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श्रीलंका: बिजली कटौती वापस, लेकिन सरकार बिजली कहां से लाएगी, ये नहीं बताया

Sat, 05 Mar 2022 02:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Mar 2022 02:26 PM IST
सार

राष्ट्रपति की तरफ से जारी ताजा बयान में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने बयान में कहा है- ‘पांच मार्च से बिजली में कटौती नहीं होगी। देश के सभी ईंधन स्टेशनों को ईंधन का वितरण किया जाएगा।’

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after public protests in Sri Lanka, President Gotabaya Rajapaksa decided to roll back the electricity supply cuts order
राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका में बढ़त जन विरोध के बीच राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे की सरकार ने बिजली सप्लाई में की जा रही कटौती को वापस लेने का फैसला किया है। अब ताजा घोषणा के मुताबिक शनिवार से बिजली की कटौती नहीं होगी। आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका में बिजली कटौती लागू करने से लोगों की मुसीबत और बढ़ गई थी। इसका असर उद्योग से कृषि तक पर पड़ रहा था। कई आर्थिक विशेषज्ञों ने इस फैसले की यह कह कर आलोचना की थी राजपक्षे सरकार बिजली सप्लाई में रुकावट डाल कर अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावनाओं को चोट पहुंचा रही है।

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मांग के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं

उधर सरकार का कहना था कि उसके पास बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं है। इसलिए में मांग के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सरकार ने कहा था कि जरूरत के मुताबिक ईंधन खरीदने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। ऐसे में बिजली की आपूर्ति में कटौती करने के अलावा कोई और चारा नहीं है। बिजली आपूर्ति में कटौती का फैसला फरवरी में लागू किया गया था।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिन कारणों से सरकार ने बिजली सप्लाई में कटौती की, उनसे अभी निजात मिलने के कोई संकेत नहीं हैं। ऐसे में यह समझना कठिन है कि अब सरकार कैसे मांग के मुताबिक बिजली की सप्लाई करेगी। राष्ट्रपति की तरफ से जारी ताजा बयान में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने बयान में कहा है- ‘पांच मार्च से बिजली में कटौती नहीं होगी। देश के सभी ईंधन स्टेशनों को ईंधन का वितरण किया जाएगा।’
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बिजली की कटौती के कारण देशभर में पेट्रोल पंपों के बाहर लोगों की बड़ी कतार लग रही थी। पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण लोग अपनी ईंधन जरूरतों के लिए पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हो गए थे। जानकारों के मुताबिक अभी डीजल और गैसोलीन की मांग के मुताबिक सप्लाई के लिए श्रीलंका को हर महीने 50 करोड़ डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन पिछले महीने श्रीलंका सरकार इस मद के लिए सिर्फ तीन करोड़ 10 लाख डॉलर ही जुटा पाई। इसकी वजह से उसे बिजली की राशनिंग करनी पड़ी।

कोयला खरीदने का फैसला

श्रीलंका में जितनी बिजली की खपत है, उसका एक तिहाई हिस्से का उत्पादन कच्चे तेल से चलने वाले संयंत्रों से होता है। इतनी ही मात्रा कोयले से संचालित और पनबिजली के संयंत्रों से पैदा होती है। बताया जाता है कि श्रीलंका के पास फिलहाल कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। श्रीलंका सरकार ने बीते सितंबर में 18 लाख टन कोयला खरीदने का टेंडर जारी किया था। उसके तहत दक्षिण अफ्रीका और रूस से उसे कोयले की 38 खेप हासिल हुई हैं। दक्षिण अफ्रीका से चार लाख 80 हजार टन कोयला और आने वाला है।



विशेषज्ञों ने कहा है कि अभी जितना कोयला श्रीलंका के पास उपलब्ध है, उससे सितंबर तक बिजली उत्पादन हो सकेगा। लेकिन जो संयंत्र तेल और गैस से चलते हैं, उनके बारे में सरकार की क्या कार्ययोजना है, इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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