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3डी होलोग्राफी तकनीक से एलियंस की होगी खोज

Mon, 24 Jul 2017 03:09 AM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Updated Mon, 24 Jul 2017 03:09 AM IST
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Aliens will be searching from 3D holography technology
प्रतीकात्मक फोटो

वैज्ञानिकों का मानना है कि डिजिटल होलोग्राफी तकनीक एलियंस के बारे में पता लगाने का सबसे बेहतर दांव हो सकती है। इस तकनीक में 3डी इमेज के लिए लेजर का इस्तेमाल किया जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नासा के विकिंग प्रोग्राम के तहत कोई भी अंतरिक्ष यान या अभियान एलियंस के जीवन पर प्रकाश नहीं डाल सका है।

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हालांकि नासा का ध्यान 1970 से जारी इन कोशिशों के तहत पानी की खोज में जरूर रहा है। शनि के बर्फीले चंद्रमा एनसेलेडस पर पानी के बड़े भंडार की मौजूदगी का पता चला है, लेकिन अगर यहां जीवन का अस्तित्व है तो वह सूक्ष्म जीवों के रूप में हो सकता है।
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वैज्ञानिकों के लिए धरती से 79 करोड़ मील की दूरी से इन सूक्ष्म जीवों की पहचान करना काफी मुश्किल भरा काम है। अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर जे नादेउ ने कहा कि सूक्ष्मजीव और धूल के कणों के बीच पहचान करना कठिन काम है।
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उन्होंने कहा कि इस मुश्किल भरे काम को आसान बनाने में व संभावित सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में 3डी होलोग्राफी तकनीक कारगर हो सकती है।

शनि के चंद्रमा पर प्रयोग होगी तकनीक

Aliens will be searching from 3D holography technology
MOON

दरअसल, एनसेलेडस पर गर्म पानी के भी विशाल भंडार होने की संभावना है। ऐसे में जब गर्म पानी चंद्रमा के बर्फीले खोल पर गिरता होगा तो उससे विशाल दरारें बनने के आसार हैं। इससे वाष्प भी सतह से ऊपर उठती है।

एनसेलेडस के बारे में जानने के लिए नासा द्वारा भेजे गए कैसिनी अंतरिक्ष यान ने 2005 में इस चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में  जल वाष्प होने की जानकारी भेजी थी। इससे बर्फीले कण चंद्रमा की सतह से 5 हजार किमी दूर 2 हजार किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से परिक्रमा कर रहे हैं।

ऐसे में यहां जीवन के बारे में पता लगाना बेहद कठिन है, क्योंकि सूक्ष्मजीवों और इन कणों के बीच पहचान करना कठिन है। ऐसे में होलोग्राफी तकनीक कारगर सिद्ध हो सकती है।

आधुनिक यान करेंगे खोज
वैज्ञानिकों के मुताबिक, भविष्य में आधुनिक अंतरिक्ष यान एनसेलेडस के नजदीक भेजे जाएंगे। इन यानों को होलोग्राफी तकनीक से लैस किया जाएगा, जो पानी के कणों और सूक्ष्मजीवों के बीच पहचान करने में सक्षम होंगे।

वैज्ञानिकों ने गणना की है कि बर्फीले कणों के चंद्रमा की सतह से उठने वाली प्रत्येक क्रिया के दौरान 250 किलोग्राम पानी वाष्प होता है। ऐसे में यहां जीवन की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। 

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