फ्लोरिडा में जिनपिंग से मिले ट्रंप, होगी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात
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अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार फ़्लोरिडा के एक रिसार्ट में मिले हैं। दोनों नेता अगले 24 घंटे तक वहीं रहेंगे। इस दौरान उनकी कई बैठकें होनी हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण माने जाने वाले मुद्दों पर बातचीत की संभावना है।
हालांकि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर कई बार हमला किया। अब जब ट्रंप राष्ट्रपति बन गए हैं तो तीन मुद्दे ऐसे हैं जिन पर वो वैसी ही प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं जैसा कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के समय किया था।
आइए हम आपको बताते हैं, उन तीन मुद्दों के बारे में जिन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को या तो अपना रुख बदलना पड़ेगा या चुप रहना होगा।
ताइवान और वन चाइना पॉलिसी
साल 1979 के बाद से ही किसी चुने हुए अमरीकी राष्ट्रपति या कामकाज संभाल चुके अमेरीकी राष्ट्रपति ने ताइवान के राष्ट्रपति से सीधी बातचीत नहीं की है। लेकिन पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इस परंपरा को तोड़ते हुए ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग वेन की ओर से टेलीफ़ोन पर आई बधाई को खुद स्वीकार किया और उनसे बात की।
अमरीका पिछले 35 सालों से चीन की 'वन चाइना पॉलिसी' का सम्मान करता आया है। ट्रंप की ताइवान के नेता से हुई बातचीत के बाद चीन ने 24 घंटे से भी कम समय में अमेरीका से इस पर अपनी आपत्ति दर्ज़ करा दी। उसने अमेरीका से कहा कि चीन-अमरीका के संबंधों को टूटने से बचाने के लिए वह ताइवान के मुद्दे पर वह सतर्कता बरते।
ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है। पिछले चार दशक से वो उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग करने के काम में जुटा हुआ है। इसके कुछ दिन बाद ट्रंप ने यह कहकर एक बार फिर चीन को नाराज कर दिया कि ताइवान के साथ औपचारिक रिश्ते बनाकर वो 'वन चाइना पॉलिसी' को तोड़ सकते हैं। यह अफवाह भी उड़ी कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में ताइवान के एक प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया जाएगा।
वन चाइना पॉलिसी
ट्रंप ने कहा कि अगर चीन व्यापार रियायतें नहीं देता है और अन्य मुद्दों का समाधान नहीं करता है तो, वो इस नीति को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं देखते हैं।
चीन और अमरीका के बीच जारी इस वाकयुद्ध पर लगाम उस समय लगा जब कार्यभार संभालने के बाद डोनल्ड ट्रंप ने नौ फ़रवरी को शी जिनपिंग से टेलीफ़ोन पर बात की।
ट्रंप ने कहा कि वो 'वन चाइना पॉलिसी' का सम्मान करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं ने दौरे के न्योते का आदान-प्रदान किया।
बुधवार को व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि दोनों नेताओं की मुलाकात 'वन चाइना पॉलिसी' के समर्थन की पुष्टि करने वाली होगी।
मुद्रा से छेड़छाड़ करने वाला
मुद्रा से छेड़छाड़ करने वाला-
व्हाइट हाउस के अधिकारी से जब यह पूछा गया कि अगर ट्रंप ने शी जिनपिंग से मुद्रा से छेड़छाड़ को लेकर अपने पुराने बयान पर कुछ कह दिया तो क्या, इस पर अधिकारी ने कहा कि यह वित्त विभाग का मामला है, इसलिए इस पर बात नहीं होगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 में कई बार कहा कि अंतरराष्ट्रीय निर्यात कीमतों को कम करने के लिए चीन ने अपनी मुद्र युआन का अवमूल्यन किया। लेकिन ट्रंप के इस दावे का अमेरीकी अर्थशास्त्रियों ने चुनौती दी।
ट्रंप ने पिछले साल जून में कहा था कि वो अपने कार्यकाल के पहले दिन ही यह सुनिश्चित करेंगे कि इस एशियाई देश की छवि मुद्रा का अवमूल्यन करने वाली बनाई जाए। लेकिन ट्रंप प्रशासन के कामकाज संभालने के बाद यह मुद्दा अबतक केवल एक बार ही उठा है।
फरवरी में अमरीका के वित्त सचिव स्टीवन म्यूचिन ने चीन की छवि मुद्रा का अवमूल्यन करने वाले देश के रूप में बनाने के विचार को खारिज कर दिया था।
चीन एक ग़ैर बाजारू अर्थव्यस्था
चीन एक ग़ैर बाजारू अर्थव्यस्था-
जिस पर दुनिया की इन दो महाशक्तियों में मतभेद रहा है, वह है अमरीका की ओर से चीन को बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की औपचारिक मान्यता न देना। चीन 2001 से ही अपनी अर्थव्यवस्था की ग़ैर व्यापारिक छवि से बाहर आने की कोशिश कर रहा है। उसी साल उसने विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) की सदस्यता ली थी।
अगर चीन को अमरीका और यूरोपीय संघ से यह मान्यता मिल जाती है तो इसका मतलब यह होगा कि वो देश जिन्हें चीन अपने सामान का निर्यात करता है, वो करों की मांग और प्रतिबंध कम लगाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के मुताबिक़ चीन को जबतक बाज़ार अर्थव्यवस्था के रूप में मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक अमरीका चीनी कंपनियों को कर देने का दबाव डाल सकता है, जिससे की उनके उत्पाद की अमरीकी बाजार में कीमतें बढ़ जाएं।
इस मामले में डोनल्ड ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती शासन की नीति को नहीं छोड़ा है, जो कि चीन को बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था नहीं मानता था। ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान में कहा था कि सस्ता चीनी निर्यात धरती पर सबसे बड़ी डकैती है और यह अमरीकी अर्थव्यवस्था का बलात्कार कर रहा है।
लेकिन अभी कुछ हफ़्ते पहले ही ट्रंप ने अमरीकी कंपनियों को कहा कि चीन से व्यापार घाटा को कम करने का विकल्प खोजें। उन्होंने शी जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान उठने मुद्दों में व्यापार संतुलन को सबसे कठिन मुद्दा बताया था। पिछले महीने अमरीकी व्यापार विभाग ने घोषणा की कि वह इस बात की जांच कर रहा है कि चीन को बाज़ार आधारित अर्थव्यवस्था माना जा सकता है या नहीं।