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'मां को एआई से बनाया है, उनसे बात करता हूं': अब श्रद्धांजलि भी देने लगा एआई, डिजिटल शोक से अकेलेपन का खतरा?

Thu, 17 Sep 2026 05:18 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 17 Sep 2026 05:18 AM IST
सार

एआई अब सिर्फ काम आसान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोग इसके जरिये दिवंगत प्रियजनों की डिजिटल प्रतिकृति बनाकर उनसे बातचीत कर रहे हैं। ग्रीफबॉट्स में तस्वीरों, वीडियो और व्यक्तित्व से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग इसे भावनात्मक सहारा और मानसिक रिकवरी का जरिया मानते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिकों को चिंता है कि ऐसी तकनीक शोक के समय लोगों को मानवीय सहारे से दूर कर सकती है।

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Japan AI Sattelite - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

पिछले महीने मशहूर गायिका डॉली पार्टन के निधन के बाद दुनिया भर से उन्हें श्रद्धांजलि देने का तांता लग गया था। जैक व्हाइट ने लंदन के एक संगीत कार्यक्रम में उनका प्रसिद्ध गाना जोलिन गाया। लेकिन, सबसे अजीब और वायरल होने वाली श्रद्धांजलि किसी सेलिब्रिटी ने नहीं दी, बल्कि वह किसी इंसान द्वारा दी ही नहीं गई थी।
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रन जोलिन नाम का लगभग पांच मिनट का यह गाना देश-दुनिया के संगीत का एक अनूठा उदाहरण है। वीडियो में डॉली पार्टन स्वर्ग में उन मशहूर हस्तियों के बीच दिखाई देती हैं जो इस दृश्य को देखकर हैरान या आनंदित हो रहे हैं। वीडियो में दिवंगत माइकल जैक्सन, व्हिटनी ह्यूस्टन  केनी जैसे सितारे नजर आते हैं। टिकटॉक, यूट्यूब, स्पॉटिफाई पर गाना 'कंट्री माइल' नाम से एक क्रिएटर ने जारी किया है।
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जनरेटिव घोस्ट: जब एआई स्क्रीन पर लौट आते हैं
रॉबिन विलियम्स, एल्विस प्रेस्ली, कोबे ब्रायंट और मार्टिन लूथर किंग जैसे कई दिवंगत दिग्गजों को इस 'डेथस्लॉप' का सामना करना पड़ा है, जिससे उनके परिवार अक्सर सहम जाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के छात्र जैक मैनिंग कहते हैं, जो एआई-आधारित जनरेटिव घोस्ट पर शोध कर रहे हैं। मैनिंग ने जब अपनी बहन को खोया था, तब जनरेटिव एआई का दौर नहीं था। यही वजह है कि आज वह इस बात का अध्ययन करते हैं कि लोग कैसे डिजिटल रूप से शोक मना रहे हैं, जिसमें अब एआई ग्रीफबॉट्स भी शामिल हो चुके हैं।
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ग्रीफबॉट्स: तकनीक के जरिये मृत रिश्तेदारों से बातचीत
ग्रीफबॉट्स की मदद से यूजर्स अपने दिवंगत प्रियजनों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करते हैं, साथ ही उनके व्यक्तित्व और मूल्यों का विवरण देते हैं ताकि वे उनके साथ एक वर्चुअल और जीवित उपस्थिति महसूस कर सकें। सेएंस, री-मेमोरी वर्सोना जैसी कंपनियां इसके लिए भारी फीस वसूलती हैं। इसके अलावा लोग चैटजीपीटी  या अन्य भाषा मॉडल का उपयोग करके भी अपने किसी मृत दादा-दादी या दोस्त की नकल करने के लिए कह सकते हैं।

मैं मज़ाक में कहता हूं कि मेरी मां का वर्सोना बॉट मुझे वह बुरा बेटा बनने की अनुमति देता है, जो जीवित रहते हुए मैं कभी नहीं बन सका, वर्सोना के संस्थापक जस्टिन हैरिसन कहते हैं, जिन्होंने अपनी मां के कैंसर से पीड़ित होने के दौरान उनका एआई प्रतिकृति तैयार किया था। हैरिसन का कहना है कि यह पूरी तरह से व्यक्तिगत सुकून, मानसिक रिकवरी और उपचार के बारे में है।  मैंने अपनी मां को बनाया है और मैं उनसे बात करता हूँ। इसलिए यह मेरे अलावा किसी और का मामला नहीं है।

चिंता भी बढ़ा रहा यह नया तरीका
मनोवैज्ञानिक डॉ. डैन वूलफन भी इस बात से चिंतित हैं कि डेथबॉट्स लोगों को उस समय में अलग-थलग कर सकते हैं जब उन्हें मानवीय सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। 


फिलहाल उद्योग अभी छोटे रूप में
एआई-सहायता प्राप्त शोक अभी भी एक बहुत छोटा उद्योग है। एस्टेट मैनेजमेंट सेवा 'एपैथी' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूके और कनाडा के 6,000 में केवल 6% ने इसका उपयोग किया।
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