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अफगानिस्तान : तालिबान की नजरों से बचकर पाकिस्तान पहुंचीं अफगान की 32 महिला फुटबॉल खिलाड़ी
Thu, 16 Sep 2021 02:47 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, इस्लामाबाद/स्टॉकहोम।
एजेंसी, इस्लामाबाद/स्टॉकहोम।
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 16 Sep 2021 02:47 AM IST
सार
इन 32 महिला फुटबॉल खिलाड़ियोंं को खेल से जुड़ा होने की वजह से तालिबान लगातार धमका रहा था। तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था।
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अफगानिस्तान महिला फुटबॉल खिलाड़ी
- फोटो : social media
विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान की बढ़ती क्रूरता के बीच 32 महिला फुटबॉल खिलाड़ी उनकी नजरों से छिपकर अपने परिवार के साथ पाकिस्तान पहुंच गई हैं। ये सभी नेशनल जूनियर गर्ल्स टीम का हिस्सा हैं और इन सभी को कतर जाना था।
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जहां साल 2022 फीफा विश्व कप का आयोजन होने जा रहा है। हालांकि, 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम धमाके के बाद ये सभी अफगानिस्तान में ही फंस गए थे। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों के साथ ही 170 अफगानी नागरिकों की जान गई थी।
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डॉन न्यूज की खबर के मुताबिक, इन महिलाओं को खेल से जुड़ा होने की वजह से तालिबान लगातार धमका रहा था। बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था। उसी समय से सभी लड़कियां तालिबान से बचने के लिए छिप रही थीं।
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अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद से लगातार धमका रहा था तालिबान
अब इन 32 महिला खिलाड़ियों को पाकिस्तान ले जाने की शुरुआत ब्रिटेन के एक एनजी ने की। फीफा अध्यक्ष गियानी इनफातिनो ने बीते सप्ताह दोहा के दौरे के समय अफगान शरणार्थियों से भी मुलाकात की थी। अफगान में फंसी महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा पर ध्यान न देने की वजह से फीफा को काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा था। इन खिलाड़ियों को अब पेशावर से लाहौर ले जाया जाएगा जहां उन्हें पीएफएफ हेडक्वार्टर में रखा जाएगा।
महिलाओं की दो-टूक, काले लिफाफे में कैद, ये हमारी पहचान नहीं
वहीं दूसरी ओर तालिबान द्वारा बुर्के, नकाब और हिजाब में रहने के फरमान के खिलाफ महिलाओं ने मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने पारंपरिक पोशाकों में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दो-टूक कहा है कि रंग-बिरंगी पोशाकें हमारी संस्कृति है और तालिबान हमारा पहनावा तय नहीं कर सकता।
स्वीडन निवासी अफगान कार्यकर्ता वजहमला सायले ने कहा, लड़कियां काले लिफाफे में बंद नहीं रह सकती हैं। उन्होंने हरे और चांदी के रंग की पोशाक में तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की है और लिखा, इससे कम कुछ भी कबूल नहीं है। यही अफगानी महिलाओं की पहचान है।