अमेरिका चुनाव : डोनाल्ड ट्रंप की रैली में क्यों जुटी कम भीड़
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अमेरीका में इस साल राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमण ने काफी तबाही मचाई है और इस दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं।
लेकिन अमेरिका में आजकल चर्चा है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चर्चित ओक्लाहोमा रैली की, जो शनिवार रात को हुई थी। इस रैली की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि इसमें काफी कम भीड़ जुटी थी।
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि इस रैली में 10 लाख लोग जुटेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दावा ये किया जा रहा है कि टिक-टॉक यूज़र्स और के-कॉप फैंस के सोशल मीडिया अभियान के कारण ट्रंप की रैली में कम लोग जुटे।
लेकिन अब ट्रंप के चुनावी अभियान से जुड़े लोगों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। दावा ये भी है कि कई युवकों ने टिकट तो खरीदे लेकिन वे रैली में नहीं गए।
टुल्सा के बैंक ऑफ ओक्लाहोमा सेंटर में 19 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। माना जा रहा था कि इस सेंटर के बाहर भी लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी, लेकिन बाद में इसका एक हिस्सा कैंसिल कर दिया गया था। टुल्सा फायर ब्रिगेड के हवाले से ये कहा गया कि ट्रंप की रैली में 6,000 से ज्यादा लोग आए।
आरोप
लेकिन ट्रंप के चुनावी अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि संख्या और ज्यादा थी। इस चुनावी अभियान के डायरेक्टर ब्रैड पार्स्केल ने मीडिया और प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने कई लोगों को रैली में न आने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने रैली में आने वालों के लिए तकनीकी समस्याओं का भी जिक्र किया कि कैसे फोन पर रजिस्टर कराने वाले फर्जी नंबरों से उन्हें जूझना पड़ा।
रिपब्लिकन पार्टी के पूर्ण रणनीतिकार और ट्रंप के आलोचक रहे स्टीव स्मिट ने कहा कि अमरीका भर में युवाओं ने टिकट का अनुरोध तो भेजा लेकिन वे रैली में शामिल नहीं हुए। उन्होंने बताया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी और उनके कई मित्रों ने सैकड़ों की संख्या में टिकट का अनुरोध किया था।
My 16 year old daughter and her friends in Park City Utah have hundreds of tickets. You have been rolled by America’s teens. @realDonaldTrump you have been failed by your team. You have been deserted by your faithful. No one likes to root for the losing team. @ProjectLincoln https://t.co/VM5elZ57Qp
— Steve Schmidt (@SteveSchmidtSES) June 20, 2020
स्मिट के ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि उनके बच्चों ने भी ऐसा ही किया। अमरीका में एक शीर्ष प्रोगेसिव चेहरा मानी जाने वाली एलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोर्टेज ने के-पॉप फ़ैन्स और युवकों की सराहना की है, जिन्होंने रैली के लिए फर्जी रिजर्वेशन कराया था।
Actually you just got ROCKED by teens on TikTok who flooded the Trump campaign w/ fake ticket reservations & tricked you into believing a million people wanted your white supremacist open mic enough to pack an arena during COVID
— Alexandria Ocasio-Cortez (@AOC) June 21, 2020
Shout out to Zoomers. Y’all make me so proud. ☺️ https://t.co/jGrp5bSZ9T
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि कितनी बड़ी संख्या में लोगों ने फर्जी टिकट बुक किए, लेकिन ऐसे टिकट खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने वाले 12 जून के टिक-टॉक के एक वीडियो को सात लाख लोगों ने लाइक किया है।
विवाद
ये वीडियो रैली के लिए 19 जून की तारीख की घोषणा के बाद पोस्ट किया गया था। रैली की तारीख की घोषणा के बाद लोगों ने काफी नाराजगी जताई थी क्योंकि 19 जून का दिन अमेरिका में फ्रीडम डे के रूप में मनाया जाता है, जो अमेरिका में ग़ुलामी खत्म होने के उत्सव का दिन है।
जिस जगह ट्रंप की रैली हुई, उसको भी लेकर विवाद था। अमेरिका के इतिहास के सबसे बुरे जातीय नरसंहार के स्थानों में से एक टुस्ला भी था और जिस तरह ट्रंप की रैली पर सोशल मीडिया के असर की बात हो रही है, अगर ये सही है तो ऐसा पहली बार नहीं है जब हाल के समय में सोशल मीडिया यूजर्स ने राजनीतिक रूप से प्रभाव छोड़ा है।
दक्षिण कोरिया की लोकप्रिय म्यूजिक इंडस्ट्री के-पॉप के फैन्स ने अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद काफी सक्रियता दिखाई थी और पैसा भी जुटाया था। फैंस ने ब्लैक लाइफ्स मैटर के खिलाफ हैशटैग चलाने वालों की कोशिशों को भी अपनी सक्रियता से पीछे छोड़ दिया था।
बीबीसी संवाददाता एंथनी जर्चर भी टुस्ला में मौजूद थे। उनका कहना है कि रैलियों के आयोजक जगह से ज्यादा टिकट बेचते रहे हैं, इसलिए फर्जी टिकट खरीदने वाले असली समर्थकों को आने से नहीं रोक सकते। लेकिन उनका कहना है कि इस बार ऐसा लगता है कि उन्होंने ट्रंप के चुनाव अभियान से जुड़े लोगों को ये भरोसा दिला दिया कि ज्यादा लोग रैली में आना चाहते हैं जबकि वास्तव में ऐसा नहीं था।
चिंताएँ
आयोजकों ने दावा किया था कि 10 लाख लोग जुटेंगे लेकिन अगर इसकी आधी भी बुकिंग असली होती, तो रैली में बड़ी भीड़ जुट पाती।
ट्रंप की इस रैली को लेकर स्वास्थ्य चिंताएँ भी थी। अमरीका में कोरोना संकट के बीच और लॉकडाउन पाबंदियों में ढील के बाद ये पहली ऐसी रैली थी।
रैली से कुछ घंटों पहले ये भी जानकारी सामने आई कि आयोजन से जुड़े छह लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। रैली में कई ट्रंप समर्थन बिना मास्क के देखे गए। ओक्लाहोमा की इस रैली में ट्रंप ने करीब दो घंटे का भाषण दिया और कोरोना भी उनके भाषण का अहम हिस्सा था।
लोगों को ये भी आशंका थी कि ये रैली कोरोना फैलाने वाली साबित हो सकती है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के ताजा आँकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना संक्रमण के 22 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 1,19,000 लोग मारे जा चुके हैं।
ट्रंप ने कोरोना के अलावा जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में विरोध प्रदर्शनों पर भी बात की और कहा कि वामपंथी भीड़ अमेरिका के इतिहास को नष्ट कर रही है और स्मारकों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, प्रतिमाएँ तोड़ी जा रही हैं, जिसे वे स्वीकार नहीं कर सकते।