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बांग्लादेश चुनाव में फिर दो शक्तिशाली महिलाओं की पार्टियां आमने सामने

Sun, 02 Dec 2018 07:45 AM IST
राजेश बादल, अमर उजाला
राजेश बादल, अमर उजाला Updated Sun, 02 Dec 2018 07:45 AM IST
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Again in the Bangladesh elections the parties of two powerful women face to face

बांग्लादेश इन दिनों अपनी आजादी के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। इस महीने वहां ग्यारहवें चुनाव होने हैं और एक बार फिर दो शक्तिशाली महिलाओं की पार्टियां आमने सामने होंगीं। प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी पार्टी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की बेगम खालिदा जिया के बीच मुकाबले को अंतर्राष्ट्र्रीय मंच पर भी बड़ी गंभीरता से लिया जा रहा है।इस चुनाव के परिणाम भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों का भविष्य भी सुनिश्चित करेंगे। दिलचस्प यह है कि बेगम खालिदा जिया इन दिनों भ्रष्टाचार के दो मामलों में सात और दस साल की कैद भुगत रही हैं। उनके बेटे तारिक रहमान को शेख हसीना को जान से मारने के षडयंत्र में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और वे लंदन में आत्म निर्वासन में रह रहे हैं। 

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पिछले तीन दशक से ये नेत्रियां भारत की कोख से निकले इस छोटे से मुल्क में प्रजातंत्र की मशाल उठाए हुए हैं। आजादी के बाद वहां थोड़े से समय के लिए लोकतान्त्रिक जुगनू चमके थे ,लेकिन देश की आजादी के महानायक बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान और उनके कुनबे के सामूहिक कत्ल के बाद फौज ने पाकिस्तान की तर्ज पर हुकूमत हथिया ली थी। सेना के कुछ कटटरपंथी अफसरों ने उन्हें उस समय मौत के घाट उतारा ,जबकि बांग्लादेश विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहा था। एकबारगी लगा था कि इस नवजात देश का हश्र कहीं पाकिस्तान जैसा न हो जाए और फ़ौज के कब्जे में बांग्ला संस्कृति दम तोड़ दे। शुक्र है ऐसा नहीं हुआ।
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हालांकि भारतीय खुफ़िया एजेंसियों ने शेख मुजीब को इस साजिश से आगाह किया था मगर उस पर भरोसा नहीं किया गया।शेख मुजीब की बेटी शेख हसीना उस समय अपनी छोटी बहन के साथ लंदन में थीं इसलिए उनकी जान बच गई। इसके बाद वे अरसे तक भारत में रहीं और अपने देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष की मशाल जलाए रखी। उन्नीस सौ नब्बे में उन्हें कामयाबी मिली। उसके बाद से लगातार चुनाव हो रहे हैं। हालांकि दोनों ताकतवर महिलाओं पर एक दूसरे की पार्टी के खिलाफ़ साजिशें रचने के आरोप लगते रहे।
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बांग्लादेश के चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार के चुनाव तेईस दिसंबर को होंगे। समीकरण यह है कि मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी याने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी इस बार चुनाव में हिस्सा लेने के लिए तैयार हो गई है। पिछले चुनाव में उसने इन इंतखाबात का बहिष्कार किया था। इसलिए शेख हसीना की पार्टी बड़ी आसानी से सत्ता पर काबिज हो गईं थीं। बीएनपी की सहयोगी एक और विपक्षी पार्टी जमात ए इस्लामी पर बंदिश लगी हुई है। बीएनपी का आरोप है कि 2014 के बाद से उसके करीब 500 नेता और कार्यकर्ताओं को मार डाला गया है और 750 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया है। पार्टी का मानना है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे। इस वजह से एक राष्ट्रीय सरकार के नेतृत्व में चुनाव कराए जाने चाहिए। सत्तारूढ़ अवामी लीग का कहना है कि देश का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। 


दिलचस्प यह है कि दोनों ही पार्टियां जब सत्ता में होती हैं तो प्रतिपक्ष की यह मांग ठुकरा देती हैं कि नए चुनाव राष्ट्रीय या केयर टेकर सरकार की देखरेख में होना चाहिए। आबादी के मान से दुनिया का आठवां बड़ा देश बांग्लादेश जब पाकिस्तान के साथ था तो देश का कुल सत्तर फ़ीसदी निर्यात करता था।आज भी कपड़ा निर्यात में चीन के बाद यह देश दूसरे नंबर पर है।गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का लिखा गीत यहां का राष्ट्रगान है।अभी भी यहां के लोग मानते हैं कि पाकिस्तान के कटटरपंथी बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के लिए जिम्मेदार हैं। 

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