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नेपाल: कुर्सी बचाने के बाद अब मंत्रिमंडल में फेरबदल होगी ओली की अगली परीक्षा
Wed, 22 Jul 2020 05:31 PM IST
Rajeev Rai
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: Rajeev Rai
Updated Wed, 22 Jul 2020 05:31 PM IST
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नेपाल राजनीतिक संकट
- फोटो : पीटीआई
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नेपाल में सत्ता को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही खींचातानी अब खत्म होती दिख रही है। सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों के बाद मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने कुर्सी बचाने में कामयाब नजर आ रहे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल और ओली के बीच हुई बैठक के बाद अब मंत्रिमंडल में फेरबदल पर सहमति बनती दिख रही है, जो 28 जुलाई की बैठक के बाद होगा।
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बताया जा रहा है कि पार्टी के सह अध्यक्ष दहल को 15 जुलाई को हुई बैठक के बाद ओली के इस्तीफे की अपनी मांग को छोड़ना पड़ा। हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि किन कारणों से दहल को अपनी मांग से पीछे हटना पड़ा लेकिन पिछले हफ्ते दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में ओली ने पीएम और पार्टी के पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था। उधर, दहल ने कहा कि पार्टी को बांटने के उनके फैसले का पार्टी के कई लोगों ने विरोध किया था। इन सबके बीच ओली जहां अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे वहीं अब दहल मंत्रिमंडल में अधिक संख्या लेकर अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं।
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इन सबके बीच नेपाल में चीनी राजदूत होउ योन्की अपनी ओर से अनिश्चितकालीन नेपाली सत्ता में एक और राजनीतिक लड़ाई की तैयारी कर रही हैं। इस मामले में एक पश्चिमी राजनयिक ने कहा, 'हम नहीं जानते कि किन कारणों की वजह से पिछले हफ्ते ओली और दहल के विवाद को सुलझाया गया, लेकिन यह पता है कि काठमांडू में चीन ने एक बड़ी भूमिका निभाई थी।'
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नेपाल में जिस तरीके से राजनीतिक घमासान पर रोक लगाई गई, इसके पीछे हर कोई चीनी राजदूत होउ को ही मास्टरमाइंड बता रहा है। एशियाई मामलों की एक्सपर्ट होउ विदेश मंत्रालय में काफी सक्रिय रही हैं। उर्दू की जानकर होने के साथ होउ की हिंदुस्तानी भाषा में भी अच्छी पकड़ है। होउ नेपाल से पहले पाकिस्तान समेत कई एशियाई देशों में काम कर चुकी हैं।