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America-China: चीन से रिश्ते खराब नहीं करना चाहता अमेरिका, सेना की कमजोरी सामने आने के बाद नरम पड़े बाइडन

Thu, 27 Oct 2022 01:37 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Thu, 27 Oct 2022 01:37 PM IST
सार

कंजर्वेटिव हेरिटेज फाउंडेशन ने यूएस मिलिट्री स्ट्रेंथ की वार्षिक इंडेक्स में बताया था कि अमेरिका की वर्षों की अंडरफंडिंग (गलत नीतियों) और खराब प्राथमिकताओं के कारण सेना वैश्विक मंच पर अन्य देशों की सेनाओं के खिलाफ जरूरी कदम उठाने में कमजोर है।

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America-China: America Does Not Want Conflict With China
Joe Biden and Xi jinping - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी सेना को लेकर हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के बाद जो बाइडन का बड़ा बयान सामने आया है। अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात के दौरान बाइडन ने कहा है कि अमेरिका कभी भी चीन के साथ संघर्ष नहीं चाहता है। यह बात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी जानते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई मुद्दों का अमेरिका नेतृत्व करता रहेगा। 

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दरअसल, हाल ही में अमेरिकी सैन्य ताकत को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें साफ तौर पर दिखाया गया था कि अमेरिका को भले ही सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में जाना जाता हो, लेकिन रक्षा मामले में अमेरिकी सेना एक युद्ध भी नहीं जीत सकती है। इसी रिपोर्ट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का चीन को लेकर बयान सामने आया है। 
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चीन से रिश्ता खराब नहीं करना चाहता अमेरिका 
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने साफ कर दिया है कि अमेरिका चीन के साथ अपने रिश्तों को खराब नहीं करना चाहता है। दरअसल, यूक्रेन संकट को लेकर अमेरिका रूस का विरोध कर रहा है, तो वहीं एशिया में चीन लगातार आक्रामक हो रहा है, जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में अगर आगे परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो दोनो ही मोर्चों पर अमेरिकी सेना के सामने मुश्किल खड़ी होगी। 
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क्या था रिपोर्ट में?
कंजर्वेटिव हेरिटेज फाउंडेशन ने यूएस मिलिट्री स्ट्रेंथ की वार्षिक इंडेक्स में बताया था कि अमेरिका की वर्षों की अंडरफंडिंग (गलत नीतियों) और खराब प्राथमिकताओं के कारण सेना वैश्विक मंच पर अन्य देशों की सेनाओं के खिलाफ जरूरी कदम उठाने में कमजोर है। वर्तमान अमेरिकी सैन्य बल दो क्षेत्रों से लड़ाई संघर्ष की स्थिति में जोखिम उठाने में सक्षम नहीं है। मौजूदा हालात में विश्व में दो मोर्चों की लड़ाई की संभावना बढ़ गई है क्योंकि एक तरफ रूस ने यूक्रेन पर युद्ध जारी रखा है तो दूसरी ओर चीन प्रशांत क्षेत्र में तेजी से आक्रामक हो रहा है। इस स्थिति में दोनों ओर से लड़ाई अमेरिकी सेना को मुश्किल में डाल सकती है।

जहाजों, मिसाइलों और अन्य हथियारों में निवेश करने की जरूरत
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका की सैन्य क्षमता में कई सारी कमियां है, जैसे जवानों के पास क्षमता की कमी, पर्याप्त हथियार औ उपकरण का नहीं होना बड़ी समस्या है। इसमें मरीन कॉर्प्स (समुद्री भूमि बल सेवा) को क्षमता और तत्परता में मजूबत दर्जा दिया गया है, जबकि आर्मी को ''औसत'' रेटिंग, अंतरिक्ष बल और नौसेना को ''कमजोर'' और वायुसेना को ''बहुत कमजोर'' बताया गया है। 


सिर्फ नौसेना के भरोसे नहीं जीत सकते युद्ध
हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी सदस्य और विस्कॉन्सिन के रिपब्लिकन कांग्रेसी माइक गैलाघर ने कहा कि तेजी से आक्रामक चीनी सेना की सामना करने के लिए अमेरिका तैयार है, लेकिन यह गंभीर संकट पैदा करता है। उनके मुताबिक, यहां एक बड़ी समस्या यह है कि इंडो-पैसिफिक वाले क्षेत्र में दो थिएटर नौसेना और वायुसेना मौजूद हैं। लेकिन इन रिपोर्ट को देख कर बताया जा सकता है कि वह सबसे खराब काम कर रही हैं। 
 

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