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रूस से करीबी रिश्ता रखने वाले को ट्रंप बनाएंगे अपना सुरक्षा सलाहकार
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
Updated Sat, 19 Nov 2016 05:24 AM IST
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अमेरिका के भावी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का पद पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल माइकल टी. फ्लिन को देने की पेशकश की है। ट्रंप की ट्रांजिशन टीम के शीर्ष अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि माइकल फ्लिन एक सेवानिवृत्त खुफिया अधिकारी हैं जो मानते हैं कि इस्लामी आतंकवाद ने सैन्य व विदेश नीति में सर्वाधिक ताकतवर भूमिका निभाते हुए दुनिया के समक्ष अस्तित्व संबंधी खतरा पैदा कर दिया है।
57 वर्षीय जनरल फ्लिन एक रजिस्टर्ड डेमोक्रेट हैं, लेकिन इसके बावजूद वह चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख सलाहकार थे। उन्हें रूस का करीबी माना जाता है तथा सेना और विदेशी नीति संबंधी मामलों का भी अनुभव है। उल्लेखनीय है कि स्वयं ट्रंप भी रूस के करीबी माने जाते हैं। अत: नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का यह फैसला उनके द्वारा नए सिरे से अमेरिकी नीतियां बनाने का संकेत दे रहा है। ट्रंप और जनरल फ्लाइन दोनों ही अमेरिका से बाहरी लोगों को निकालना चाहते हैं। दोनों ने ही ट्विटर पर ‘इस्लामोफोबिया’ को लेकर अपनी सीमाएं लांघी हैं।
जनरल फ्लिन ने एक सलाहकार के बतौर हमेशा ट्रंप को यही समझाया कि इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिका में ‘विश्व युद्ध’ चल रहा है, जिससे निपटने के लिए किसी से भी समझौता करना पड़े तो करना चाहिए। चाहे वह रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ही क्यों न हों। वह मुसलमानों की इबादत को अपने आप में समस्या की जड़ मानते हैं और कहते हैं कि यह कोई मजहब नहीं बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है। जब वह खुफिया सुरक्षा प्रमुख थे तब अमेरिका में शरीयत अपनाने का चलन बढ़ने संबंधी उनके विचारों को सहकर्मी ‘फ्लिन फैक्ट’ कहकर पुकारते थे।
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57 वर्षीय जनरल फ्लिन एक रजिस्टर्ड डेमोक्रेट हैं, लेकिन इसके बावजूद वह चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख सलाहकार थे। उन्हें रूस का करीबी माना जाता है तथा सेना और विदेशी नीति संबंधी मामलों का भी अनुभव है। उल्लेखनीय है कि स्वयं ट्रंप भी रूस के करीबी माने जाते हैं। अत: नवनिर्वाचित राष्ट्रपति का यह फैसला उनके द्वारा नए सिरे से अमेरिकी नीतियां बनाने का संकेत दे रहा है। ट्रंप और जनरल फ्लाइन दोनों ही अमेरिका से बाहरी लोगों को निकालना चाहते हैं। दोनों ने ही ट्विटर पर ‘इस्लामोफोबिया’ को लेकर अपनी सीमाएं लांघी हैं।
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जनरल फ्लिन ने एक सलाहकार के बतौर हमेशा ट्रंप को यही समझाया कि इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिका में ‘विश्व युद्ध’ चल रहा है, जिससे निपटने के लिए किसी से भी समझौता करना पड़े तो करना चाहिए। चाहे वह रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ही क्यों न हों। वह मुसलमानों की इबादत को अपने आप में समस्या की जड़ मानते हैं और कहते हैं कि यह कोई मजहब नहीं बल्कि एक राजनीतिक विचारधारा है। जब वह खुफिया सुरक्षा प्रमुख थे तब अमेरिका में शरीयत अपनाने का चलन बढ़ने संबंधी उनके विचारों को सहकर्मी ‘फ्लिन फैक्ट’ कहकर पुकारते थे।
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पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद के खिलाफ हैं फ्लिन
पाकिस्तान को मदद के खिलाफ हैं फ्लिन
अमेरिका के भावी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जिस जनरल माइकल फ्लिन को एनएसए पद की पेशकश की गई है वह पाकिस्तान को अमेरिकी मदद के खिलाफ रह चुके हैं। उन्होंने आतंकी संगठनों की मदद बंद न करने पर पाक को अमेरिकी मदद बंद करने का प्रस्ताव भी रखा था। हाल ही में अगस्त माह में एक किताब के भीतर उन्होंने पाकिस्तान को मदद बंद करने की वकालत की थी।
