दो बार गर्वनर रहीं निक्की हेली को ट्रंप ने दी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, जानिए उनके बारे में
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भारतीय मूल की निक्की हेली उर्फ निम्रता रंधावा संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की अगली राजदूत होंगी, उन्हें निवार्चित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। लगातार दो बार से अमेरिकी राज्य कैरोलिना की गर्वनर निक्की हेली की गिनती अमेरिका के प्रमुख राजनीतिज्ञों में होती है। यही कारण है कि राष्ट्रपति निर्वाचित होते ही डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना हालांकि इससे पहले उनके अमेरिका की विदेश मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा थी। मूल रूप से पंजाब के अमृतसर निवासी निक्की हेली ने काफी कम उम्र में राजनीतिक जीवन में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें।
निक्की हेली का असली नाम निम्रता रंधावा है, उनका जन्म अमेरिकी राज्य साउथ कैरोलिनी के बैमबर्ग में 1972 में हुआ था। उनके पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राजकौर रंधावा है। निक्की आज भी खुद को एक भारतीय माता पिता की गर्वीली बेटी और भारत को दूसरा घर मानती हैं।
निक्की हेली उस समय चर्चाओं में आई जब मात्र 38 साल की उम्र में उन्हें साल 2011 में अपने गृह राज्य साउथ कैरोलिना का गर्वनर चुना गया। वह पहली गैर यूरोपीय और एशियन अमेरिकन थी जो इस पद के लिए चुनीं गईं। इसके अलावा वह दूसरी भारतीय अमेरिकी थीं जो गर्वनर चुनी गईं उनसे पहले भारतीय मूल के ही बॉबी जिंदल अमेरिकी प्रांत लूसियाना के गर्वनर चुने गए थे।
दो बार लूसियाना की गर्वनर चुनीं जा चुकी हैं निक्की हेली
अपनी नीतियों और लोकप्रिय छवि के चलते निक्की हेली साल 2015 में दूसरी बार फिर गर्वनर के पद पर चुनीं गईं। 44 साल की उम्र में वह इस समय अमेरिका की सबसे युवा गर्वनर हैं।
निक्की हेली ने माइकल हेली से शादी की है। दोनों ने पहले एक चर्च में शादी की इसके बाद गुरुद्वारे में। दोनों के दो बच्चे हैं जिनके नाम रीना और नलिन हैं।
राष्ट्रपति चुने जाने के बाद बेशक डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत नियुक्त कर दिया हो लेकिन ऐसा नहीं है कि निक्की हेली शुरू से ही ट्रंप समर्थक रहीं हों। राष्ट्रपति चुनाव के शुरूआती दौर में प्राइमरी इलेक्शन में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से सीनेटर मार्को रूबियो और टेड क्रूज उनकी पहली पसंद थे। लेकिन जनरल इलेक्शन में उन्होंने ट्रंप को समर्थन दिया, हेली का कहना था कि नीतियों और कार्यप्रणाली के अनुसार ओबामा के मुकाबले ट्रंप ज्यादा प्रभावशाली हैं।