तालिबान का डर: छिप-छिपकर जीने को मजबूर महिला जज, कभी सुनाए थे आतंकियों के खिलाफ फैसले
कई महिला जज भागकर विदेश चली गई हैं लेकिन सैकड़ों अब भी देश में ही छिप-छिपकर जी रही हैं और उन्हें हरवक्त जान का खतरा रहता है। इन महिला जजों ने आमतौर पर महिला अधिकारों के उल्लंघन, महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म, हत्या और पारिवारिक उत्पीड़न के मामलों पर फैसले सुनाए थे।
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कभी तालिबानियों के खिलाफ फैसले सुनाने वाली अफगान महिला जजों को इन दिनों अपनी जान बचाते फिरना पड़ रहा है। महिला अभियोजकों का कहना है कि कई पूर्व तालिबानी कैदी बदला लेने के लिए उनकी तलाश कर रहे हैं। खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने एक महिला जज के हवाले से बताया कि तालिबान के कब्जे के बाद से उन्हें बार-बार अज्ञात नंबरों से फोन कॉल आ रही हैं, जिससे वे भयभीत हैं।
कई महिला जज भागकर विदेश चली गई हैं लेकिन सैकड़ों अब भी देश में ही छिप-छिपकर जी रही हैं और उन्हें हरवक्त जान का खतरा रहता है। इन महिला जजों ने आमतौर पर महिला अधिकारों के उल्लंघन, महिला उत्पीड़न, दुष्कर्म, हत्या और पारिवारिक उत्पीड़न के मामलों पर फैसले सुनाए थे। खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने बताया, अन्य महिला कर्मचारियों की तरह ही महिला अभियोजक भी अपने घरों में ही कैद हैं।
पूर्वी अफगानिस्तान में तालिबान पर हमले, दो लड़ाकों समेत पांच की मौत
पूर्वी अफगानिस्तान में तालिबान के वाहनों पर बुधवार को हुए हमलों में दो लड़ाकों व तीन आम नागरिकों की मौत हो गई। तालिबान के हुकूमत अपने हाथ में लेने के बाद हिंसा की यह ताजा घटना है। पहले हमले में एक बंदूकधारी ने जलालाबाद में तालिबान के वाहनों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी की। इसमें दो लड़ाके और एक नागरिक मारा गया।
इस हमले में एक बच्चे की भी मौत हुई। वहीं दूसरे हमले में एक अन्य वाहन को निशाना बनाया गया। इसमें एक बच्चे की मौत हुई और दो लड़ाके घायल हुए। इसके अलावा एक अन्य हमले में एक व्यक्ति और घायल हुआ। इस हमले की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पिछले हफ्ते इसी तरह के एक हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली थी जिसमें आठ लोग मारे गए थे।