जानिए ओबामा और मिट रोमनी को

Chandan Jaiswal Updated Fri, 05 Oct 2012 12:06 PM IST
Know Obama and Mitt Romney
मिट रोमनी

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिट रोमनी एक के बाद एक चुनौतियों को पार करते हुए जिस तरह ओबामा के खिलाफ़ उभरे हैं वो अपने आप में काबिले तारीफ़ है। मैसेच्यूसेट्स के पूर्व गवर्नर रहे मिट रोमनी इस चुनावी दौड़ में अपने साथ लाए हैं व्यापार का अपना अनुभव, एक कद्दावर नेता की छवि और उनके चुनाव अभियान को चंदा देने के लिए तैयार हज़ारों लोगों का एक मज़बूत नेटवर्क।

साल 2008 में जॉन मैक्केन के हाथों अपनी दावेदारी खोने के बाद रोमनी भले ही कुछ दिनों के लिए धीमे पड़े लेकिन ओबामा की ऐतिहासिक जीत के बाद उनके व्हाइट हाउस पहुंचने के साथ ही रोमनी ने 2012 के लिए अपनी तैयारी शुरु कर दी थी।

मॉरमॉन-पंथ के अनुयायी

रिपब्लिकिन पार्टी की दावेदारी जीतने के लिए रोमनी को सबसे ज़्यादा मेहनत करनी पड़ी ईसाई धर्म के मॉरमॉन पंथ में अपने विश्वास के प्रति लोगों को आश्वस्त करना। मॉरमॉन पंथ ईसाई धर्म का उदारवादी रुप है। हार्वर्ड में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ समय मिट रोमनी मॉरमॉन चर्च के प्रभारी रह चुके हैं।
रुढ़िवादियों में इस बात को लेकर खासी हलचल है कि उनके राजनीतिक जीवन पर उनकी उदारवादी सोच का प्रभाव है। हालांकि इस पंथ से जुड़े होने के कारण उन्हें कई आर्थिक फायदे भी मिले हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार
1999 में मिट रोमनी पर कई तरह की गड़बड़ियों में फंसे 2002 के सॉल्टलेक सिटी विंटर ओलंपिक की तैयारी का ज़िम्मा पड़ा। खेलों के आयोजक उनकी नेटवर्किंग और ईमानदारी से खासे प्रभावित थे और ये आयोजन कई मायनों में बेहद सफल रहा।


इसके बाद ही रोमनी मैसेच्यूसेट्स के गर्वनर चुने गए। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की घोषणा करते हुए ज़रूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य बीमा संबंधी एक कानून पास किया। ये कानून ही अब उनके खिलाफ़ तर्कों का आधार बन गया है। वजह है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सब्सिडी और सरकार पर बीमे का भार डालने वाला एक ऐसा ही कानून ओबामा ने भी पास किया जिसका अब रिपब्लिकन जमकर विरोध करते हैं।

रोमनी के कार्यकाल के दौरान ही कोर्ट के एक आदेश द्वारा मैसेच्यूसेट्स पहला ऐसा राज्य बना जहां समलैंगिकों को शादी करने का अधिकार मिला। रोमनी इस आदेश की खिलाफ़त करने को लेकर भी खासी चर्चा में रहे।

कितना दम?

मिट रोमनी इन आरोपों को लेकर अक्सर आलोचना का पात्र बनते रहे हैं कि उन्होंने रुढ़िवादियों को रिझाने के लिए समलैंगिकों और गर्भपात जैसे मुद्दों पर अपना पाला बदला है। 2006 और 2008 में हुए चुनावों में जहां रोमनी ने रिपब्लिकन पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वियों पर ही ध्यान केंद्रित रखा वहीं इस बार उन्होंने केवल राष्ट्रपति ओबामा पर निशाना साधा है। रोमनी के इस वैचारिक उतार-चढ़ाव के चलते पार्टी और वोटरों के बीच कई लोग उन्हें आशंका की नज़र से देखते हैं और यही वजह है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विज्ञापनों पर खासा पैसा खर्च किया है। इसी तैयारी के साथ छह नवंबर 2012 को वो आखिरकार वो ओबामा के खिलाफ़ चुनावी जंग में उतरेंगे।

बराक ओबामा

बराक ओबामा राष्ट्रपति के रूप में अपना पहला कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं और वे दूसरी बार डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रुप में राष्ट्रपति बनने के लिए चुनावी मैदान में हैं। उनका मुक़ाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार मिट रोमनी से है और कहा जा रहा है कि मुक़ाबला कड़ा है। लेकिन एक बात ओबामा के पक्ष में जाती है और वो है मतदाताओं का उनसे लगाव। मतदाता उन्हें व्यक्तिगत रुप से पसंद करते हैं भले ही वो अर्थव्यवस्था संभालने के उनके तौर तरीक़ों को लेकर उन्हें कम अंक देते हैं।

यदि वो वर्ष 2008 के अपने समर्थकों को एक बार फिर अपने साथ जुटा पाते हैं और उन मतदाताओं को अपनी ओर खींच पाते हैं जिनके दिल में मिट रोमनी के लिए जगह नहीं है लेकिन वे अभी कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं, तो बराक ओबामा की दूसरी बार जीत पक्की है। अमेरिका के इतिहास में बराक ओबामा पहले काले राष्ट्रपति हैं और उनका पहला कार्यकाल जद्दोजहद भरा रहा है।

