किम और मेरी मुलाकात के लिए जगह-तारीख फाइनल, जल्द करेंगे खुलासा: ट्रंप
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ट्रंप ने शुक्रवार को खुद इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा, ‘किम के साथ मेरी बैठक की तिथि और जगह तय हो गई है और इसे जल्द ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा।’ ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया को कहा, ‘हम तिथि और जगह जानते हैं। जल्द ही घोषणा करेंगे।’
रूसी संबंधों पर जवाब देने को तैयार
ट्रंप ने यह भी कहा कि रूसी संबंधों पर वह विशेष वकील रॉबर्ट म्यूएलर के सवालों का जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन तभी जब उनके साथ अच्छा बर्ताव किया जाएगा।
ट्रंप ने कहा, ‘मुझे रॉबर्ट के साथ बात करना अच्छा लगेगा, लेकिन मैं यह जरूर देखना चाहूंगा कि मेरे साथ उचित व्यवहार किया जा रहा है या नहीं। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। इसलिए मुझे बात करने में कोई दिक्कत नहीं है।’
दक्षिण कोरिया से सैनिकों को कम करेगा अमेरिका
अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से अपने सैनिकों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच सुधरते रिश्तों को देखते हुए अमेरिका ने यह निर्णय लिया।
ट्रंप ने पेंटागन को इसके आदेश दे दिए हैं। आदेश के अनुसार दक्षिण कोरिया में तैनात सैनिकों को वापस बुलाने के विकल्प तैयार करने को कहा गया है। ट्रंप के करीबियों ने इस फैसले की पुष्टि की है। बता दें कि हाल में ही उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी।
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कोरियाई क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने के फैसले का यह अर्थ नहीं निकाला जाए कि किम और ट्रंप के बीच वार्ता के दौरान किसी प्रकार की सौदेबाजी की जाएगी।
इस बीच अधिकारियों ने यह जरूर कहा कि दोनों कोरियाई देशों के बीच शांति समझौते के कारण क्षेत्र में 28,500 सैनिकों की तैनाती की कोई जरूरत नहीं रह जाएगी। बता दें कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप और किम के बीच जल्द ही मुलाकात होने वाली है।
सैन्य खर्च घटाना उद्देश्य
अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका को सैनिकों की तैनाती पर होने वाले खर्च को कम करना चाहिए। यह फैसला दक्षिण कोरिया के साथ सहमति के बीच लिया जा रहा है, जिसमें सेना पर होनेवाले खर्च को बांटने की बात हुई है।
एक समझौते के तहत दक्षिण कोरिया हर साल सैनिकों पर होने वाला करीब आधा खर्च (80 करोड़ डॉलर से ज्यादा) उठाता है। जबकि ट्रंप प्रशासन की मांग है कि उसे सैनिकों की मौजूदगी पर होने वाले पूरे खर्चे को वहन करना चाहिए। यह समझौता 2018 के आखिर में समाप्त होने वाला है।