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Hindi News ›   World ›   Afghanistan From 2002 to 2020, a lot was changed in afghanistan unesco fears that education science and culture will be in danger under taliban rule

अफगानिस्तान: 2002 से 2020 तक में बहुत बदल गया था यह देश, तालिबान राज में शिक्षा और संस्कृति के खतरे में पड़ने की आशंका

Wed, 01 Sep 2021 07:01 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 01 Sep 2021 07:01 PM IST
सार

2001 में तालिबान का शासन खत्म होने के बाद अफगानिस्तान में बहुत बदलाव आया था। देश शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति को लेकर प्रगति की एक राह पकड़ने लगा था। लेकिन एक बार फिर तालिबान का शासन होने के बाद यूनेस्को को इस प्रगति के खतरे में पड़ जाने की आशंका होने लगी है। 
 

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Afghanistan  From 2002 to 2020, a lot was changed in afghanistan unesco fears that education science and culture will be in danger under taliban rule
अफगानिस्तान में स्कूल से लौटतीं लड़कियां - फोटो : विलियम पॉडलिच

विस्तार

अफगानिस्तान में बदले राजनीतिक और सामाजिक हालात के बाद चीन और पाकिस्तान को छोड़कर पूरी दुनिया वहां के लोगों को लेकर चिंता में है। तालिबान के कट्टर शासन में अफगान नागरिकों का मानवाधिकार कितना सुरक्षित रहेगा इस पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इस बीच  संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) को वहां के बच्चों की शिक्षा और संस्कृति के खतरे में पड़ जाने का डर सताने लगा है। पिछले दो दशकों में जो हासिल किया गया है, उसे याद करते हुए, यूनेस्को ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह याद दिलाने की कोशिश है कि भविष्य के अफगानिस्तान के लिए क्या दांव पर लगा है।

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इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है अफगानिस्तान
तालिबानी राज के संदर्भ में यूनेस्को ने कहा है अफगानिस्तान इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। देश के लिए और पूरे क्षेत्र के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पिछले दो दशकों में मानवाधिकारों, शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मामले में उसने जो प्रगति की थी, वह यथावत बनी रहे। 2002 के बाद से, यूनेस्को ने अफगान और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर कई बदलाव किए थे।
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जैसे शिक्षा प्रणाली में सुधार हुआ था,  सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाई गई, वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाने और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम चलाए गए थे। यूनेस्को ने आगाह किया है कि अफगानिस्तान में सांस्कृतिक विरासत को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचने से स्थाई शान्ति व मानवीय राहत कार्य पर खराब असर पड़ सकता है।
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इन सालों में इतना बदल गया था अफगानिस्तान
यूनेस्को के प्रयासों से अफगानिस्तान में  साक्षरता दर में बड़ी वृद्धि हुई थी। 2002 में जहां 34 फीसदी साक्षरता दर थी वह 2020 में 43 फीसदी पर पहुंच गई थी। 2006 में स्वीडन, जापान, नॉर्वे, डेनमार्क, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अफगानिस्तान के नागरिक समाज संगठनों  के साथ मिलकर यूनेस्को ने अफगान इतिहास में सबसे बड़ा साक्षरता कार्यक्रम चलाया था। जिसमें एक करोड़ से ज्यादा लोगों को शिक्षित किया गया था। जिसमें आठ लाख महिलाएं और लड़कियां शामिल थीं। साक्षरता कार्यक्रमों के जरिए 45 हजार पुलिस अधिकारियों को भी शिक्षित किया गया। 

2002 के बाद से यूनेस्को ने राष्ट्रव्यापी शिक्षा सुधार के विकास कार्यक्रम में सरकार को सहयोग दिया। जिसमें शिक्षा की राष्ट्रीय नीतियां शामिल थीं, जैसे कि शैक्षिक योजना के लिए पहली बार राष्ट्रीय संस्थान खोलने पर विचार किया गया,  एक सामान्य शिक्षा पाठ्यक्रम में सुधार किया और और उच्च शिक्षा के लिए एक रणनीतिक योजना बनाई गई। शिक्षा के क्षेत्र मे उचित विकास और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए सभी 34 प्रांतों के 741 योजना अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।

2018 से, यूनेस्को फिजिक्स विदाउट फ्रंटियर्स कार्यक्रम चला रहा है। अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर स्नातक स्तर की भौतिकी पाठ्यक्रम विकसित करने में शिक्षकों की मदद करने के लिए काबुल विश्वविद्यालय के साथ काम कर रहा है। 
काबुल विश्वविद्यालय में भौतिकी पढ़ने के लिए लगभग 400 अफगान छात्रों ने देश भर से काबुल विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। 

समृद्ध विरासतों का घर है अफगानिस्तान
अफगानिस्तान विविध प्रकार की समृद्ध विरासतों का घर है, जो कि उस देश के इतिहास और पहचान का एक महत्वपूर्ण अंग है। इन स्थलों में हेरात में पुराने शहर का इलाका, बामियान घाटी और काबुल का राष्ट्रीय संग्रहालय शामिल है। यूनेस्को ने बामियान घाटी के अवशेषों, जाम की मीनार और अन्य प्रतिष्ठित स्मारकों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियान चलाया था। उन्हें अफगान पहचान और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में संरक्षित किया गया था। 

संस्कृति की रक्षा के लिए कई संग्रहालय क्यूरेटर और पेशेवरों के साथ-साथ संस्कृति विशेषज्ञों को भी प्रशिक्षित किया है। जो देश भर के सांस्कृतिक स्थलों और विरासतों की निगरानी करने में सक्षम बने। अफगानिस्तान के सांस्कृतिक ताने-बाने और रचनात्मकता को पुनर्जीवित करने के लिए कई सांस्कृतिक पहल की गई। विशेष रूप से बामियान सांस्कृतिक केंद्र, एक प्रदर्शनी और प्रशिक्षण स्थान का शुभारंभ हुआ। फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। 

मीडिया ने भी खूब तरक्की की
2002 से 2020 का दौर ऐसा था जब अफगानिस्तान में नए-नए मीडिया संस्थान खुल रहे थे। इस दौरान मीडिया भी खूब तरक्की कर रहा था। 2020 तक यहां 1,879 सक्रिय मीडिया संस्थान खुल चुके थे। 203 टीवी चैनल, 349 रेडियो स्टेशन और1,327 प्रिंट संस्थान लोगों की आवाज बन रहे थे। 2020 में, अफगानिस्तान में मीडिया संस्थानों में 1,741 महिलाएं काम कर ही थीं, जिनमें 1,139 महिला पत्रकार शामिल थीं। 


यूनेस्को का कहना है इन सभी उपलब्धियों से पता चलता है कि आज का अफगान समाज 20 साल पहले के समाज से बहुत अलग हो गया है। देश ने बहुत प्रगति की है, लेकिन उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए वरना देश का विकास छिन्न-भिन्न हो जाएगा। 

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