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अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे डोनाल्ड ट्रंप, जानिए वजह

Thu, 04 Jan 2018 05:34 PM IST
एजेंसी/ वाशिंगटन 
एजेंसी/ वाशिंगटन  Updated Thu, 04 Jan 2018 05:34 PM IST
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Donald Trump is not interested in US President post says Fire and Fury
फाइल फोटो

डोनाल्ड ट्रंप कभी भी अमेरिका का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे। ट्रंप ने चुनाव प्रचार की शुरुआत में अपने सहायक सैम नुनबर्ग से कहा था कि उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव सिर्फ मशहूर होने के लिए लड़ा। वह दुनिया के सबसे मशहूर शख्स बनना चाहते हैं। 

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ट्रंप की अमेरिकी पत्रकार माइकल वुल्फ ने अपनी नई किताब ‘फायर एंड फ्यूरी : इनसाइड द ट्रंप व्हाइट हाउस’ में ये खुलासे किए हैं। माइकल के मुताबिक ट्रंप के दोस्त फाक्स चैनल के पूर्व प्रमुख रोजर एलेस ने ट्रंप से कहा था कि अगर तुम टेलीविजन में अपना करियर बनाना चाहते हो तो पहले राष्ट्रपति का चुनाव लड़ो। इसलिए ट्रंप चुनाव लड़े।
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इस किताब के अंश न्यूयॉर्क मैगजीन में ‘डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे’ शीर्षक से प्रकाशित हुए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने इस किताब के सभी दावों को नकार दिया है। सारा के मुताबिक ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वुल्फ से उनकी सिर्फ पांच से सात मिनट की मुलाकात हुई थी और वह भी किताब से संबंधित नहीं थी। 
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मैग्जीन में दावा किया गया है कि वुल्फ ने इस किताब के लिए 18 महीने तक ट्रंप के सहयोगियों और कर्मचारियों के इंटरव्यू लिए। वुल्फ के मुताबिक ट्रंप के बेटे जूनियर ट्रंप ने अपने एक दोस्त को बताया था कि चुनाव परिणाम वाली आठ बजे जब ट्रंप की जीत का ऐलान हुआ तो उनके पिता को लगा कि उन्होंने कोई भूत देख लिया हो। प्रथम महिला मेलानिया बिल्कुल खुश नहीं हुईं, वह तो रो रही थीं। 

ट्रंप को सलाह देना बेहद मुश्किल 

Donald Trump is not interested in US President post says Fire and Fury

वुल्फ की मानें तो व्हाइट हाउस पहुंचते ही ट्रंप ने वहां अराजकता मचा दी। उन्हें सलाह देना सबसे मुश्किल काम होता है क्योंकि वह हर विषय को खुद को विशेषज्ञ मानते हैं। भले उनके विचार कितने तुच्छ क्यों न हों। दावा है जीत के बाद ट्रंप पूरी तरह बदल गए। वह मानने लगे हैं कि वह पूरी तरह राष्ट्रपति बनने के काबिल थे। 

एच-1 बी वीजा पर नरम थे ट्रंप
वुल्फ ने किताब में दावा किया है कि राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप एच-1 वीजा मुद्दे पर काफी नरम थे। 14 दिसंबर, 2016 को जब ट्रंप टॉवर में सिलिकॉन वैली के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप से मुलाकात की तब ट्रंप एच-1 बी वीजा के पक्ष में थे। इस मुलाकात के बाद उसी दिन दोपहर को फोन पर बातचीत में ट्रंप ने रूपर्ट मर्डोक से कहा कि तकनीकी उद्योग को इस वीजा की जरूरत है। अभी उद्योग में बेहद ज्यादा प्रावधान है और ओबामा ने इन लोगों का साथ नहीं दिया। 

मेरे पास इन लोगों की मदद करने का मौका है। इस पर मर्डोक ने कहा, डोनाल्ड आठ साल से ओबामा इन लोगों की जेब में थे। यही प्रशासन चल रहे थे। इन्हें मदद की जरूरत नहीं है। मर्डोक ने ट्रंप को सुझाव दिया कि एच-1 बी वीजा पर उदार नीति से अमेरिका के दरवाजे कुछ चुनिंदा प्रवासियों के लिए खुल जाएंगे। ऐसे में उनकी प्रवासियों को रोकने की नीतियों का क्या होगा। 

दावा है कि ट्रंप को समझा पाने से नाकाम रहने पर मर्डोक ने फोन रखने के बाद ट्रंप को मूर्ख कहा था। हालांकि वीजा पर ट्रंप का यह नरम रुख इस मुद्दे पर जनता के बीच आई बातों और नीतियों से बिल्कुल अलग है। ट्रंप चुनाव प्रचार के दौरान और जीत के बाद वीजा नियमों को कठोर करने की बात कह रहे हैं। 

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