जनरल माइकल ने यह भी कहा कि पाक जैसे जो देश आतंकवाद के लिए सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं वहां आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तालिबान, हक्कानी और अल-कायदा जैसे नेटवर्कों की सुरक्षित पनाहगाह बने देशों को हर तरह की वित्तीय मदद खत्म करने की बात भी की थी। पूर्व में वह अफगानिस्तान और इराक में विद्रोहियों का नेटवर्क खत्म करने में मदद कर चुके हैं। जनरल फ्लिन मध्य-पूर्व संकट और इस्लामिक आतंकवाद को लेकर ओबामा प्रशासन की आलोचना भी कर चुके हैं। उन्होंने कुछ ट्वीट यहूदी समाज के खिलाफ भी किए, जिनके लिए बाद में उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी।
अमेरिकी नीतियों में बदलाव के संकेत
मॉस्को से निकटता के चलते ही 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने फ्लिन को डिफेंस इंटेलिजेंस चीफ के पद पर दो वर्ष तक सेवाएं देने के बाद हटा दिया था। अमेरिका के साझेदार देश ट्रंप द्वारा की जा रही इन नियुक्तियों पर पैनी निगाह जमाए हुए हैं। इन नियुक्तियों के माध्यम से भविष्य में अमेरिकी नीतियों में आने वाले बदलाव का अंदाजा लगाने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
समूचा यूरोप ट्रंप को लेकर संशय में
नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर अमेरिका का अहम साझेदार यूरोप ट्रंप के हर फैसले पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। सीरिया और यूक्रेन को लेकर रूस व यूरोपीय संघ आमने-सामने हैं। अब तक यूरोपीय संघ को इन मुद्दों पर अमेरिका का सहयोग मिलता रहा है, लेकिन ट्रंप अगर मॉस्को के करीब गए तो यूरोप बुरी तरह असहज हो जाएगा। यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ ही जर्मनी और फ्रांस की सरकारें भी ट्रंप को लेकर संशय में हैं।
अमेरिका के भावी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जिस जनरल माइकल फ्लिन को एनएसए पद की पेशकश की गई है वह पाकिस्तान को अमेरिकी मदद के खिलाफ रह चुके हैं। उन्होंने आतंकी संगठनों की मदद बंद न करने पर पाक को अमेरिकी मदद बंद करने का प्रस्ताव भी रखा था। हाल ही में अगस्त माह में एक किताब के भीतर उन्होंने पाकिस्तान को मदद बंद करने की वकालत की थी।
जनरल माइकल ने यह भी कहा कि पाक जैसे जो देश आतंकवाद के लिए सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं वहां आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तालिबान, हक्कानी और अल-कायदा जैसे नेटवर्कों की सुरक्षित पनाहगाह बने देशों को हर तरह की वित्तीय मदद खत्म करने की बात भी की थी। पूर्व में वह अफगानिस्तान और इराक में विद्रोहियों का नेटवर्क खत्म करने में मदद कर चुके हैं। जनरल फ्लिन मध्य-पूर्व संकट और इस्लामिक आतंकवाद को लेकर ओबामा प्रशासन की आलोचना भी कर चुके हैं। उन्होंने कुछ ट्वीट यहूदी समाज के खिलाफ भी किए, जिनके लिए बाद में उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी।
अमेरिकी नीतियों में बदलाव के संकेत
मॉस्को से निकटता के चलते ही 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने फ्लिन को डिफेंस इंटेलिजेंस चीफ के पद पर दो वर्ष तक सेवाएं देने के बाद हटा दिया था। अमेरिका के साझेदार देश ट्रंप द्वारा की जा रही इन नियुक्तियों पर पैनी निगाह जमाए हुए हैं। इन नियुक्तियों के माध्यम से भविष्य में अमेरिकी नीतियों में आने वाले बदलाव का अंदाजा लगाने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
समूचा यूरोप ट्रंप को लेकर संशय में
नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर अमेरिका का अहम साझेदार यूरोप ट्रंप के हर फैसले पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। सीरिया और यूक्रेन को लेकर रूस व यूरोपीय संघ आमने-सामने हैं। अब तक यूरोपीय संघ को इन मुद्दों पर अमेरिका का सहयोग मिलता रहा है, लेकिन ट्रंप अगर मॉस्को के करीब गए तो यूरोप बुरी तरह असहज हो जाएगा। यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ ही जर्मनी और फ्रांस की सरकारें भी ट्रंप को लेकर संशय में हैं।