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China Semiconductor Sanctions: चीन का बाजार छूटने की संभावना से उठे अमेरिकी चिप इंडस्ट्री के भविष्य पर सवाल

Wed, 19 Oct 2022 07:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 19 Oct 2022 07:11 PM IST
सार

China Semiconductor Sanctions: ताजा प्रतिबंधों के पहले ही सितंबर में चिप इंडस्ट्री की दिग्गज अमेरिकी कंपनी माइक्रोन ने अपनी तिमाही बिक्री में 20 साल गिरावट आने की सूचना दी। इस कंपनी की रिपोर्ट आने के एक हफ्ते बाद चिप डिजाइनर कंपनी एएमडी ने तीसरी तिमाही में अपनी बिक्री का अनुमान 16 फीसदी गिरा दिया...

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after impose of semiconductor chip sanctions on china Shares of US chip makers fallen sharply
China Semiconductor Sanctions - फोटो : Istock

विस्तार

इस वर्ष मार्च में दिए अपने स्टेट ऑफ यूनियन भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन चिप इंडस्ट्री को ‘स्वप्न का नया क्षेत्र’ बताया था। उन्होंने कहा था कि ‘यही वो आधार है, जिस पर अमेरिका के भविष्य का निर्माण होगा।’ लेकिन अब खुद बाइडन प्रशासन के कदमों से ये सपना टूटता नजर आ रहा है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में चीन की प्रगति रोकने के लिए बाइडन प्रशासन ने दुनिया भर की उन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जो चीन के साथ इस क्षेत्र में किसी प्रकार का कारोबार करेंगी। पिछले हफ्ते फैसले का दायरा बढ़ाने के एलान के बाद से अमेरिकी चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों के भाव में भारी गिरावट आई है। ये कंपनियां अपनी बिक्री और मुनाफे के अनुमान में लगातार भारी कटौती कर रही हैं।

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ब्रिटिश पत्रिका द इकोनॉमिस्ट के एक विश्लेषण में कहा गया है कि इस साल के आरंभ में जिस समय बाइडन ने वो भाषण दिया था, वह चिप इंडस्ट्री के लिए आशाजनक दौर था। तब बाजार में हर प्रकार के चिप की मांग तेज थी। कोरोना काल में टूटे सप्लाई चेन से उबर रही कंपनियों ने तब भविष्य में इस्तेमाल के लिए भी चिप खरीद लिए। उसके बाद मांग गिरावट आना लाजिमी था। ऊपर से बाइडन प्रशासन की प्रतिबंध की नीति ने इस उद्योग पर तगड़ा प्रहार किया है।

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ताजा प्रतिबंधों के पहले ही सितंबर में चिप इंडस्ट्री की दिग्गज अमेरिकी कंपनी माइक्रोन ने अपनी तिमाही बिक्री में 20 साल गिरावट आने की सूचना दी। इस कंपनी की रिपोर्ट आने के एक हफ्ते बाद चिप डिजाइनर कंपनी एएमडी ने तीसरी तिमाही में अपनी बिक्री का अनुमान 16 फीसदी गिरा दिया। इसके बाद अमेरिकी टीवी चैनल ब्लूमबर्ग ने खबर दी कि इंटेल कंपनी अपने कर्मचारियों में बड़ी छंटनी की तैयारी में है। कुल मिला कर जुलाई के बाद से अमेरिका की लगभग 30 सबसे बड़ी चिप कंपनियां तीसरी तिमाही के राजस्व में 11 बिलियन डॉलर की कमी आने का अनुमान जता चुकी हैं। इसके अलावा इस वर्ष इन कंपनियों के शेयरों के भाव में साझा तौर पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर की कमी आ चुकी है।

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इसी बीच बाइडन प्रशासन ने चीन से कारोबार रोकने की मुहिम तेज कर दी है। इससे चीन का बाजार चिप निर्माता कंपनियों के हाथ से निकल जाएगा। जबकि चीन सेमीकंडक्टर का दुनिया में सबसे बड़ा बाजार है।

द इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि ये इंडस्ट्री अब भू-राजनीति का शिकार हो रही है। कंपनियों को अपने-अपने देशों में चिप निर्माण के कार्य में प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न देश सब्सिडी देने की नीति अपना रहे हैं। इन्वेस्टमेंट बैंक मार्क लिपेसिस जेफरीज ने गणना की है कि अमेरिका, चीन, यूरोपियन यूनियन, जापान, दक्षिण कोरिया, और ताइवान अगले तीन साल के लिए साझा तौर पर 85 बिलियन डॉलर की सब्सिडी देने का एलान कर चुके हैं। लेकिन इंडस्ट्री क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस सब्सिडी से ये क्षेत्र अत्यधिक उत्पादन की समस्या का शिकार हो सकता है। उत्पादित होने वाले चिप के लिए बाजार भी चाहिए, जिसका कोई रोडमैप अभी सामने नहीं है।

मार्केट के जानकारों ने आशंका जताई है कि अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ चीन ने भी जवाबी प्रतिबंध लगाए, तो अमेरिकी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। द इकोनॉमिस्ट ने लिखा है- इस घटनाक्रम का परिणाम अमेरिका के चिप उद्योग में ह्रास के रूप में सामने आ सकता है, जिससे दुनिया में उसका प्रभाव घटेगा। पत्रिका ने कहा है- ‘इससे अमेरिका के भविष्य निर्माण की बुनियाद कमजोर हो रही है।’

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