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अफ्रीकी अमेरिकी हो रहे हैं कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा शिकार: ट्रंप
Wed, 08 Apr 2020 01:18 PM IST
श्रीधर मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Wed, 08 Apr 2020 01:18 PM IST
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
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इस समय अमेरिका दुनियाभर में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यहां तीन लाख से ज्यादा लोग इस महामारी के चपेट में आ चुके हैं। इस दौरान मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोविड-19 का टेस्टिंग डेटा बता रहा है कि अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय कोरोना वायरस के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील है।
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संवाददाता सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "हम सक्रिय मामलों के बढ़ते असर की समस्याओं पर उलझ रहे हैं, यह एक वास्तविक समस्या है और यह अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय पर हमारे डेटा में बहुत मजबूती से दिखाई दे रहा है।" ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने अब तक 18 लाख 70 हजार परीक्षण किए हैं।
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पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, हम इस बात के ठोस सबूत देख रहे हैं कि अफ्रीकी अमेरिकी, देश के अन्य नागरिकों के मुकाबले कहीं अधिक प्रतिशत संख्या में प्रभावित हैं।
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ट्रंप ने इस दौरान कहा, हम इस चुनौती से लड़ने के लिए वो सब कुछ कर रहे हैं जो हमारे हाथ में है। यह एक जबरदस्त चुनौती है, भयानक है और हम इस देश के अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिकों की सहायता करने के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं, लेकिन ये लगातार बढ़ते मामलों के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं। अफ्रीकी-अमेरिकी इस वायरस से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में एलर्जी और संक्रामक रोग के निदेशक डॉ एंथनी फौसी ने बताया कि अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय पारंपरिक रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित रहा है। डॉ फौसी ने समाचार सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, 'हम इसके बारे में बहुत चिंतित हैं। यह बहुत दुखद है, लेकिन हम कोशिश कर सकते हैं और उन जटिलताओं से बचने के लिए सर्वोत्तम संभव देखभाल दे सकते हैं।'
कोरोना वायरस पर व्हाइट हाउस टास्क फोर्स के एक सदस्य डॉ डेबोरा ब्रिक्स की राय इससे अलग है। उन्होंने दावा किया है कि वे इस धारणा को नहीं देना चाहते हैं कि अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय वायरस के लिए अधिक संवेदनशील है।