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अमेरिकी कदम से बढ़ी भारत की शान, दबाव में चीन

Fri, 01 Jun 2018 03:42 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 01 Jun 2018 03:42 AM IST
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Pride of India by American step, China under pressure

अमेरिकी सरकार की ओर से उठाए गए ताजा कदम से भारत की शान में जबरदस्त इजाफा हुआ है। अमेरिकी सेना ने अपनी प्रशांत कमान (पेसेफिक कमांड) का नाम बदलकर उसके साथ भारत का नाम भी जोड़ दिया है। अमेरिकी सेना की इस महत्वपूर्ण कमान का अब नया नाम यूएस-इंडो पैसिफिक कमांड यानी हिंद-अमेरिकी प्रशांत कमान हो गया है। इस फैसले से चीन पर परोक्ष रूप से दबाव बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो यह कदम पेंटागन के लिए भारत की बढ़ती अहमियत की तरफ इशारा करता है। दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने अपने नाम के साथ जोड़ा भारत।  

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अमेरिका ने अपनी प्रशांत कमान का नाम बदलकर हिंद-प्रशांत कमान किया

बृहस्पतिवार को ट्रंप प्रशासन ने यह फैसला हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच बढ़ते संपर्क और भारत के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए लिया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने संयुक्त अमेरिकी सैन्य बेस पर्ल हार्बर में चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी के दौरान इस आशय की घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान एडमिरल फिल डेविडसन ने हिंद-अमेरिकी प्रशांत कमान या हिंद पीएसीओएम के कमांडर के रूप में हैरी हैरिस का स्थान लिया है। हैरी हैरिस को राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के लिए राजदूत चुना है।
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यूएस पेसिफिक कमांड को अमेरिकी सेना की सबसे अहम कमान माना जाता है जिसमें प्रशांत क्षेत्र की सभी गतिविधियों की जिम्मेदारी के लिए यूएस आर्मी के करीब 3,75,000 सैन्य व असैन्य लोग तैनात हैं। अब इसी कमान में भारत की भी हिस्सेदारी होगी। इससे पहले 2016 में अमेरिका ने सैन्य सहयोग में सुधार और सूचनाओं को साझा करने के मकसद से भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी भी नामित किया था। अमेरिकी कमांड का नाम बदलने की कार्रवाई प्रशांत क्षेत्र में भारत को विशिष्ट दर्जा देने के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
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चीन पर दबाव बढ़ाएगी भारत की बढ़ती अहमियत

कमांड का नाम बदलने का अर्थ यह नहीं है कि इस क्षेत्र में अतिरिक्त संसाधन भेजे जाएंगे बल्कि इसका मतलब अमेरिका द्वारा भारत की बढ़ती सैन्य अहमियत को पहचानने के रूप में देखा जाएगा। इसके अलावा भारत को अमेरिका एक बड़े सैन्य बाजार के रूप में देखता है। इस कारण अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस भारत को और सहूलियतें देने के पक्ष में हैं। इन सभी बातों का असर चीन के साथ साथ पाकिस्तान पर भी पड़ना तय है।
 

अमेरिकी सैन्य अभ्यास में भारत समेत 26 देश भाग लेंगे

Pride of India by American step, China under pressure

भारत समेत कुल 26 देश अमेरिका के हवाई द्वीप और दक्षिण कैलिफोर्निया के पास 27 जून से 2 अगस्त तक होने वाले रिम ऑफ पेसेफिक (रिमपैक) सैन्य अभ्यास में भाग लेंगे। पेंटागन ने दुनिया के सबसे बड़े समुद्री सैन्य अभ्यास की बृहस्पतिवार को घोषणा की है। दो साल में एक बार आयोजित होने वाले रिमपैक अभ्यास में इस साल 47 पोत, पांच पनडुब्बियां, 18 राष्ट्रीय थल सेना, 200 से ज्यादा विमान और 25,000 सैनिक भाग लेंगे। जबकि इस अभ्यास की घोषणा से पहले अमेरिका ने रिमपैक-2018 के लिए चीन को न्यौता नहीं भेजा है। 

इस कदम को चीन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अमेरिका के थर्ड फ्लीट पब्लिक अफेयर्स के मुताबिक, ब्राजील, इस्राइल, श्रीलंका और वियतनाम पहली बार रिमपैक में हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, चिली, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, मलयेशिया, मैक्सिको, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पेरू, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड, टोंगा और ब्रिटेन भी शामिल हो रहे हैं।

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