अमेरिका-उत्तर कोरिया की सीक्रेट मीटिंग, चार जरूरी सवाल
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इस मुलाकात की उम्मीद तो थी पर इसकी टाइमिंग के बारे में कम ही लोगों को जानकारी थी। अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए निदेशक माइक पोम्पियो गुपचुप तरीके से उत्तर कोरिया के दौरे पर गए, उनकी किम जोंग उन से सीक्रेट मुलाकात हुई। अमेरीकी मीडिया ने उच्चस्तरीय सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि पोम्पियो ईस्टर के मौके पर (31 मार्च और 1 अप्रैल) उत्तर कोरिया के गुप्त दौरे पर गए थे। पोंपियों के दौरे का मकसद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच सीधी बातचीत का रास्ता साफ करना था। इससे पहले ट्रंप ने खुद कोरिया के साथ वार्ता को उच्चस्तरीय बताते हुए कहा था कि किम के साथ आगामी बैठक के लिए पांच संभावित जगहों पर विचार किया जा रहा है।
गुप्त वार्ता के बारे में क्या जानते हैं?
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक माइक पोम्पियो की उत्तर कोरिया की यह यात्रा रेक्स टिलरसन के इस्तीफे और सीआईए प्रमुख को नया विदेश मंत्री बनाए जाने के तुरंत बाद की गई। अखबार के अनुसार तत्कालीन अमरीकी विदेश मंत्री मेडलिन अल्ब्राइट ने साल 2000 में किम जोंग इल से मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया का दौरा किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर कोई संपर्क नहीं है।
अखबार के पत्रकार ने सीआईए, व्हॉइट हाउस और संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के प्रतिनिधित्व को पुष्टि के लिए आवेदन भेजा था लेकिन इन तीनों जगहों से इस गुप्त दौरे पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार कर दिया गया। बाद में, रायटर्स ने अपने सूत्रों से इस दौरे की सूचना की पुष्टि की।
अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संपर्क कैसे हुआ?
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। हालांकि इस दौरान यह पहला मौका नहीं है जब अमरीकी खुफिया अधिकारियों ने उत्तर कोरिया का दौरा किया है। पहले भी कभी-कभी दोनों देशों के राजनयिक और प्रतिनिधियों का दौरा हुआ करता था। इससे पहले 2014 में नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक जेम्स क्लैपर उत्तर कोरिया की जेलों में बतौर कैदी रह रहे दो अमरीकी नागरिकों को वापस अपने देश लाने की कोशिशों के तहत वहां गए थे।
हालांकि दोनों देशों के बीच संपर्क मुख्य रूप से अनधिकृत चैनलों और मध्यस्थों के माध्यम से होता रहा है। कोरियाई युद्ध के बाद हुए कोरियाई प्रायद्वीप के विभाजन के 65 साल से अधिक हो चुके हैं लेकिन शांति संधि पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं।
कब और कहां हो सकती है वार्ता?
पिछले महीने, डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ही अप्रत्याशित रूप से घोषणा की थी कि उन्होंने उत्तर कोरिया की सीधी बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इससे पहले, किसी अमरीकी राष्ट्रपति की उत्तर कोरिया के शासक से कभी आधिकारिक मुलाकात नहीं हुई है। ट्रंप ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि यह बातचीत जून या इससे कुछ पहले हो सकती है। उत्तर कोरिया पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को न मानने के आरोप लगते रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम की वजह से भी उत्तर कोरिया विश्व बिरादरी में अलग-थलग स्थिति में है। उत्तर कोरिया ने अब तक छह परमाणु परीक्षण किए हैं और उसने लंबी दूरी की ऐसी मिसाइल का भी परीक्षण किया जो अमेरिका तक पहुंच सकता है। हालांकि, शीतकालीन ओलंपिक खेलों के कारण बातचीत का अच्छा अवसर मिला और तब से केवल कुछ हफ्तों में ही दक्षिण कोरिया के साथ ही चीन के कई प्रतिनिधिमंडलों ने उत्तर कोरिया का दौरा किया।
मीटिंग कब होगी?
ट्रंप ने कहा था कि यह वार्ता जून के बाद नहीं होनी चाहिए जिसे व्हॉइट हाउस ने गंभीरता से लिया है। हालांकि, पोम्पियो की गुप्त यात्रा की इस खबर ने निश्चित ही उत्तर कोरिया के पड़ोसी और इस क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक साझेदार जापान और अमेरिका के बीच बातचीत की खबरों को दबा दिया है। किम के साथ ट्रंप की होने वाली बातचीत से जापान भी थोड़ा चिंतित दिख रहा है और प्रधानमंत्री शिंजो आबे बातचीत के लिए अमेरिका गए हैं।
ट्रंप ने आबे को फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में आमंत्रित किया है, जहां उन्होंने गोल्फ खेलने की योजना बनाई है। अमरीकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच उत्तर कोरिया के मसले पर कोई मतभेद नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आबे अमरीकी दौरे पर इसलिए गए हैं ताकि ट्रंप को उत्तर कोरियाई शासन पर बहुत ज्यादा दबाव की नीति को अपनाने के लिए राजी कर सकें।