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अमेरिका पहुंचा मथुरा वाला चुनावी फॉर्मूला: हमनाम उम्मीदवार से क्यों परेशान हुए ट्रंप; क्या है पूरा मामला?

Fri, 30 Oct 2026 06:31 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 30 Oct 2026 06:31 AM IST
सार

अमेरिका के अलास्का में सीनेट चुनाव के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवार डैनियल सुलिवन के समान नाम वाले दूसरे उम्मीदवार के उतरने से विवाद खड़ा हो गया है। ट्रंप ने डेमोक्रेट्स पर वोट बांटने की साजिश का आरोप लगाते हुए न्याय विभाग से जांच कराई है। मामला अमेरिका में चुनावी राजनीति के साथ भारत के हमनाम उम्मीदवारों के पुराने किस्सों की भी याद दिला रहा है।
 

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alaska senate election dummy candidate donald trump voter fraud allegations
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत में चुनाव के दौरान एक ही नाम के कई उम्मीदवारों का मैदान में उतरना आपने देखा होगा। मथुरा में हेमा मालिनी के सामने दूसरी हेमा मालिनी और वायनाड में राहुल गांधी के सामने दूसरे राहुल गांधी भी चुनाव लड़ चुके हैं। अब ऐसा ही एक मामला अमेरिका के अलास्का में सामने आया है। यहां एक ही नाम के दो उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में होने से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मामला इतना बढ़ गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर वोटों को बांटने के लिए जानबूझकर हमनाम उम्मीदवार उतारने का आरोप लगाया है।
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अलास्का में एक नाम के दो उम्मीदवार, कैसे शुरू हुआ विवाद?
अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मुकाबला होगा। ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी नीतियों की लोकप्रियता की बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं। चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वेक्षणों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी पिछड़ती दिखाई दे रही है। अलास्का जैसे रिपब्लिकन पार्टी के मजबूत गढ़ में भी पार्टी को कड़ी चुनौती मिल रही है।
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रिपब्लिकन उम्मीदवार के सामने उनके ही नाम का दूसरा शख्स
अलास्का में सीनेट चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की ओर से मौजूदा सीनेटर डैनियल सुलिवन मैदान में हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से है। इसी चुनाव में एक तीसरे उम्मीदवार डैनियल सुलिवन ने भी पर्चा भरा है। वह पेशे से सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक हैं। शुरुआत में एक ही नाम के दो उम्मीदवारों का होना कोई बड़ी बात नहीं मानी गई, लेकिन बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने इस मामले को राजनीतिक विवाद में बदल दिया।
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डेमोक्रेट्स पर हमनाम उम्मीदवार उतारने का आरोप
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि शिक्षक डैनियल सुलिवन की उम्मीदवारी के पीछे मैरी पेल्टोला की टीम का हाथ था। आरोप है कि रिपब्लिकन उम्मीदवार के समान नाम वाले व्यक्ति को चुनाव में उतारने की कोशिश इसलिए की गई, ताकि मतदाता भ्रमित हों और रिपब्लिकन उम्मीदवार के वोट बंट जाएं। इस रिपोर्ट के सामने आते ही ट्रंप ने इसे चुनावी धोखाधड़ी करार दिया और न्याय विभाग को मामले की जांच करने का निर्देश दे दिया।

ट्रंप बोले- यह चुनावी धोखाधड़ी, उम्मीदवार को हटाया जाए
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'यह उच्च स्तर की चुनावी धोखाधड़ी है। हमारे चुनावों में इस तरह के व्यवहार को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।' उन्होंने मैरी पेल्टोला को चुनावी मतपत्र से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी की। ट्रंप इस पूरे मामले को डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी चाल बता रहे हैं।

न्याय विभाग ने तेज की जांच, नए समन जारी
सीएनएन की बृहस्पतिवार की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले की आपराधिक जांच तेज कर दी है। जांच के तहत ग्रैंड जूरी की ओर से दर्जनों नए समन जारी किए गए हैं। साथ ही संभावित नए आरोपों को लेकर भी पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि शिक्षक डैनियल सुलिवन की उम्मीदवारी के पीछे किसी तरह की गैरकानूनी साजिश थी।

