चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बाद पुतिन ने भी बदला रूस का संविधान, अब 83 की उम्र तक संभालेंगे सत्ता
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रूस में राष्ट्राध्यक्षों का लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहने का इतिहास रहा है। फिर वो चाहे जोसेफ स्टालिन हो या वर्तमान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। रूस की राजनीति में ऐसा होने के पीछे दो वजहे मुख्य हैं, जिनमें पहली वह सत्ता में बने रहने के दौरान किए गए भ्रष्टाचार के लिए जेल जाने से बचना और दूसरी वजह जान जाने का खतरा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले 20 सालों से रूस की सत्ता पर काबिज हैं। पुतिन के अलावा जोसेफ स्टालिन ही हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा समय तक रूस की सत्ता संभाली। स्टालिन तीन दशक तक रूस की सत्ता पर काबिज रहे।
दूसरी तरफ, हाल ही में रूस में संविधान संशोधन के लिए जनमत संग्रह करवाया गया। एक सप्ताह तक चले इस मतदान में लोगों ने पुतिन को 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने की मंजूरी दे दी। पुतिन साल 2024 तक रूस के राष्ट्रपति पद पर रहने वाले थे। लेकिन अब संशोधन के बाद वह 83 वर्ष की उम्र तक रूस की सत्ता संभालते रहेंगे।
इससे पहले, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी 2018 में संविधान संशोधन किया और खुद को आजीवन राष्ट्रपति बनाने का रास्ता साफ कर लिया। दूसरी तरफ, रूस में कई लोगों ने संविधान संशोधन पर सवाल उठाया है।
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ऐसे लोगों का कहना है कि संविधान संशोधन महज एक दिखावा था, ये इसलिए किया गया ताकि पुतिन जनता के सवालों से बच जाएं। संशोधन से पहले ही सोशल मीडिया पर इसकी प्रतियां वायरल हो रही थी।
बता दें कि, टाइम मैग्जीन ने साल 2007 में पुतिन को 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुना था। इसके अलावा फोर्ब्स ने पुतिन को 2013 से 2016 तक चार साल लगातार दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेता चुना था।
पुतिन को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का मानना है कि उनके राज में रूस में आर्थिक तरक्की तो हुई है, लेकिन मानवाधिकर, लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में वह देश को पीछे ले गए।
विरोध प्रदर्शनों को प्रसारित करने से रोका
पुतिन ने जब सत्ता संभाली तो वो उसे केंद्रीकृत करने में जुट गए। उन्होंने मीडिया और इंटरनेट पर नकेल कसना शुरू किया। रूस के न्यूज चैनलों पर सरकार के अनुसार खबरें प्रकाशित की जाती हैं। 2017 में रूस के 100 शहरों में दस हजार से ज्यादा लोगों ने भ्रष्टाचार को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार ने इन्हें प्रसारित करने से रोक दिया।
साथ ही इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया को देश में आने पर रोक लगा दी गई। मानवाधिकार समूह एगोरा के अनुसार 2018 में रूस ने 6 लाख 50 हजार से ज्यादा वेबसाइट्स को बैन कर दिया था। 2013 तक रूस प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 148वे नंबर पर था, वर्तमान में वह 149वें क्रम पर है।
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स्टालिन के नोट्स को अपने पास रखते हैं पुतिन
पुतिन के दादा स्टालिन, व्लादिमीर लेनिन और ग्रिगोरी रासपुतिन के रसोइया रहे हैं। पुतिन के पास स्टालिन के समय की पुस्तकालय की आधी से ज्यादा किताबें हैं। इसके अलावा, वह स्टालिन के लाल क्रेयॉन कलर की स्याही से लिखे कुछ नोट्स को अपने पास रखते हैं। पुतिन ने जूडो और रेसलिंग के मिले-जुले रूप सांबो को सीखा है। इसके अलावा जूडो को अलग से सीखा है।
उन्होंने मार्शल आर्ट्स में भी महारत हासिल की हुई है। रूसी राष्ट्रपति का पसंदीदा खेल आइस हॉकी है। पुतिन ने आज तक के इतिहास में किसी को भी ईमेल नहीं किया। वह फोन भी कम से कम इस्तेमाल करते हैं। अपने साथ प्लेन में हमेशा बाइबिल रखते हैं।
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जासूस से राष्ट्रपति तक का सफर
1999 में रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने अपने पद से इस्तीफा दिया और पुतिन को कार्यकारी राष्ट्रपति बना दिया। इससे पहले, पुतिन रूस की जासूसी एजेंसी केजीवी में लेफ्टिनेंट जनरल थे। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 1991 में लॉ स्कूल के अपने मेंटर एंटोली सोबचाक के लेनिन्गार्ड मेयर चुनाव में सलाहकार बनने के साथ हुई।
बोरिस को लगता था कि पुतिन वफादार हैं और उनके परिवार या उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर वह कोई कदम नहीं उठाएंगे। इसी वफादारी के चलते उन्होंने पुतिन को अपना उत्तराधिकारी चुना। पुतिन 1985 में जर्मनी में सोवियत राजनयिकों की देश के प्रति वफादारी जांचने के लिए उनकी जासूसी करते थे।
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