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'रोहिंग्याओं में भय फैलाने के लिए की यौन हिंसा', यूएन ने म्यांमार की सेना को ब्लैकलिस्ट में डाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 14 Apr 2018 05:20 PM IST
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rohingya
संयुक्त राष्ट्र ने अपनी ताजा रिपोर्ट में पहली बार म्यांमार की सेना को सरकार और विद्रोही समूहों की ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बात के संदेह के पुख्ता सबूत हैं कि म्यांमार की सेना ने संघर्ष के दौरान बलात्कार और यौन हिंसा की अन्य करतूतों को अंजाम दिया।
यूएन महासचिव ने सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट की अग्रिम प्रति दी जो न्यूज एजेंसी एपी को मिली है। इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टीम और बांग्लादेश में मौजूद लोगों ने इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसके मुताबिक म्यांमार से पलायन करने वाले करीब सात लाख रोहिंग्या मुसलमानों ने हिंसक यौन उत्पीड़न की वजह से शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दंश झेला।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि इन हमलों को अक्टूबर 2016 और अगस्त 2017 में सैन्य 'सफाई' अभियान के दौरान कथित रूप से म्यांमार सशस्त्र बलों द्वारा प्रायोजित किया गया था। इसके लिए वे "कई बार स्थानीय सशस्त्र लड़ाकों के साथ मिलकर काम करते थे।"
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गुटरेस ने कहा, "बड़े पैमाने पर भय फैलाना और यौन हिंसा करना इस रणनीति का अभिन्न हिस्सा था। यह रोहिंग्या समुदाय को अपमानित करने, आतंकित करने और सामूहिक रूप से दंडित करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत उठाया गया कदम था, ताकि उन्हें अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर किया जा सके और उनकी वापसी को रोका जा सके।"
बौद्ध बहुल म्यांमार रोहिंग्याओं को एक नस्लीय समूह मानने से इनकार करता है और कहता है कि वे बांग्लादेश से आए प्रवासी बंगाली हैं जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं। म्यांमार ने उन्हें नागरिकता नहीं दी है जिसकी वजह से उनके पास किसी देश की नागरिकता नहीं है।
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यूएन महासचिव ने सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट की अग्रिम प्रति दी जो न्यूज एजेंसी एपी को मिली है। इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टीम और बांग्लादेश में मौजूद लोगों ने इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसके मुताबिक म्यांमार से पलायन करने वाले करीब सात लाख रोहिंग्या मुसलमानों ने हिंसक यौन उत्पीड़न की वजह से शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दंश झेला।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि इन हमलों को अक्टूबर 2016 और अगस्त 2017 में सैन्य 'सफाई' अभियान के दौरान कथित रूप से म्यांमार सशस्त्र बलों द्वारा प्रायोजित किया गया था। इसके लिए वे "कई बार स्थानीय सशस्त्र लड़ाकों के साथ मिलकर काम करते थे।"
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गुटरेस ने कहा, "बड़े पैमाने पर भय फैलाना और यौन हिंसा करना इस रणनीति का अभिन्न हिस्सा था। यह रोहिंग्या समुदाय को अपमानित करने, आतंकित करने और सामूहिक रूप से दंडित करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत उठाया गया कदम था, ताकि उन्हें अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर किया जा सके और उनकी वापसी को रोका जा सके।"
बौद्ध बहुल म्यांमार रोहिंग्याओं को एक नस्लीय समूह मानने से इनकार करता है और कहता है कि वे बांग्लादेश से आए प्रवासी बंगाली हैं जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं। म्यांमार ने उन्हें नागरिकता नहीं दी है जिसकी वजह से उनके पास किसी देश की नागरिकता नहीं है।