अपनी बात पर कायम रहे ट्रंप तो फंस जाएंगे भारत और चीन
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दुनिया नें एशिया मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर जाना जाता है। मैन्युफैक्चरिंग में चीन सबसे आगे है। कह सकते हैं कि चीन की ज्यादातर अर्थव्यवस्था उसके बनाए सामान के निर्यात पर टिकी है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप अगर अपनी कही बातों को लेकर अडिग रहते हैं, तो न सिर्फ चीन को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, बल्कि इसका असर पूरे एशिया पर होगा।
चीन को लेकर अमेरिका की कूटनीति किसी से छिपी नहीं है। चीन हमेशा से ट्रंप के निशाने पर रहा है। ट्रंप चीन के सामान पर पेनाल्टी टैरिफ लगाना चाहते हैं। ट्रंप का चीन प्रति नजरिया इसी बात से जाहिर होता है कि वह अपने तमाम कैंपेन में चीन को करेंसी बिगाड़ने वाली अर्थव्यवस्था करार दे चुके हैं।
ट्रंप के चीन के प्रति सख्त कदम उठाने पर अगर जवाब में चीन ने भी बदले की भावना से कदम उठाया तो असर बाकी एशिया पर पड़ना लाजमी है। साफ है कि लपेटे में भारत भी आएगा। हालांकि ट्रंप सरकार को मोदी सरकार के फेवर में माना जा रहा है।
क्या बदले की भावना से उतरेगा चीन?
अमेरिका में तमाम आर्थिक विश्लेषक ट्रंप सरकार को एशिया के लिए मुसीबत बता रहे हैं, खासकर चीन और फिलीपींस के लिए। गोल्डमैन सैक्स इन के एक आर्थिक विश्लेषक ने एक नोट में लिखा कि ट्रंप सरकार के रहते व्यापार को लेकर चीन के पास दो ही विकल्प होंगे या तो कमजोर निर्यात के कारण विकास दर में गिरावट स्वीकार करे, या फिर बदले की कार्रवाई करे।
ट्रंप सरकार से सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिण कोरिया और फिलीपींस को हो सकता है। ट्रंप कोरिया के साथ किए गए 2012 ट्रेड की आलोचना करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा था कि इस करार से एक लाख अमेरिकियों की नौकरियां छिन गईं। इसके अलावा ट्रंप यह भी फैसला ले सकते हैं कि जो सुरक्षा अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को दी है, वह वापस ले लें। यानी पूरा खर्च दक्षिण कोरिया को ही उठाना होगा।
ट्रंप अपनी अप्रवास प्रतिबंध नीति पर गौर करते हैं तो इससे फिलीपींस के लिए मुश्किल खड़ी होगी। फिलीपींस के 35 फीसदी नागरिक तो अकेले अमेरिका में ही काम करते हैं। इसके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस अमेरिका के लिए सबसे बड़ा आयातक देश है। ट्रंप अमेरिका में नौकरियां वापस लाने की बात पर कायम रहते हैं तो फिलीपींस के हितों पर गाज गिरना लगभग तय है।