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अपनी तरह के पहले मामले में अमेरिका में भारतवंशी की नागरिकता रद्द, वापस भेजा जाएगा
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Wed, 10 Jan 2018 11:36 AM IST
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अपनी तरह के पहले मामले में अमेरिका ने भारतीय मूल के एक व्यक्ति की प्राकृतिक तौर पर मिलने वाली नागरिकता रद्द कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, उसने धोखाधड़ी से इसे हासिल किया था। न्याय विभाग के अनुसार, बलजिंदर सिंह उर्फ दविंदर सिंह (43) ने एक अमेरिकी महिला से शादी की थी। इसके चलते वह नागरिकता का प्राकृतिक हकदार हो गया। अब जबकि उसने ग्रीन कार्ड दर्जे को लौटा दिया है। यह होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के विवेक पर निर्भर करता है कि वह उसके खिलाफ चल रही प्रक्रिया को वापस लेता है या नहीं।
न्याय विभाग ने पिछले साल सितंबर में इस संबंध में अमेरिकी अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि सिंह ने अपने नागरिकता आवेदन में पूर्व के बहिष्कार के आदेशों और विभिन्न पहचान रखने के चलते उसके डिपोर्टेशन से जुड़े तथ्यों को छिपाया था।
अमेरिका के न्यू जर्सी में एक जिला अदालत ने पांच जनवरी को उसे स्वत: मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता खारिज कर दी थी। इस संबंध में उसे मिले प्राकृतिक हकदार के प्रमाणपत्र को भी रद्द कर दिया था।
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भारत का रहने वाला बलजिंदर 25 सितंबर, 1991 को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था। उसके पास यात्रा और पहचान दस्तावेज नहीं थे। उसने दावा किया कि उसका नाम दविंदर सिंह है। उसे बहिष्कार प्रक्रिया में डाल दिया गया। वह इमिग्रेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुआ। इस पर संघीय अभियोजकों ने सात जनवरी, 1992 को उसे वापस भेजने का आदेश दे दिया।
चार हफ्ते बाद यानी छह फरवरी, 1992 को उसने बलजिंदर सिंह के नाम से शरण के लिए आवेदन किया। उसने दावा किया वह बिना जांच के अमेरिका में घुसा भारतीय है। इसके बाद एक अमेरिकी महिला से शादी करने के बाद उसने अपना आवेदन वापस ले लिया। महिला ने उसके बदले वीजा के लिए याचिका दायर की।
अभियोजकों का आरोप है कि बलजिंदर सिंह को 28 जुलाई, 2006 को अमेरिकी नागरिक से शादी के बाद स्वत: ही नागरिकता मिल गई। दरअसल, अमेरिका का होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ‘ऑपरेशन जेनेस’ के तहत उन मामलों की जांच कर रहा है जिनमें गलत तरीकों से नागरिकता हासिल की गई है।
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न्याय विभाग ने पिछले साल सितंबर में इस संबंध में अमेरिकी अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि सिंह ने अपने नागरिकता आवेदन में पूर्व के बहिष्कार के आदेशों और विभिन्न पहचान रखने के चलते उसके डिपोर्टेशन से जुड़े तथ्यों को छिपाया था।
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अमेरिका के न्यू जर्सी में एक जिला अदालत ने पांच जनवरी को उसे स्वत: मिलने वाली अमेरिकी नागरिकता खारिज कर दी थी। इस संबंध में उसे मिले प्राकृतिक हकदार के प्रमाणपत्र को भी रद्द कर दिया था।
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भारत का रहने वाला बलजिंदर 25 सितंबर, 1991 को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था। उसके पास यात्रा और पहचान दस्तावेज नहीं थे। उसने दावा किया कि उसका नाम दविंदर सिंह है। उसे बहिष्कार प्रक्रिया में डाल दिया गया। वह इमिग्रेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुआ। इस पर संघीय अभियोजकों ने सात जनवरी, 1992 को उसे वापस भेजने का आदेश दे दिया।
चार हफ्ते बाद यानी छह फरवरी, 1992 को उसने बलजिंदर सिंह के नाम से शरण के लिए आवेदन किया। उसने दावा किया वह बिना जांच के अमेरिका में घुसा भारतीय है। इसके बाद एक अमेरिकी महिला से शादी करने के बाद उसने अपना आवेदन वापस ले लिया। महिला ने उसके बदले वीजा के लिए याचिका दायर की।
अभियोजकों का आरोप है कि बलजिंदर सिंह को 28 जुलाई, 2006 को अमेरिकी नागरिक से शादी के बाद स्वत: ही नागरिकता मिल गई। दरअसल, अमेरिका का होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ‘ऑपरेशन जेनेस’ के तहत उन मामलों की जांच कर रहा है जिनमें गलत तरीकों से नागरिकता हासिल की गई है।