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अफगानिस्तान: पंजशीर घाटी में तालिबान का विरोध, उत्तरी गठबंधन के साथ अहमद मसूद शुरू कर सकता है लड़ाई
Thu, 19 Aug 2021 07:09 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 19 Aug 2021 07:09 PM IST
सार
पूर्व मुजाहिदीन कमांडर के 32 साल के बेटे अहमद मसूद ने तालिबान के खिलाफ पश्चिम से मदद की अपील की। उसने कहा कि हमारे पास गोला-बारूद और हथियारों के भंडार हैं, जो मेरे पिता के समय से हमारे पास हैं। हम जानते थे कि यह दिन कभी भी आ सकता है।
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अहमद मसूद
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अफगानिस्तान में संकट के बीच तालिबान के लिए भी नई-नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में तालिबान का मुकाबला करने के लिए उसके विरोधी इकट्ठा होने लगे हैं। 1980 के दशक में अफगानिस्तान के सोवियत विरोधी नेताओं में से एक अहमद शाह मसूद के बेटे ने पंजशीर घाटी में अपने गढ़ से तालिबान के खिलाफ मोर्चा खो दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उत्तरी गठबंधन तालिबान के खिलाफ लड़ाई शुरू कर सकता है।
वाशिंगटन पोस्ट में पूर्व मुजाहिदीन कमांडर के 32 साल के बेटे अहमद मसूद ने तालिबान के खिलाफ पश्चिम से मदद की अपील की। उसने कहा कि हमारे पास गोला-बारूद और हथियारों के भंडार हैं, जो मेरे पिता के समय से हमारे पास हैं। हम जानते थे कि यह दिन कभी भी आ सकता है। उन्होंने कहा कि उनके साथ शामिल होने वाले कुछ बल अपने हथियार लाए हैं। अगर तालिबानी हम पर हमला करते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से हमारे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।
अहमद शाह मसूद के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक अमरुल्ला सालेह हैं जो अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति थे। उन्होंने पंजशीर घाटी में शरण ली हुई है। उन्होंने दावा कि अशरफ गनी के काबुल से भागने के बाद वह अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। बता दें कि तालिबान ने रविवार को काबुल पर कब्जा कर लिया था।
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काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी को अब भी तालिबान नहीं जीत सका है। सोवियत संघ के समय भी यहां पर बख्तरबंद वाहनों को नष्ट कर दिया गया था। इस क्षेत्र को भी सोवियत संघ नहीं जीत सका था। जब तालिबान ने 1996-2001 में अफगानिस्तान पर शासन किया था, तब भी यह क्षेत्र तालिबान के खिलाफ था।
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वाशिंगटन पोस्ट में पूर्व मुजाहिदीन कमांडर के 32 साल के बेटे अहमद मसूद ने तालिबान के खिलाफ पश्चिम से मदद की अपील की। उसने कहा कि हमारे पास गोला-बारूद और हथियारों के भंडार हैं, जो मेरे पिता के समय से हमारे पास हैं। हम जानते थे कि यह दिन कभी भी आ सकता है। उन्होंने कहा कि उनके साथ शामिल होने वाले कुछ बल अपने हथियार लाए हैं। अगर तालिबानी हम पर हमला करते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से हमारे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।
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अहमद शाह मसूद के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक अमरुल्ला सालेह हैं जो अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति थे। उन्होंने पंजशीर घाटी में शरण ली हुई है। उन्होंने दावा कि अशरफ गनी के काबुल से भागने के बाद वह अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। बता दें कि तालिबान ने रविवार को काबुल पर कब्जा कर लिया था।
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काबुल के उत्तर में पंजशीर घाटी को अब भी तालिबान नहीं जीत सका है। सोवियत संघ के समय भी यहां पर बख्तरबंद वाहनों को नष्ट कर दिया गया था। इस क्षेत्र को भी सोवियत संघ नहीं जीत सका था। जब तालिबान ने 1996-2001 में अफगानिस्तान पर शासन किया था, तब भी यह क्षेत्र तालिबान के खिलाफ था।