{"_id":"68d3561173645cfbd601ad39","slug":"after-cost-cutting-blitz-trump-administration-rehires-hundreds-of-laid-off-employees-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न: फिर काम पर बुलाए गए नौकरी से हटाए गए सरकारी कर्मचारी, मस्क की कटौती नीति पड़ी महंगी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न: फिर काम पर बुलाए गए नौकरी से हटाए गए सरकारी कर्मचारी, मस्क की कटौती नीति पड़ी महंगी
Wed, 24 Sep 2025 07:53 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मियामी (अमेरिका)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मियामी (अमेरिका)
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 24 Sep 2025 07:53 AM IST
सार
अमेरिका में एलन मस्क की लागत कटौती योजना के तहत निकाले गए सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों को अब वापस काम पर बुलाया जा रहा है। इन कर्मचारियों को बिना काम के सात महीने वेतन मिलता रहा, लेकिन इससे सरकारी खर्च बढ़ गए और एजेंसी की कार्यक्षमता प्रभावित हुई। अधिकारियों ने माना कि कटौती जल्दबाजी में की गई थी, जिससे स्थिति बिगड़ी और अब कर्मचारियों की बहाली जरूरी हो गई है।
विज्ञापन
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका में जिन सैकड़ों संघीय कर्मचारिों की नौकरियां चली गई थीं, अब उन्हें वापस काम पर बुलाया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रहे एलन मस्क की सरकारी खर्चों में कटौती करने की योजना के तहत इन कर्मचारियों को हटाया गया था।
सामान्य सेवा प्रशासन (जीएसए) ने इन कर्मचारियों को कहा कि इस हफ्त तक बताएं कि वे दोबारा नौकरी करना चाहते हैं या नहीं। ये कर्मचारी सरकारी दफ्तरों में देखभाल का काम करते थे। सरकारी नोटिस के मुताबिक, जो कर्मचारी लौटने को तैयार हैं, उन्हें छह अक्तूबर से काम पर लौटना होगा। इन सात महीनों में वे काम पर नहीं थे, लेकिन उन्हें वेतन मिलता रहा। इस दौरान जीएसए को कई सरकारी इमारतों के किराए पर भारी खर्च उठाना पड़ा। इसका बोझ आखिरकार करदाताओं पर ही पड़ा।
ये भी पढ़ें: ट्रंप से बात के बाद बोलीं उर्सुला- चरणबद्ध तरीके से टैरिफ हटेगा, सदस्यों को मानना ही होगा
विज्ञापन
जीएसए के एक पूर्व अधिकारी चाड बेकर ने कहा कि एजेंसी में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई थी और बुनियादी काम भी सही तरीके से नहीं हो पा रहे थे। अब एजेंसी को आपातकालीन स्थिति में चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मस्क और उनके सरकारी दक्षता विभाग (डॉज) ने बहुत जल्दी ज्यादा कटौती कर दी थी। जीएसए को 1940 के दशक में स्थापित किया गया था, ताकि सरकारी दफ्तरों को खरीदने और उनका प्रबंधन करने का सारा काम एक ही जगह से किया जा सके।
कर्मचारियों को फिर से वापस काम पर बुलाने का फैसला केवल जीएसए में ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों में भी देखने को मिल रहा है। आयकर विभाग और श्रम विभाग ने भी कुछ पुराने कर्मचारियों को फिर से काम पर रखा है। राष्ट्रीय पार्क सेवा ने भी कुछ लोगों को वापस बुलाया है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका UNSC में अलग-थलग? गाजा संकट के बीच अधिकांश देश बोले- हम सीजफायर-फलस्तीन के पक्ष में
जीएसए के लिए स्थिति संभालना जरूरी हो गया था, क्योंकि मार्च से हजारों कर्मचारियों ने या तो खुद सेवानिवृत्ति ले ली या उन्हें जबरन नौकरी छोड़ने को कहा गया। इसके अलावा, सैकड़ों कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, इन सभी को सितंबर के अंत तक वेतन मिलता रहा।
