Afghanistan-Pakistan relations: पाक की धमकी पर अफगानिस्तान ने दी ये बड़ी चेतावनी! कहा- अपने गिरेबां में झांको
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विस्तार
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर वह अपने पड़ोसी मुल्क से अच्छे संबंध रखना चाहता है, तो उसके लिए पड़ोसी मुल्क को भी संयम बरतना होगा। तहरीक-ए-तालिबान के नाम पर अफगानिस्तान को धमकी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान को धमकी देते हुए कहा था कि वह या तो तहरीक-ए-तालिबान से नाता रखे या फिर पाकिस्तान से। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री का जवाब देते हुए अफगानिस्तान की सरकार ने जमकर पाकिस्तान को खरी खोटी सुनाई। अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान को भेजी गई चिट्ठी में इसका उल्लेख भी है। अमर उजाला के पास अफगानिस्तान की सरकार की ओर से पाकिस्तान को भेजी गई चिट्ठी मौजूद है।
दरअसल पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान से जुड़े हुए लोग पाकिस्तान में लगातार हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को मिली जानकारी के मुताबिक यह हमले अफगानिस्तान की ओर से आने वाले टीटीपी के लोग कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक जानकारी साझा करते हुए कहा कि अब तक अफगानिस्तान में शरण ले रहे इन लोगों की वजह से सैनिकों और आम लोगों की लगातार मौतें हो रहीं हैं। इस पूरे मामले में पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान को निशाने पर लेते हुए अपनी ओर से दी जाने वाली मदद को रोकने और अन्य तमाम तरह की धमकियां देकर अफगानिस्तान को दबाने की कोशिश की। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को लिखा पढ़ी में आपत्ति भी दर्ज कराई।
खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जो आपत्ति पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को लिखकर दर्ज कराई, न सिर्फ उसकी भाषा शैली अफगानिस्तान को चुभ गई बल्कि कई झूठे आरोप भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर लगाने शुरू कर दिए। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने जो चिट्ठी लिखी, उसमें अफगानिस्तान को दी जाने वाली पाकिस्तान की ओर से मदद को बंद करने का भी धमकी दी गई। इससे नाराज होकर अफगानिस्तान ने बाकायदा पाकिस्तान को आड़े हाथों ले लिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के अनर्गल आरोपों के बाद खुद की आंतरिक सुरक्षा में मजबूती लाने की सलाह दी और दूसरे देश पर आरोप न मढ़ने की हिदायत भी दी है। अफगानिस्तान की सरकार की ओर से पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में कहा गया है कि वह अपने गिरेबान में झांके और पड़ोसी देश के साथ बेहतर रिश्ते रखें तो ज्यादा अच्छा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान को भेजी गई इस सख्त चिट्ठी की उम्मीद पाकिस्तान की सरकार को बिल्कुल नहीं थी।
रक्षा मामलों के जानकार मेजर जतिन गौरांग कहते हैं कि बीते कुछ दिनों में जिस तरीके से अफगानिस्तान ने दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में अपनी पहचान बनानी शुरू की है, उससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि मजबूत हो रही है। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान दरअसल अफगानिस्तान पर इसलिए बौखलाया है क्योंकि उसका हस्तक्षेप अब सीधे तौर पर अफगानिस्तान में उतना नहीं रह गया है। हालांकि अभी भी पाकिस्तान का दखल अफगानिस्तान में है। लेकिन जिस उम्मीद के साथ अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार बनी थी, उससे पाकिस्तान को उम्मीदें कई गुना ज्यादा थीं। लेकिन पाकिस्तान की छिपी हुई नापाक उम्मीदों को अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने न सिर्फ वक्त रहते भांप लिया, बल्कि उनकी ओर से लगातार दी जाने वाली ऐसी धमकियों से रिश्ते और खराब होने लगे।
यही वजह है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की ओर से लगाए जाने वाले बेबुनियाद आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया और एक लंबी चौड़ी चिट्ठी पाकिस्तान की सरकार को लिख भेजी। इस चिट्ठी का मजमून यही है कि अब अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान से बेहतर रिश्ते चाहता है, तो उसे न सिर्फ संयम रखना होगा बल्कि बेवजह की धमकियों से बाज आना होगा। अफगानिस्तान की सरकार की ओर से पाकिस्तान को जो चिट्ठी लिखी गई है, उसमें कहा गया है कि पाकिस्तान को तहरीक-ए-तालिबान के तालिबान के नाम पर अफगानिस्तान को धमकी नहीं दी जानी चाहिए। दरअसल रक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जिन टीटीपी के लोगों से पाकिस्तान परेशान है, दरअसल उन्हें पाल-पोस कर तो पाकिस्तान ने ही बड़ा किया है। रक्षा मामलों के जानकार कर्नल अशोक चतुर्वेदी कहते हैं कि अब जब टीटीपी लगातार पाकिस्तान पर हमलावर है, तो पाकिस्तान अपना बचाव करने की बजाय दूसरे देशों पर खासतौर से अफगानिस्तान पर आरोप मढ़ रहा है।
बीते कुछ समय से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच में रिश्ते बदतर होते जा रहे हैं। इसके पीछे असली वजह यही बताई जा रही है कि पाकिस्तान का अफगानिस्तान की सरकार में मनमुताबिक हस्तक्षेप न होना है। खुफिया एजेंसियों से ताल्लुक रखने रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी अनुरूप बैनर्जी कहते हैं कि पाकिस्तान की नियत अफगानिस्तान को लेकर कभी भी बहुत साफ नहीं थी। जब अफगानिस्तान में तालिबानियों की नई सरकार बनी, तो पाकिस्तान की पूरी सियासी और खुफिया एजेंसी काबुल में डेरा डालने पहुंच गई थी। क्योंकि शुरुआती दौर में अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को स्थापित होने में मदद चाहिए थी। इसलिए वह पाकिस्तान के सहारे खुद को स्थापित तो करने लगा, लेकिन पाकिस्तान की मंशा से वह बहुत जल्दी वाकिफ हो गया। उसके बाद से ही पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर कई तरह का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सबसे बड़ा दबाव पिछले महीने की आखिरी तारीख को बनाया गया। जिसमें पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में रह रहे हजारों अफगानी शरणार्थियों को उनके देश न सिर्फ जबरदस्ती भेजा, बल्कि उनके साथ बदसलूकी भी की। इससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते और ज्यादा खराब हो गए।