क्या एक नाम के दो उम्मीदवारों का चुनाव लड़ना गैरकानूनी है?
कानूनी तौर पर किसी उम्मीदवार का समान नाम वाले दूसरे व्यक्ति के खिलाफ चुनाव लड़ना अपने आप में अपराध नहीं है। अलास्का के मतपत्र पर दोनों डैनियल सुलिवन की पहचान अलग-अलग तरीके से दर्ज है। एक के नाम के साथ मौजूदा सीनेटर और दूसरे के नाम के साथ किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव नहीं होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में मतदाताओं के सामने दोनों की पहचान स्पष्ट करने की व्यवस्था मौजूद है।

चुनाव की जिम्मेदारी राज्यों की, संघीय जांच पर भी सवाल
अमेरिका में चुनाव कराने और उम्मीदवारों को मतपत्र पर जगह देने का अधिकार मुख्य रूप से राज्यों के पास है। संघीय सरकार सीधे यह तय नहीं कर सकती कि किसी राज्य के चुनाव में कौन उम्मीदवार मैदान में रहेगा। ऐसे में न्याय विभाग की जांच और उसकी कानूनी स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक स्टीफन कॉलिन्सन के मुताबिक, ट्रंप लंबे समय से डेमोक्रेट्स पर चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे हैं। अब अलास्का का यह मामला उन्हें अपने आरोपों को दोहराने का मौका दे रहा है।

ट्रंप के लिए क्यों अहम है अलास्का?
ट्रंप के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने की आशंका पहले से जताई जा रही है। अगर पार्टी सीनेट में भी अपना नियंत्रण गंवा देती है तो राष्ट्रपति के लिए आगे सरकार चलाना और अपने एजेंडे को लागू करना मुश्किल हो सकता है। 100 सदस्यों वाली सीनेट में बहुमत का फैसला कुछ राज्यों की सीटों पर निर्भर है। इनमें अलास्का भी शामिल है।

न्यूयॉर्क टाइम्स और सिएना के सर्वेक्षण में मैरी पेल्टोला को 51 प्रतिशत और डैनियल सुलिवन को 45 प्रतिशत समर्थन मिलने की बात कही गई है। अगर अलास्का का चुनाव सीनेट में बहुमत तय करने वाला साबित होता है तो यहां का मुकाबला और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकता है। ऐसे में ट्रंप इस विवाद को चुनाव के आखिरी समय तक बड़ा मुद्दा बनाए रख सकते हैं।

भारत में भी हमनाम उम्मीदवारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
भारत में भी हमनाम उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने को लेकर कानूनी चुनौती दी जा चुकी है। वर्ष 2024 में इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में डुप्लीकेट या समान नाम वाले उम्मीदवारों को लेकर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत का कहना था कि किसी व्यक्ति का नाम राहुल गांधी या लालू प्रसाद यादव होने से उसके चुनाव लड़ने के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

जब एक नहीं, कई चंदूलाल उतरे थे चुनाव मैदान में
भारत में हमनाम उम्मीदवारों के जरिए वोट काटने की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक छत्तीसगढ़ के महासमुंद की है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता अजीत जोगी का मुकाबला भाजपा के चंदूलाल साहू से था। इस दौरान जोगी के खिलाफ चुनाव मैदान में असली चंदूलाल साहू के अलावा इसी नाम के कम से कम सात अन्य उम्मीदवार भी उतर गए थे। इतना ही नहीं, चंदूराम नाम के तीन उम्मीदवार भी मैदान में थे। हालांकि, इसके बावजूद भाजपा के चंदूलाल साहू बेहद कम अंतर से चुनाव जीत गए। इन हमनाम उम्मीदवारों को भी काफी वोट मिले थे।


असली नहीं, दूसरी हेमा मालिनी हार गई थीं चुनाव
भारत में हमनाम उम्मीदवारों की चर्चा हो और मथुरा का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हेमा मालिनी के सामने भी इसी नाम की एक दूसरी उम्मीदवार मैदान में थीं। हालांकि, चुनाव हारने वाली हेमा मालिनी फिल्म अभिनेत्री नहीं, बल्कि उसी नाम की दूसरी उम्मीदवार थीं। इसी तरह 2019 में वायनाड से राहुल गांधी के खिलाफ एक अन्य राहुल गांधी और राघुल गांधी नाम के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में उतरे थे।
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