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Google, Microsoft, Facebook ट्रंप के खिलाफ, वीजाधारकों का वर्क परमिट खत्म करने पर नाराज

Wed, 25 Apr 2018 09:46 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 25 Apr 2018 09:46 PM IST
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 Microsoft, Google, Facebook against Trump to end work permit for visas H-4, H-1B

फेसबुक समेत अमेरिकी आईटी उद्योग के प्रभावशाली सांसदों और प्रतिनिधियों ने एच-4 वीजा धारकों को देश में काम करने की मंजूरी (वर्क परमिट) खत्म करने के लिए ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित योजना का विरोध किया है। अमेरिका में वर्क परमिट पाने वाले यह वे लोग हैं जो एच-1 बी वीजा धारकों के जीवन साथी (पति या पत्नी) हैं।

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फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी शीर्ष आईटी कंपनियों द्वारा सिलिकॉन वैली में स्थापित एफडब्ल्यूडी डॉट यूएस की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ‘इस नियम को खारिज करना और अमरीकी कार्यबल से हजारों लोगों को हटाना उनके परिवारों के लिए विनाशकारी होगा और इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचेगा।’ 
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इससे एक दिन पहले अमेरिकी मीडिया ने यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस का वह पत्र प्रकाशित किया जिसमें ओबामा शासन के दौरान एच-4 वीजा धारकों को काम की अनुमति देने वाले अधिनियम को खत्म करने के फैसले का जिक्र किया गया था। एच-4 वीजा धारकों में सबसे अधिक संख्या भारतीय पेशेवरों और ज्यादातर महिलाओं की है। 
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एच-4 वीजा उन्हें दिया जाता है जो एच-1 बी वीजा धारकों के पति या पत्नी हैं। कैलिफोर्निया के शीर्ष 15 सांसदों के एक समूह की रिपोर्ट में कहा गया है कि एच-4 वीजा के तहत करीब 1,00,000 लोगों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिली। एच-4 वीजा धारक डॉ. मारिया नवास मोरेनो ने कहा, ‘एच-4 वीजा धारकों को काम की अनुमति को खत्म करने से, जिनमें अधिकांश मेरे जैसी शिक्षित महिलाएं हैं, हमारे देश को नुकसान पहुंचेगा और हजारों अमेरिकी परिवारों पर बुरा असर पड़ेगा।’ 

भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एच-1 बी वीजा मंजूरी में गिरावट

 Microsoft, Google, Facebook against Trump to end work permit for visas H-4, H-1B

अमेरिकी थिंक टैंक के मुताबिक देश की शीर्ष सात कंपनियों ने 2015 से 2017 के बीच एच-1 बी वीजा आवेदनों की मंजूरी में 43 फीसद की गिरावट महसूस की है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2017 में भारतीय कंपनियों के 8,468 नए एच-1 बी वीजा आवेदन अमेरिका के 1.60 करोड़ लेबर फोर्स का 0.006 फीसद हिस्सा थे। 

शीर्ष सात भारतीय कंपनियों को वित्त वर्ष 2017 में शुरुआती रोजगार के लिए केवल 8,468 एच-1 बी वीजा की अनुमोदन याचिकाएं मिलीं। इस आंकड़े में वित्त वर्ष 2015 के मुकाबले 43 फीसद की गिरावट दर्ज हुई है, तब करीब 14,792 आवेदन एच-1 बी वीजा के लिए मिले थे। आंकड़ों के मुताबिक मुश्किल यह नहीं है कि किस कंपनी को एच-1 बी वीजा हासिल हो रहे हैं, बल्कि यह है कि 85,000 की वार्षिक सीमा अमेरिका जैसी विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए काफी कम है। 

इसी अवधि में इन्फोसिस को 1,218 वीजा मिले, जबकि 2015 में उसे 2,830 वीजा मिले थे। विप्रो को 2017 में 1,210 वीजा मिले जबकि 2015 में उसे 3,079 वीजा मिले थे। कंपनियों की वीजा पर निर्भरता घटने तथा अमेरिका में घरेलू श्रमबल को मजबूत करने पर ध्यान दिए जाने से भी भारतीय कंपनियों को वीजा मंजूरियों में गिरावट आई।  

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