जीएसए ने इस फैसले पर विस्तार से कुछ नहीं कहा और न ही कर्मचारियों की संख्या या खर्च को लेकर जानकारी दी। केवल इतना कहा गया कि जीएसए नेतृत्व ने कर्मचारियों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की है और जो भी निर्णय लिया गया है, वह ग्राहक एजेंसियों और करदाताओं के हित में है।
इस फैसले को लेकर एरिजोना से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है कि इन कटौतियों से सरकार ने कोई बचत की है। इसके विपरीत, इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और लोगों की सेवाएं प्रभावित हुईं।
विज्ञापन
सामान्य सेवा प्रशासन (जीएसए) ने इन कर्मचारियों को कहा कि इस हफ्त तक बताएं कि वे दोबारा नौकरी करना चाहते हैं या नहीं। ये कर्मचारी सरकारी दफ्तरों में देखभाल का काम करते थे। सरकारी नोटिस के मुताबिक, जो कर्मचारी लौटने को तैयार हैं, उन्हें छह अक्तूबर से काम पर लौटना होगा। इन सात महीनों में वे काम पर नहीं थे, लेकिन उन्हें वेतन मिलता रहा। इस दौरान जीएसए को कई सरकारी इमारतों के किराए पर भारी खर्च उठाना पड़ा। इसका बोझ आखिरकार करदाताओं पर ही पड़ा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: ट्रंप से बात के बाद बोलीं उर्सुला- चरणबद्ध तरीके से टैरिफ हटेगा, सदस्यों को मानना ही होगा
विज्ञापन
जीएसए के एक पूर्व अधिकारी चाड बेकर ने कहा कि एजेंसी में कर्मचारियों की भारी कमी हो गई थी और बुनियादी काम भी सही तरीके से नहीं हो पा रहे थे। अब एजेंसी को आपातकालीन स्थिति में चलाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मस्क और उनके सरकारी दक्षता विभाग (डॉज) ने बहुत जल्दी ज्यादा कटौती कर दी थी। जीएसए को 1940 के दशक में स्थापित किया गया था, ताकि सरकारी दफ्तरों को खरीदने और उनका प्रबंधन करने का सारा काम एक ही जगह से किया जा सके।
कर्मचारियों को फिर से वापस काम पर बुलाने का फैसला केवल जीएसए में ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियों में भी देखने को मिल रहा है। आयकर विभाग और श्रम विभाग ने भी कुछ पुराने कर्मचारियों को फिर से काम पर रखा है। राष्ट्रीय पार्क सेवा ने भी कुछ लोगों को वापस बुलाया है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका UNSC में अलग-थलग? गाजा संकट के बीच अधिकांश देश बोले- हम सीजफायर-फलस्तीन के पक्ष में
जीएसए के लिए स्थिति संभालना जरूरी हो गया था, क्योंकि मार्च से हजारों कर्मचारियों ने या तो खुद सेवानिवृत्ति ले ली या उन्हें जबरन नौकरी छोड़ने को कहा गया। इसके अलावा, सैकड़ों कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, इन सभी को सितंबर के अंत तक वेतन मिलता रहा।
जीएसए ने इस फैसले पर विस्तार से कुछ नहीं कहा और न ही कर्मचारियों की संख्या या खर्च को लेकर जानकारी दी। केवल इतना कहा गया कि जीएसए नेतृत्व ने कर्मचारियों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की है और जो भी निर्णय लिया गया है, वह ग्राहक एजेंसियों और करदाताओं के हित में है।
इस फैसले को लेकर एरिजोना से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ग्रेग स्टैंटन ने कहा कि ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है कि इन कटौतियों से सरकार ने कोई बचत की है। इसके विपरीत, इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और लोगों की सेवाएं प्रभावित हुईं।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन