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अमेरिका ने भारत को दी एच-1बी वीजा घटाने की धमकी, डेटा स्टोरेज पर नए नियम से बौखलाया वाशिंगटन
Fri, 21 Jun 2019 06:42 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 21 Jun 2019 06:42 AM IST
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भारत की ओर से विदेशी कंपनियों पर स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोरेज को लेकर दबाव बनाए जाने से अमेरिका बौखला गया है। अमेरिका ने भारत को सीधे तौर पर बता दिया है कि वह ऐसा करने वाले देशों के लिए एच-1बी वीजा सीमित करने पर विचार कर रहा है। अगर अमेरिका इसे लागू करता है तो भारत का आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। इसके चलते बृहस्पतिवार को शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
सूत्रों का कहना है कि टैरिफ और ट्रेड वार की वजह से भी ऐसा किया जा रहा है। अमेरिका ऐसा बदले की भावना से कर रहा है। हाल के दिनों में टैरिफ वार के चलते भारत और अमेरिका के संबंधों में तल्खी आई है। व्यापार में मिलने वाली कुछ छूटों को खत्म किए जाने के बाद भारत ने बीते रविवार को अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैक्स लगाने का एलान किया था। इसके अलावा अमेरिका उन देशों के लिए एच-1बी वीजा की सीमा तय करने की सोच रहा है, जो विदेशी कंपनियों को अपने यहां डेटा जमा करने के लिए बाध्य कर रही हैं।
अमेरिका भारत को एच-1बी वीजा देने की सीमा 10 फीसदी से 15 फीसदी तक सीमित करने पर विचार कर रहा है। हर साल अमेरिका 85,000 एच-1बी वीजा जारी करता है और इनमें से 70 फीसदी वीजा भारतीय कर्मचारियों को ही मिलते हैं। फिलहाल किसी भी देश के लिए एच1-बी वीजा लेने के लिए कोई सीमा तय नहीं है। इस संदर्भ में दो भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्हें अमेरिकी योजना के बारे में बताया गया था। यह फैसला ऐसे वक्त किया जा रहा है, जब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भारत के दौरे पर आने वाले हैं।
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सूत्रों का कहना है कि टैरिफ और ट्रेड वार की वजह से भी ऐसा किया जा रहा है। अमेरिका ऐसा बदले की भावना से कर रहा है। हाल के दिनों में टैरिफ वार के चलते भारत और अमेरिका के संबंधों में तल्खी आई है। व्यापार में मिलने वाली कुछ छूटों को खत्म किए जाने के बाद भारत ने बीते रविवार को अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैक्स लगाने का एलान किया था। इसके अलावा अमेरिका उन देशों के लिए एच-1बी वीजा की सीमा तय करने की सोच रहा है, जो विदेशी कंपनियों को अपने यहां डेटा जमा करने के लिए बाध्य कर रही हैं।
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अमेरिका भारत को एच-1बी वीजा देने की सीमा 10 फीसदी से 15 फीसदी तक सीमित करने पर विचार कर रहा है। हर साल अमेरिका 85,000 एच-1बी वीजा जारी करता है और इनमें से 70 फीसदी वीजा भारतीय कर्मचारियों को ही मिलते हैं। फिलहाल किसी भी देश के लिए एच1-बी वीजा लेने के लिए कोई सीमा तय नहीं है। इस संदर्भ में दो भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्हें अमेरिकी योजना के बारे में बताया गया था। यह फैसला ऐसे वक्त किया जा रहा है, जब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भारत के दौरे पर आने वाले हैं।
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वाशिंगटन क्यों बना रहा दबाव
विदेशी कंपनियों से कहा जाता है कि वह भारत में ही अपना डेटा रखें। ऐसा करने से विदेशी कंपनियों पर नियंत्रण करने में आसानी होती है। लेकिन, विदेशी कंपनियों की ताकत कम हो जाती है। अमेरिकी कंपनियां भारत के इस नए डेटा नियम से नाराज हैं। मास्टरकार्ड ने डेटा स्टोरेज के नए नियम पर आपत्ति जताई है।
आईटी कंपनियों पर पड़ेगा असर
टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां एच-1बी वीजा पर अपने इंजीनियर और डेवलपर को अमेरिका भेजती हैं। इसलिए इससे आईटी सेक्टर को काफी नुकसान होगा। 150 अरब डालर यानी 10.5 लाख करोड़ रुपये की भारतीय आईटी इंडस्ट्री के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है।
क्या है एच-1बी वीजा
इसके जरिए अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है, जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही इस पर लगाम कसी जा रही है। यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है और छह साल तक इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
आईटी कंपनियों पर पड़ेगा असर
टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां एच-1बी वीजा पर अपने इंजीनियर और डेवलपर को अमेरिका भेजती हैं। इसलिए इससे आईटी सेक्टर को काफी नुकसान होगा। 150 अरब डालर यानी 10.5 लाख करोड़ रुपये की भारतीय आईटी इंडस्ट्री के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है।
क्या है एच-1बी वीजा
इसके जरिए अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में उच्च कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है, जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही इस पर लगाम कसी जा रही है। यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है और छह साल तक इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।