उन्होंने और उनकी डेमोक्रेट पार्टी ने कई इतिहास रचे हैं। लेकिन ये भी सच है कि जब से उन्होंने पद संभाला है, अमेरिका भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहा है। रोज़गार के अवसर बहुत कम हैं और बेरोज़गारी आठ प्रतिशत पर बनी हुई है। इसके अलावा वर्ष 2010 के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स को ऐतिहासिक पराजय का सामना करना पड़ा। मिट रोमनी और रिपब्लिकन मतदाताओं को ये समझाने में लगे हुए हैं कि अब बराक ओबामा में लोगों को प्रेरित कर पाने की क्षमता नहीं बची है।

आकर्षक व्यक्तित्व और अद्भुत वक्ता
बराक हुसैन ओबामा ने चार नवंबर, 2008 को इतिहास रचा था जब उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन मैक्केन को आसानी से हराया था। वे अमेरिका के पहले काले राष्ट्रपति बन गए थे। उस वक्त उनकी उम्र 47 वर्ष थी। वे हेनरी ट्रूमैन के बाद पहले राष्ट्रपति थे जो शहरी इलाक़े से आए थे और जो हवाई में पैदा हुए थे।

उनमें जॉन मैक्केन, जॉर्ज बुश और बिल क्लिंटन से एकदम अलग एक और बात थी और वो ये कि न तो उनका संबंध वियतनाम के युद्ध से रहा है और न 1960 के दशक के सांस्कृतिक संघर्षों से। पद संभालने के बाद बराक ओबामा ने रिपब्लिकन के पुरज़ोर विरोध के बावजूद अर्थव्यवस्था को ताक़त देने वाले कार्यक्रम को संसद की मंज़ूरी दिलवाई, अमेरिका के स्वास्थ्य कार्यक्रम को बदला, वॉल स्ट्रीट और बैंकिंग उद्योग के लिए नए नियम क़ायदे बनाए और अमेरिका के वाहन उद्योग को डूबने से बचाया।

उन्होंने अमेरिकी समलैंगिकों को सेना में काम करने की छूट दिलवाई और संसद की मंज़री के बिना भी उन लोगों को वैधानिक दर्जा दिलवाया जो अवैध अप्रवासी बच्चे के रुप में अमरीका पहुँचे थे।

ओबामा और ओसामा
बराक ओबामा ने ओसामा बिना लादेन को मारने के लिए विशेष कमांडो दस्ता भेजा और सफलता हासिल की, इराक़ में युद्ध को समाप्त घोषित किया और रूस के राष्ट्रपति के दिमित्रि मेदवेदेव के साथ परमाणु समझौता करने में सफलता हासिल की। उनके कार्यकाल में अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध अपने चरम पर पहुँचा लेकिन वे सैनिकों की वापसी का कार्यक्रम घोषित करने में सफल रहे।

बराक ओबामा वर्ष 1961 में पैदा हुए थे। उनके पिता कीनिया के एक बुद्धिजीवी थे और हवाई यूनिवर्सिटी में पढ़ते समय वे कंसास निवासी एन से मिले थे और उनसे शादी की थी। बराक ओबामा बहुत छोटे थे जब उनके माता पिता में तलाक़ हो गया और उनके पिता परिवार को छोड़कर चले गए। इसके बाद अपने पिता से उनकी मुलाक़ात सिर्फ़ एक बार हुई जब वे हवाई आए थे। जब बराक ओबामा छह वर्ष के थे तो उनकी माँ ने एक इंडोनेशियाई व्यक्ति से शादी कर ली और परिवार जकार्ता चला गया। तब उन्हें बैरी के नाम से पुकारा जाता था। बाद में वे हवाई लौट आए और उनके नाना-नानी ने ही उनका पालन पोषण किया।

निजी जीवन पर सवाल
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में रहने और कीनियाई मुस्लिम पिता के बेटे होने की वजह से दक्षिण पंथियों ने ये ख़ूब प्रचार किया कि वे गोपनीय रूप से इस्लाम का पालन करते हैं और वे अमेरिका में पैदा नहीं हुए हैं। लेकिन बराक ओबामा इन अफ़वाहों को ग़लत साबित करने में सफल रहे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क से स्नातक ओबामा ने शिकागो के ग़रीब इलाक़ों में तीन वर्ष तक सामुदायिक संयोजक की तरह काम करते रहे। इसके बाद उन्होंने हॉवर्ड लॉ स्कूल में पढ़ाई की।

शिकागो की एक लॉ फ़र्म में काम करते हुए वे मिशेल रॉबिन्सन से मिले और 1992 में दोनों ने विवाह कर लिया। उनकी दो बेटियाँ मलिया और सशा हैं। हॉर्वर्ड की डिग्री के बाद वे नागरिक अधिकारों मामलों की वकालत करने लगे फिर वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो में पढ़ाने लगे। यूनिवर्सिटी में वे एक लोकप्रिय शिक्षक और विधि- विचारक के रूप में जाने गए। 1996 में वे इलिनोइस प्रांत से सीनेट चुने गए।

सीनेटर के रूप में उन्होंने इराक़ युद्ध का जमकर विरोध किया जिसने बाद में उन्हें राष्ट्रपति की उम्मीदवारी में सहायता की। वर्ष 2007 में जब उन्होंने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए दावेदारी पेश की तो उन्हें सीनेट में दो ही वर्ष हुए थे। उनके कुछ विरोधियों ने उन्हें अपात्र कहा तो कुछ ने अपरिपक्व, लेकिन वे अपने आपको साबित करने में सफल रहे।

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