटल से निकला तो होटल के मैनेजर ने मुझसे कहा वो आज बहुत खुश है। मैंने पूछा क्या आज मतदान का दिन है इसलिए? उसने कहा नहीं आज से हम दोनों उम्मीदवारों, उनके इश्तेहारों और उनकी भाषणों के ख़त्म होने पर खुश हैं। वो आगे बोले, 'हमारी तरह कई अमेरिकी दोनों नेताओं के चेहरे और उनके प्रचार से उब चुके थे, अब हम खुश हैं।'
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एक दिन पहले ही वोट
मतदान केन्द्रों के दौरे के लिए मैंने एक टैक्सी की जिसका ड्राइवर इथोपिया का निकला। उसने कहा उसने कल ही वोट दे दिया। 'मैं आज की भीड़ से बचना चाहता था।' मैंने पूछा वोट किसको दिया, उसने कहा, 'ओबामा से मैं खुश नहीं हूं, लेकिन वोट ओबामा को ही दिया क्योंकि रोमनी हमें बुश के दौर में धकेल सकते थे।'
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पहले मैं एक स्कूल में लगे एक मतदान केंद्र में पंहुचा। अन्दर तस्वीरें लेने की इजाजत नहीं थी लेकिन मैंने मूत्रालय जाने के बहाने से अन्दर के माहौल का जायजा लिया। मैं भारत और अमेरिका के मतदान केन्द्रों की तुलना करना चाहता था, लेकिन अन्दर भीड़ इतनी थी कि मैं कुछ ज्यादा देख नहीं पाया, लेकिन वोटिंग मशीन की आवाज जरूर सुनाई दी।
जिन मतदान केन्द्रों के आगे कतारें थीं वो काफी लम्बी थीं। मैंने एक महिला से पूछा आप वोट किसे देंगी? उन्होंने कहा, यहां अधिकतर लोग ओबामा के समर्थक हैं। यह सवाल करना यहां फिजूल है। अगर डीसी में ओबामा न जीते तो सिस्टम में ही कोई खराबी है।
मतदान केंद्र के बाहर उम्मीदवार बराक ओबामा और मिट रोमनी के प्रतिनिधि लोगों को गुड मोर्निंग कहने के बाद अपने उमीदवारों की पर्चियां और पैम्फलेट बाट रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव के अलावा यहां कांग्रेस की सीटों के लिए भी चुनाव हो रहा है, इसीलिए मतदान केन्द्रों के बाहर कांग्रेस की सीटों के चुनाव में उम्मीदवारों के प्रतिनिधि भी वहां लोगों से अपने उम्मीदवारों के लिए वोट डालने की अपील कर रहे थे।
वोट डालने में रुचि नहीं
मुझे मतदान केन्द्रों की सबसे अच्छी बात ये लगी की कोई हंगामा नहीं हो रहा था, कोई आवाजें नहीं सुनाई दे रही थीं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मतदाता खामोशी से अपने मतों का इस्तेमाल कर रहे थे। एक बूढ़े आदमी से मैंने पूछा क्या पिछले चुनाव में भी इसी तरह की लम्बी लाईनें आपने देखी थीं? उस ने कहा, 'यहां अच्छी संख्या में लोग आये हैं, ठीक पिछले इलेक्शन की तरह। दोपहर में यह संख्या घटेगी लेकिन शाम को इससे भी लम्बी लाईने लगेंगी।'
एक अनुमाल के मुताबिक ढाई करोड़ अमेरिकी अपने मतों का इस्तेमाल कर चुके हैं। कई करोड़ लोगों ने एक सर्वेक्षण में कहा वो वोट डालने में रुचि नहीं रखते। उनसे पूछा गया कि अगर आप अपना इरादा बदलें और वोट देने जाएं तो किसे वोट देंगे। बहुमत ने कहा ओबामा को।
इसका मतलब ये निकाला जा रहा है कि अगर वोटरों की संख्या अधिक से अधिक रही तो इनमे से ऐसे लोग हो सकते हैं जिन्होंने पहले वोट न डालने का फैसला किया होगा लेकिन आज वोट डालने आये हैं। एक जवान दुकानदार 'कार्ल' ऐसे ही लोगों में एक था जो एक गिरजाघर के बाहर मतदान केंद्र में आकर वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था।
उसने कहा, 'मैंने मन बना लिया था कि मैं मतदान में भाग नहीं लूंगा। ओबामा ने मायूस किया, रोमनी और मायूस करेगा। मैंने खुद से कहा इस से अच्छा है वोट ही मत डालो, लेकिन मेरी पत्नी ने आज सुबह सुबह वोट डालने भेज दिया और अब मैं ओबामा को ही वोट दूंगा।' अगर ऐसे लोगों की संख्या अधिक रही तो ये राष्ट्रपति ओबामा के लिए अच्छी खबर होगी।