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ट्रंप-किम की मुलाकात पर टिकीं दुनिया की निगाहें, भारत को होगा ये फायदा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 29 Apr 2018 05:53 AM IST
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किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप
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उत्तर कोरिया के घोर शत्रु देश दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मिलने को पैदल सीमा पार करने वाले किम जोंग-उन ने दुनिया के उन सभी लोगों को खामोश कर दिया है जो मानते रहे हैं कि नाटे कद के किम सिर्फ अपने पूर्वजों के समान शासन चलाकर जहर उगलने का ही काम करेंगे।
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एक पिछड़े देश को प्रशांत में मिसाइल फेंकने में सक्षम बनाने और अमेरिकी शहरों तक मार करने वाले परमाणु हथियार विकसित करने वाले उत्तर कोरियाई नेता किम को लेकर अब दुनिया की नजर अमेरिका के राष्ट्रपति से होने वाली शिखर वार्ता पर टिक गई हैं।
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27 अप्रैल 2018 को उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच शिखर वार्ता हुई। इसमें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के नेता मून जे इन ने हिस्सा लिया। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने का संकल्प लिया।
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मून-किम मुलाकात महज ट्रंप के साथ होने वाली शिखर वार्ता का आगाज थी और इसका असर ट्रंप के साथ मई अंत या जून प्रथम सप्ताह में संभावित बैठक पर पड़ना तय है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कोरियाई देशों की मुलाकात से खुश होकर इसे गर्व की बात कह दिया है।
कई विशेषज्ञ ट्रंप और किम की बैठक को महज परमाणु निरस्त्रीकरण तक सीमित मान रहे हैं लेकिन यह इससे कहीं आगे के परिणाम छोड़ेगी। खासतौर पर रूस और चीन का समर्थन प्राप्त उत्तर कोरिया के साथ होने वाली बैठक के बहाने ट्रंप कई दूसरे निशानों पर भी दांव लगा सकते हैं।
ट्रंप मान रहे हैं कि किम और मून के बीच हुई मुलाकात के पीछे उनकी रणनीति कारगर रही है जिसमें उन्होंने न सिर्फ उत्तर कोरिया पर गंभीर प्रतिबंध लगाए बल्कि और भी कई कार्रवाईयां कीं जो उनसे पहले बराक ओबामा तक ने नहीं कीं। उधर, हमेशा आक्रामक रहने वाले किम ने भी परमाणु प्रसार रोकने की तरफ कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर किम और ट्रंप के बीच शिखर वार्ता होने जा रही है।
टला युद्ध का खतरा
किम जोंग उन और मून जे ईन
भारत समेत कई एशियाई देशों के व्यापार का रास्ता खुलेगा
शुक्रवार को कोरियाई देशों के नेताओं के बीच हुई मुलाकात के बाद किम जोंग-उन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली शिखर बैठक पर उत्तर कोरियाई बाजार को लेकर नजर गढ़ाए बैठे हैं। यदि ट्रंप और किम के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाया जाता है (जिसकी पूरी संभावना है) तो भारत समेत कई एशियाई देशों का उत्तर कोरिया के साथ व्यापार का रास्ता खुल जाएगा। फिलहाल अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ये देश उत्तर कोरिया के साथ कारोबारी संबंध नहीं रख पा रहे हैं।
टला युद्ध का खतरा
उत्तर कोरिया जिस तेजी से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था उसका मुकाबला करने के लिए दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान की मिली-जुली ताकत भी कम पड़ती दिख रही थी। इस कारण पूरी दुनिया पर युद्ध का खतरा मंडराने लगा था लेकिन इस मुलाकात में किम जोंग ने जिस तरह से शांति स्थापित करने का प्रयास किया उससे फिलहाल यह खतरा टलता दिखाई दे रहा है। किम-मून बैठक के बाद संयुक्त घोषणापत्र में भी कहा गया है कि कोरियाई प्रायद्वीप में अब कोई जंग नहीं होगी।
शुक्रवार को कोरियाई देशों के नेताओं के बीच हुई मुलाकात के बाद किम जोंग-उन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच होने वाली शिखर बैठक पर उत्तर कोरियाई बाजार को लेकर नजर गढ़ाए बैठे हैं। यदि ट्रंप और किम के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाया जाता है (जिसकी पूरी संभावना है) तो भारत समेत कई एशियाई देशों का उत्तर कोरिया के साथ व्यापार का रास्ता खुल जाएगा। फिलहाल अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ये देश उत्तर कोरिया के साथ कारोबारी संबंध नहीं रख पा रहे हैं।
टला युद्ध का खतरा
उत्तर कोरिया जिस तेजी से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था उसका मुकाबला करने के लिए दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान की मिली-जुली ताकत भी कम पड़ती दिख रही थी। इस कारण पूरी दुनिया पर युद्ध का खतरा मंडराने लगा था लेकिन इस मुलाकात में किम जोंग ने जिस तरह से शांति स्थापित करने का प्रयास किया उससे फिलहाल यह खतरा टलता दिखाई दे रहा है। किम-मून बैठक के बाद संयुक्त घोषणापत्र में भी कहा गया है कि कोरियाई प्रायद्वीप में अब कोई जंग नहीं होगी।