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कौन है संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के झूठ से पर्दा उठाने वालीं पॉलोमी त्रिपाठी
बीबीसी, हिंदी
Updated Tue, 26 Sep 2017 08:03 PM IST
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पॉलोमी त्रिपाठी
- फोटो : Twitter
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संयुक्त राष्ट्र में एक गलत तस्वीर दिखाकर मुश्किल में फंसे पाकिस्तान पर भारत ने एक बार फिर पलटवार किया। यूएन में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने भारत पर इल्जाम लगाते हुए एक तस्वीर दिखाई थी जिसमें एक लड़की का चेहरा पेलेट गन से जख्मी दिख रहा है।
तस्वीर को कश्मीर का बताया गया जबकि ये फिलिस्तीन की थी। अब बारी भारत की थी और उसने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान की तस्वीर के बदले एक और तस्वीर दिखाई।
भारत ने दिया पाकिस्तान को जवाब
यूएन में भारत की परमानेंट मिशन के साथ नियुक्त सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की तस्वीर दिखाई। इस साल मई में जम्मू कश्मीर के अफसर उमर फय्याज को अगवा कर बाद में हत्या कर दी गई थी।
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'भारत का चेहरा दिखाने' में गलती कर बैठा पाकिस्तान?
भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के 72वें सत्र में भारत की तरफ से पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब दिया। इस जवाब में कहा गया है, ''मैं यहां पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि के 23 सितंबर, शनिवार को पटल पर रखे गए बयान का जवाब देने के लिए हूं।''
कौन हैं उमर फय्याज?
पोलॉमी ने कहा, ''पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में पाकिस्तान की भूमिका से ध्यान हटाने की कोशिश की। ऐसा उन्होंने एक जख्मी लड़की की तस्वीर दिखाते हुए किया।''
''ये फलस्तीन की लड़की राव्या अबु जॉम है और तस्वीर अमरीकी फोटोग्राफर हेदी लेवाइन ने जुलाई 2014 में ली थी। 24 मार्च 2015 को ये फोटो न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापी और कैप्शन था 'कंफ्लिक्ट, करेज एंड हीलिंग इन गाजा।''
''पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने इस तस्वीर के जरिए भारत के बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की। फर्जी तस्वीर के जरिए फ़र्जी नेरेटिव गढ़ने का प्रयास किया।''
पाकिस्तान ने दिखाई थी गलत तस्वीर
''पाकिस्तान की इस झूठी कोशिश के सामने हम असेंबली को उस दर्द की सच्ची तस्वीर दिखाना चाहते हैं जो पाकिस्तान की साज़िशों की वजह से भारत को भुगतने पड़ रहे हैं।''
''ये नकली नहीं बल्कि लेफ़्टिनेंट उमर फ़य्याज़ की असली तस्वीर है। वो भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के एक नौजवान अफसर थे।'' एक शादी समारोह से उन्हें अगवा किया गया। और पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादियों ने मई 2017 में उन्हें बर्बर तरीके से प्रताड़ित कर मार डाला।''
''ये असली तस्वीर है, जो कड़वी हकीकत दिखाती है...पाकिस्तान का असली चेहरा अब किसी से छिपा नहीं है।''
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तस्वीर को कश्मीर का बताया गया जबकि ये फिलिस्तीन की थी। अब बारी भारत की थी और उसने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान की तस्वीर के बदले एक और तस्वीर दिखाई।
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भारत ने दिया पाकिस्तान को जवाब
यूएन में भारत की परमानेंट मिशन के साथ नियुक्त सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की तस्वीर दिखाई। इस साल मई में जम्मू कश्मीर के अफसर उमर फय्याज को अगवा कर बाद में हत्या कर दी गई थी।
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'भारत का चेहरा दिखाने' में गलती कर बैठा पाकिस्तान?
भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के 72वें सत्र में भारत की तरफ से पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाब दिया। इस जवाब में कहा गया है, ''मैं यहां पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि के 23 सितंबर, शनिवार को पटल पर रखे गए बयान का जवाब देने के लिए हूं।''
कौन हैं उमर फय्याज?
