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अफगानिस्तान में तालिबान: शिनजियांग को लेकर बढ़ती जा रही है चीन की चिंता

Tue, 31 Aug 2021 02:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 31 Aug 2021 02:46 PM IST
सार

शिनजियांग में उइघुर मुसलमान बहुसंख्या हैं। ये मुसलमान तुर्क मूल के हैं। ये इलाका आतंकवाद से प्रभावित रहा है। इस सिलसिले में वहां की गई कार्रवाई को लेकर पश्चिमी देश चीन की आलोचना करते रहे हैं। उनका दावा है कि चीन उइघुर मुसलमानों का दमन कर रहा है...

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After taken control of afghanistan by Taliban, China is more concerned about Xinjiang uighur muslims
उइघुर मुस्लिम - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अफगानिस्तान में तालिबान की पकड़ मजबूत होने के बाद अब चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में सुरक्षा मजबूत करने का फैसला किया है। शिनजियांग की प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शू गुइशियांग ने ये साफ संकेत दिया कि अफगानिस्तान की हालिया घटनाओं से चीन सरकार चिंतित है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति का हमेशा ही शिनजियांग पर सीधा असर होता है।

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शिनजियांग में उइघुर मुसलमान बहुसंख्या हैं। ये मुसलमान तुर्क मूल के हैं। ये इलाका आतंकवाद से प्रभावित रहा है। इस सिलसिले में वहां की गई कार्रवाई को लेकर पश्चिमी देश चीन की आलोचना करते रहे हैं। उनका दावा है कि चीन उइघुर मुसलमानों का दमन कर रहा है। शिनजियांग प्रांत की सीमा 74 किलोमीटर तक अफगानिस्तान से लगती है।
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शू ने कहा- ‘हम शिनजियांग में विकास और सुरक्षा इंतजाम करने के अपने मकसद पर आगे बढ़ेंगे। हम यहां आतंकवाद विरोधी कदमों और स्थिरता लाने के उपायों को आगे बढ़ाने पर अडिग हैं।’ शू ने पत्रकारों के इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या अफगानिस्तान में पिछले हफ्ते काबुल हवाई अड्डे पर हुए आत्मघाती हमले के बाद चीन ने अफगानिस्तान से लगी सीमा पर अपनी सेना तैनात कर दी है। इसके पहले कुछ मीडिया रिपोर्टों में शिनजियांग-अफगानिस्तान सीमा पर चीनी सैनिकों की तैनाती के बारे में खबर दी गई थी।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि शिनजियांग प्रांत की चिंता के कारण ही चीन अफगानिस्तान में जल्द से जल्द स्थिरता कायम करने पर जोर दे रहा है। खुद को उइघुर मुसलमानों का नुमाइंदा बताने वाले संगठन ईस्ट तुर्कमेनिस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) की अफगानिस्तान में मजबूत उपस्थिति है। इसी गुट पर चीन में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप लगते रहे हैं। अब अंदेशा है कि तालिबान की सत्ता मजबूत होने के बाद ईटीआईएम अपनी गतिविधियां तेज कर देगा।

तालिबान ने पिछले महीने यह कहा था कि वह ईटीआईएम को अफगानिस्तान की जमीन पर अपनी गतिविधियां चलाने की इजाजत नहीं देगा। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा था कि तालिबान अल-कायदा या किसी ऐसे दूसरे गुट को अफगानिस्तान की जमीन का दुरुपयोग करने की इजाजत नहीं देगा। तालिबान के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी चीन यात्रा के दौरान ईटीआईएम के बारे में ऐसा ही वादा चीन के विदेश मंत्री वांग यी के सामने भी किया था।

उसके बावजूद चीन ने इस मामलेपर सतर्क रुख अपना रखा है। पिछले दिनों चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्तां से कहा कि वे चरमपंथ के खिलाफ अपने प्रयास तेज कर दें। उनकी इस टिप्पणी को अफगानिस्तान में पैदा हो रही स्थिति के संदर्भ में ही देखा गया है।

शी ने कहा कि चीन को जातीय विवादों और वैचारिक मुद्दों को हल करने के लिए सक्रियता से पहल करनी चाहिए। उन्होंने देश में जातीय अलगाववाद और धार्मिक चरमपंथ को जड़मूल से खत्म करने का आह्वान भी किया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन बातों में चीन में बढ़ रही चिंताओं की झलक मिली है। चीन को चिंता इस बात की है कि अगर ईटीआईएम ने हमले किए, तो उसे आतंकवादी विरोधी कदम सख्ती से उठाने होंगे और तब पश्चिमी देशों को मानव अधिकारों के मुद्दे पर उसकी आलोचना करने के नए मौके मिलेंगे।

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