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नौकरियां आउटसोर्स करने के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस में फिर से विधेयक पेश
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Sat, 04 Mar 2017 03:58 AM IST
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कॉल सेंटर
- फोटो : twitter
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अपने कॉल सेंटरों को विदेशों में ले जाने वाली कंपनियों को सरकार से मिलने वाले अनुदानों और तय ऋणों के लिए अयोग्य करार देने वाले द्विदलीय विधेयक को आज अमेरिकी कांग्रेस में एक बार फिर से पेश किया गया। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों को भारत जैसे देशों में जाने से रोकना है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद जीन ग्रीन और रिपब्लिकन डेविड मैककिनले द्वारा पेश किया गया यह विधेयक अमेरिकी कॉल सेंटर एवं उपभोक्ता सुरक्षा कानून कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां विदेशों में भेजने से रोकता है और उन्हें खुद को अमेरिका में ही स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए यह उन ‘खराब कंपनियों’ की सूची सार्वजनिक करता है, जिन्होंने अपनी सभी या अधिकांश सेवाएं विदेशों में भेज दी हैं।
दोनों सांसदों ने कहा कि इस सूची में नाम आने का अर्थ होगा कि ये कंपनियां संघीय अनुदानों और तय ऋणों के लिए अयोग्य हो जाएंगी। वहीं, उन्हें विदेशों में स्थित अपने कॉल सेंटरों के ठिकानों की जानकारी ग्राहकों को देनी होगी और उन्हें अमेरिका में स्थित सेवा प्रदाता के पास स्थानांतरित किए जाने के अमेरिकी ग्राहकों के अनुरोध को स्वीकार करना होगा। यह विधेयक वर्ष 2013 में आए विधेयक के समान है।
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डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद जीन ग्रीन और रिपब्लिकन डेविड मैककिनले द्वारा पेश किया गया यह विधेयक अमेरिकी कॉल सेंटर एवं उपभोक्ता सुरक्षा कानून कंपनियों को अमेरिकी नौकरियां विदेशों में भेजने से रोकता है और उन्हें खुद को अमेरिका में ही स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए यह उन ‘खराब कंपनियों’ की सूची सार्वजनिक करता है, जिन्होंने अपनी सभी या अधिकांश सेवाएं विदेशों में भेज दी हैं।
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दोनों सांसदों ने कहा कि इस सूची में नाम आने का अर्थ होगा कि ये कंपनियां संघीय अनुदानों और तय ऋणों के लिए अयोग्य हो जाएंगी। वहीं, उन्हें विदेशों में स्थित अपने कॉल सेंटरों के ठिकानों की जानकारी ग्राहकों को देनी होगी और उन्हें अमेरिका में स्थित सेवा प्रदाता के पास स्थानांतरित किए जाने के अमेरिकी ग्राहकों के अनुरोध को स्वीकार करना होगा। यह विधेयक वर्ष 2013 में आए विधेयक के समान है।
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