पोलॉमी ने कहा, ''पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के केंद्र के रूप में पाकिस्तान की भूमिका से ध्यान हटाने की कोशिश की। ऐसा उन्होंने एक जख्मी लड़की की तस्वीर दिखाते हुए किया।''
''ये फलस्तीन की लड़की राव्या अबु जॉम है और तस्वीर अमरीकी फोटोग्राफर हेदी लेवाइन ने जुलाई 2014 में ली थी। 24 मार्च 2015 को ये फोटो न्यूयॉर्क टाइम्स ने छापी और कैप्शन था 'कंफ्लिक्ट, करेज एंड हीलिंग इन गाजा।''
''पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि ने इस तस्वीर के जरिए भारत के बारे में झूठ फैलाने की कोशिश की। फर्जी तस्वीर के जरिए फ़र्जी नेरेटिव गढ़ने का प्रयास किया।''
पाकिस्तान ने दिखाई थी गलत तस्वीर
''पाकिस्तान की इस झूठी कोशिश के सामने हम असेंबली को उस दर्द की सच्ची तस्वीर दिखाना चाहते हैं जो पाकिस्तान की साज़िशों की वजह से भारत को भुगतने पड़ रहे हैं।''
''ये नकली नहीं बल्कि लेफ़्टिनेंट उमर फ़य्याज़ की असली तस्वीर है। वो भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के एक नौजवान अफसर थे।'' एक शादी समारोह से उन्हें अगवा किया गया। और पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादियों ने मई 2017 में उन्हें बर्बर तरीके से प्रताड़ित कर मार डाला।''
''ये असली तस्वीर है, जो कड़वी हकीकत दिखाती है...पाकिस्तान का असली चेहरा अब किसी से छिपा नहीं है।''
कौन हैं पॉलोमी त्रिपाठी?
पॉलोमी त्रिपाठी
- फोटो : Twitter
जाहिर है यूएन में भारत का रुख इस बार काफी कड़ा दिख रहा है। सोशल मीडिया पर भी संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दल की तारीफ हो रही है। कामयाबी टीम वर्क की है लेकिन पॉलोमी सामने हैं, ऐसे में उनकी प्रशंसा होना लाजिमी है।
पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमए और एमफिल किया है। वो सेंटर फॉर स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट में पढ़ाई किया करती थीं। साल 2006 में वो रेवेन्यू सर्विस में चुनी गईं और उसके बाद साल 2007 में फॉरेन सर्विसेज में।
जून में पहुंची हैं यूएन
मूल रूप से कोलकाता की रहने वालीं पॉलोमी का विवाह साल 2007 में हुआ और उनके पति दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं। वो शुरू से ही फॉरेन सर्विस में जाना चाहती थीं। उनका परिवार इस बात पर काफी गर्व महसूस कर रहा है लेकिन उनका कहना है कि ये टीम वर्क है।
पॉलोमी इसी साल जून में यूएन में गई और उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी संभाले हुए कुछ ही महीने हुए हैं।
रेवेन्यू से फॉरेन सर्विस तक
वो इससे पहले चार साल साउथ ब्लॉक में डिप्टी सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) रह चुकी हैं। साल 2007 से 2009 के बीच वो अंडर ट्रेनिंग रहीं और साल 2009 से 2013 के बीच स्पेन में पोस्टेड रहीं। साल 2013-14 के बीच आसियान मल्टी लेटरल में उन्होंने अहम जिम्मेदारी संभाली और साल 2014 से जून तक एडमिनिस्ट्रेशन में रहीं। साल 2017 में जून में वो यूएन पहुंचीं।
दिलचस्पी की बात करें तो पॉलोमी को पढ़ना बेहद पसंद है और ऐसा बताया जाता है कि वो बिना पढ़े सोती नहीं हैं। ऐसे में किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं।
पॉलोमी त्रिपाठी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमए और एमफिल किया है। वो सेंटर फॉर स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट में पढ़ाई किया करती थीं। साल 2006 में वो रेवेन्यू सर्विस में चुनी गईं और उसके बाद साल 2007 में फॉरेन सर्विसेज में।
जून में पहुंची हैं यूएन
मूल रूप से कोलकाता की रहने वालीं पॉलोमी का विवाह साल 2007 में हुआ और उनके पति दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं। वो शुरू से ही फॉरेन सर्विस में जाना चाहती थीं। उनका परिवार इस बात पर काफी गर्व महसूस कर रहा है लेकिन उनका कहना है कि ये टीम वर्क है।
पॉलोमी इसी साल जून में यूएन में गई और उन्हें मौजूदा जिम्मेदारी संभाले हुए कुछ ही महीने हुए हैं।
रेवेन्यू से फॉरेन सर्विस तक
वो इससे पहले चार साल साउथ ब्लॉक में डिप्टी सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) रह चुकी हैं। साल 2007 से 2009 के बीच वो अंडर ट्रेनिंग रहीं और साल 2009 से 2013 के बीच स्पेन में पोस्टेड रहीं। साल 2013-14 के बीच आसियान मल्टी लेटरल में उन्होंने अहम जिम्मेदारी संभाली और साल 2014 से जून तक एडमिनिस्ट्रेशन में रहीं। साल 2017 में जून में वो यूएन पहुंचीं।
दिलचस्पी की बात करें तो पॉलोमी को पढ़ना बेहद पसंद है और ऐसा बताया जाता है कि वो बिना पढ़े सोती नहीं हैं। ऐसे में किताबें उनकी सबसे अच्छी दोस्त हैं।