{"_id":"57d3a1cb4f1c1bb461317acf","slug":"pakistan-was-placed-on-the-formal-list-of-state-sponsored-terror-former-cia-official","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीआईए एजेंट का खुलासा: पाक को आतंकवाद प्रायोजित देशों की सूची में रखना चाहता था अमेरिका ","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
सीआईए एजेंट का खुलासा: पाक को आतंकवाद प्रायोजित देशों की सूची में रखना चाहता था अमेरिका
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Sat, 10 Sep 2016 11:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान को 1993-94 के बीच आतंकवाद का प्रायोजन करने वाले देशों की सूची में ‘लगभग रख दिया’ गया था। यह जानकारी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी ने दी। सीआईए के पूर्व अधिकारी रॉबर्ट एल. ग्रेनियर ने बृहस्पतिवार को बताया कि ‘1993 और 1994 के बीच बिल क्लिंटन प्रशासन की शुरूआत के दौरान मैं राजनीतिक मामलों का सहायक मंत्री था और आतंकवाद की वार्षिक समीक्षा में जुटा था। तब पाक को आतंकवाद का प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में औपचारिक रूप से लगभग रख दिया गया था।’ वह पाकिस्तान पर कांग्रेस में हो रही सुनवाई के दौरान सीनेट की विदेशी संबंध समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।
ग्रेनियर ने कहा कि पांच दशक से ज्यादा समय में अमेरिका पाकिस्तानी व्यवहार के विभिन्न पहलुओं को समय-समय पर नजरअंदाज करता रहा है। ‘इस तरह 1980 के दशक में सोवियत अफगान मुजाहिदीन के विरोधस्वरूप अमेरिका व पाक के संयुक्त सहयोग के चलते पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम संबंधी प्रमाणों को न सिर्फ नजरअंदाज किया गया बल्कि पाक को उदारतापूर्वक आर्थिक और सैन्य सहयोग भी दिया गया।’
उन्होंने कहा कि 9/11 हमले के तुरंत बाद अफगानिस्तान में अभियान के लिए प्लेटफॉर्म की जरूरत और उस देश से भागने वाले अलकायदा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अमेरिका एक बार फिर कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवाद और अफगान तालिबान के प्रति पाकिस्तान के दोहरे रुख को नजरअंदाज करना चाह रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रेनियर ने कहा कि पांच दशक से ज्यादा समय में अमेरिका पाकिस्तानी व्यवहार के विभिन्न पहलुओं को समय-समय पर नजरअंदाज करता रहा है। ‘इस तरह 1980 के दशक में सोवियत अफगान मुजाहिदीन के विरोधस्वरूप अमेरिका व पाक के संयुक्त सहयोग के चलते पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम संबंधी प्रमाणों को न सिर्फ नजरअंदाज किया गया बल्कि पाक को उदारतापूर्वक आर्थिक और सैन्य सहयोग भी दिया गया।’
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि 9/11 हमले के तुरंत बाद अफगानिस्तान में अभियान के लिए प्लेटफॉर्म की जरूरत और उस देश से भागने वाले अलकायदा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अमेरिका एक बार फिर कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवाद और अफगान तालिबान के प्रति पाकिस्तान के दोहरे रुख को नजरअंदाज करना चाह रहा था।
विज्ञापन
अमेरिका की भी परवाह नहीं करता है पाकिस्तान
ग्रेनियर ने कहा कि परमाणु हथियारों के सिद्धांत, भारत से खतरे के आकलन या विदेशी एवं देशी आतंकवादी समूहों के बारे में भी ऐसा ही हुआ। पूर्व सीआईए अधिकारी ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान अपने हितों पर इतना अडिग रहता है कि वह अमेरिकी दंड या लालच की भी परवाह नहीं करता।
इस्लामाबाद में सीआईए प्रमुख रहे इस अधिकारी ने सांसदों को पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या प्रतिबंध को लेकर चेतावनी भी दी। वास्तव में उन्होंने प्रोत्साहित किया कि अमेरिका को पाकिस्तान के बड़े सशस्त्र बल को बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जबकि कश्मीर सामाजिक और राजनीतिक रूप से विवाद का विषय बना हुआ है तब हमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बचने के लिए पाकिस्तान के परम्परागत सैन्य बल को बनाए रखना होगा और क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा बरकरार है।’
इस्लामाबाद में सीआईए प्रमुख रहे इस अधिकारी ने सांसदों को पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या प्रतिबंध को लेकर चेतावनी भी दी। वास्तव में उन्होंने प्रोत्साहित किया कि अमेरिका को पाकिस्तान के बड़े सशस्त्र बल को बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जबकि कश्मीर सामाजिक और राजनीतिक रूप से विवाद का विषय बना हुआ है तब हमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बचने के लिए पाकिस्तान के परम्परागत सैन्य बल को बनाए रखना होगा और क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा बरकरार है।’