NSG एंट्री के लिए यूएस का फार्मूला: भारत की राह आसान, मुश्किल में पाकिस्तान
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चीन के साथ मिलकर न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत की एंट्री का विरोध कर रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार द डॉन ने दावा किया है।
डॉन में छपी खबर में पत्रकार अनवर इकबाल ने लिखा है कि अमेरिका ने भारत की एंट्री के लिए एक नया फार्मूला निकाला है। जिसके अनुसार यूएस आधारित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन का कहना है कि नए मसौदा प्रस्ताव से भारत को एनएसजी में सदस्यता के लिए आसानी होगी वहीं पाकिस्तान के लिए मुश्किल हो सकती है।
पिछले हफ्ते यूएस मीडिया में छपी खबर में कहा गया था कि एनएसजी के पूर्व अध्यक्ष राफेल मारियानो ग्रॉसी ने दो पेज का दस्तावेज तैयार किया है। इस दस्तावेज के मुताबिक भारत और पाकिस्तान जैसे परमाणु अप्रसार देशों की एनएसजी में एंट्री हो सकती है।
ग्रॉसी एनएसजी के वर्तमान अध्यक्ष, दक्षिण कोरिया के सांग युवा वान की जगह कार्यकारी अध्यक्ष तौर पर काम देख्ा रहे हैं। उनके दस्तावेज की अहमियत अर्धसरकारी दस्तावेज की तरह है।
नए सदस्यों की एंट्री पर क्या कहता है दस्तावेज
भारत, पाकिस्तान की एनएसजी में एंट्री को न रोके इसके लिए ग्रॉसी के दस्तावेज में प्रस्ताव है कि "गैर परमाणु अप्रसार संधि वाले देशों को ये समझना चाहिए कि वो किसी अन्य गैर परमाणु अप्रसार संधि वाले देश की सदस्यता को रोकने के लिए आम सहमति न बनाएं।"
वहीं आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक, डेरिल किंबल ने चेताया है कि ग्रॉसी के दस्तावेज से भारत की तरह ही पाकिस्तान के पास भी एनएसजी में सदस्यता का मौका है।
लेकिन एनएसजी देशों के साथ असैन्य परमाणु व्यापार संबंध की वजह से भारत को एनएसजी की सदस्यता में छूट मिल सकती थी।
परमाणु अप्रसार संधि पर करना होता है हस्ताक्षर
48 देशों के इस समूह में एंट्री के नए नियमों के मुताबिक इस समूह में एंट्री से पहले परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करना जरूरी है। भारत, पाकिस्तान और इजराइल के साथ उन तीन देशों में से एक हैं जिन्होंने कभी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
इस साल से पहले, भारत ने एनएसजी सदस्यता के लिए आवेदन दिया था जिसके बाद पाकिस्तान ने भी एनएसजी के लिए आवेदन किया। जहां एक तरफ अमेरिका समेत एनएसजी में मजबूत अहमियत रखने वाले कई अन्य देशों ने भारत की सदस्यता का समर्थन किया, वहीं चीन समेत आधा दर्जन देशों ने भारत का विरोध किया।
भारत को आशा थी कि वो सियोल में हुए पूर्ण अधिवेशन में ही एनएसजी की सदस्यता हासिल कर लेगा, लेकिन ये अधिवेशन भारत के आवेदन पर विचार किये बिना ही खत्म हो गया। हालांकि कई देशों ने भारत की एनएसजी में सदस्यता के लिए समर्थन किया थ्ाा।
क्या दावा कर सकता है भारत
किंबल ने ग्रॉसी के दस्तावेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत दावा कर सकता है कि एनएसजी की सदस्यता के लिए जो जरूरी कदम हैं वो लिए जा चुके हैं। जिस वजह से भारत पर फैसला किया जा सकता है जबकि पाकिस्तान अलग स्थिति में है।
प्रस्ताव के मुताबिक नॉन एनपीटी देश इस बात कि घोषणा करें कि वो सख्ती से एनएसजी के नियमों का वर्तमान और भविष्य में पूरी तरह से पालन करेंगे। नए सदस्य अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सामने ये भी घोषणा करें कि असैनिक परमाणु सुविधाओं का पालन करेंगे।
आवेदक को एनएसजी को ये भी विश्वास दिलाना होगा कि वो सभी घोषित मानकों के अनुरूप हैं और उसी के आधार पर आवेदन कर रहे हैं।