अफगानिस्तान में ‘हिंसा में कमी’ के करार के करीब पहुंचे अमेरिका और तालिबान
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तालिबान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अफगानिस्तान में हिंसा में सात दिन की कमी के प्रस्ताव का जवाब दे, अन्यथा वह वार्ता से हट जाएगा। इस वार्ता से करीब से जुड़े दो तालिबानी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बुधवार को बताया कि कई हफ्तों की बातचीत के बाद तालिबान ने अमेरिका को अल्टीमेटम जारी किया है।
दरअसल अमेरिका ने मंगलवार को कहा था कि अफगानिस्तान में हिंसा में कमी करने के प्रस्ताव पर कुछ दिनों में समझौता हो जाएगा। इसी पर तालिबान ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी ट्वीट कर कहा था कि उन्हें अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने फोन कर बताया था कि तालिबान के साथ बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति है।
अमेरिका को यह अल्टीमेटम तालिबान के मुख्य वार्ताकार मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने दिया है। बरादर ने इस हफ्ते के शुरू में व्हाइट हाउस के दूत जालमे खालिजाद और कतर के विदेशमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात की थी।
हालांकि अमेरिका की ओर से इस अल्टीमेटम पर फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया गया है। तालिबान की दूसरी मांग यह है कि वार्ताकारों में शामिल राष्ट्रपति गनी सरकार के प्रतिनिधि में से कोई भी आधिकारिक तौर पर वार्ता की मेज पर शामिल नहीं होगा, केवल एक साधारण अफगान की तरह वार्ता में शामिल हो सकता है।
तालिबान ने दोहा में बनाया है राजनीतिक कार्यालय
तालिबान खाड़ी देश कतर की राजधानी दोहा में अपना राजनीतिक कार्यालय चलाता है। यहीं पर खालिजाद अक्सर तालिबान के प्रतिनिधियों से वार्ता करते हैं, जिसमें अफगानिस्तान में 18 वर्षों से चले आ रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका प्रयास कर रहा है। अमेरिका वहां से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की भी कवायद कर रहा है।
हम आशावादी हैं कि तालिबान और अमेरिका के बीच इस पर अगले कुछ दिनों या हफ्तों में समझौता हो जाएगा। लेकिन अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी जल्दी हो जाएगी यह जरूरी नहीं है।
- रॉबर्ट ओब्रायन, ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार