क्या धोखे में है अमेरिका: अल-कायदा और तालिबान से अब भी खतरा?
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक खास इंटरव्यू में अल-कायदा के दो आतंकवादियों ने कहा- ‘जब तक अमेरिका को पूरी इस्लामी दुनिया से निकाल नहीं दिया जाता, सभी मोर्चों पर उसके खिलाफ युद्ध जारी रहेगा।'
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अमेरिका ने इस साल 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लेने का एलान किया है। लेकिन जिस आतंकवादी संगठन को निशाना बना कर अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, उसने दो टूक कहा है कि अमेरिका के साथ उसका युद्ध खत्म नहीं हुआ है। 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के आतंकवादियों ने एक साथ अमेरिका पर कई हमले किए थे। उसके जवाब में ही अमेरिका ने अपनी फौज अफगानिस्तान भेजी, जहां तालिबान शासन के संरक्षण अल-कायदा ने अपने अड्डे बना रखे थे। अमेरिका पर हुए उन हमलों के पीछे अल-कायदा के खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का हाथ माना गया था। ओसामा को दस साल पहले अमेरिका ने पाकिस्तान के शहर एबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई में मार डाला था।
अब अल-कायदा के हमलों की 20वीं बरसी पर अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना की पूरी वापसी करने जा रहा है। लेकिन अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक खास इंटरव्यू में अल-कायदा के दो आतंकवादियों ने कहा- ‘जब तक अमेरिका को पूरी इस्लामी दुनिया से निकाल नहीं दिया जाता, सभी मोर्चों पर उसके खिलाफ युद्ध जारी रहेगा।’ सीएनएन का दावा है कि अब तक अल-कायदा अमेरिकी मीडिया को सीधे इंटरव्यू देने से गुरेज करता रहा था। इसके बदले वह अपने प्रचार वीडियो जारी कर अपनी बात कहने के रास्ते पर चलता था। सीएनएन ने कहा है कि अब अल-कायदा के नुमाइंदे ने क्यों इंटरव्यू दिया, यह साफ नहीं है।
सीएनएन के मुताबिक अमेरिकी आतंकवाद विशेषज्ञ पॉल क्रुकशांक ने अल-कायदा नुमाइंदों के जवाबों का विश्लेषण किया। उन्होंने इस टीवी चैनल से कहा- ‘ये संभव है कि अल-कायदा अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के राष्ट्रपति जो बाइडन के फैसले से उत्साहित हुआ हो। लेकिन यह भी हो सकता है कि हाल में उसे जो नुकसान हुए हैं, उससे वह ध्यान हटाना चाहता हो।’
अल-कायदा एक समय सबसे मजबूत आतंकवादी संगठनों में एक था। उसकी तुलना में आज उसकी ताकत बहुत कम बची है। लेकिन वह खत्म नहीं हुआ है। इंटरव्यू से ये संकेत मिला कि अमेरिकी फौज के लौटने के बाद तालिबान के साथ मिल कर वह अफगानिस्तान में वापसी की योजना बना रहा है। इंटरव्यू में उसके दोनों नुमाइंदों ने ‘अमेरिका के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए’ तालिबान की तारीफ की। उन्होंने अफगान जनता का उन गुटों को संरक्षण देने के लिए शुक्रिया जताया, ‘जो इस्लामी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जिहादी मोर्चा सफलतापूर्वक चला रहे हैं।’
गौरतलब है कि अफगानिस्तान से 11 सितंबर तक अमेरिकी फौज की वापसी का एलान करते हुए जो बाइडन ने कहा था कि बिन लादेन मर चुका है और अल-कायदा को कमजोर कर दिया गया है। इसलिए वहां युद्ध खत्म करने का समय आ गया है। इसी हफ्ते टीवी चैनल एबीसी को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा- ‘हम 20 साल पहले अफगानिस्तान गए थे। हम वहां गए, क्योंकि हम पर हमला हुआ था। हम वहां उन लोगों से लड़ने गए, जिन्होंने हम पर हमला किया था। हम यह सुनिश्चित करने गए थे कि अफगानिस्तान फिर कभी अमेरिका और उसके सहयोगियों को निशाने पर रखने वाले आतंकवादियों की शरणस्थली ना बने। हमने ये मकसद हासिल कर लिए हैं।’
लेकिन तालिबान के प्रवक्ताओं ने जो बातें कहीं उससे संकेत मिला है कि तालिबान अमेरिका के साथ बातचीत में ईमानदारी नहीं दिखा रहा है। उसके तार अभी भी अल-कायदा से जुड़े हुए हैं। ओसामा बिन लादेन पर किताब लिख चुके आतंकवाद विशेषज्ञ पीटर बर्गन ने कहा है कि पाकिस्तानी तालिबान (टीटीपी) और अल-कायदा के बीच इस्लामी भाईचारे के संबंध कायम हैं और यही बात अफगान तालिबान के साथ भी लागू होती है।