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अफगानिस्तान: हथियारों-उपकरणों पर 20 साल में 65 खरब खर्च, तालिबानियों के कब्जे के साथ अमेरिका का पैसा गया पानी में
Mon, 16 Aug 2021 07:12 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 16 Aug 2021 07:12 PM IST
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अफगानिस्तान में तालिबानी
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
अफगानिस्तान तालिबानियों से महफूज रह सके इसके लिए पिछले दो दशक से वहां अमेरिकी और नाटो सैनिक तैनात थे। तालिबान से निपटने और अफगानी सेना की मदद के लिए अमेरिका ने करीब 10 हजार सैनिकों को इस ऑपरेशन में लगाया था।अमेरिकी सेनाओं ने तालिबानियों को हराने के लिए करीब तीन लाख अफगानी फौज को ट्रेनिंग दिया। अमेरिका ने देश के सुरक्षा बलों के हथियारों, उपकरणों और ट्रेनिंग पर करीब 65 खरब रूपये खर्च कर दिए। अमेरिका ने अफगानी सैनिकों को अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों से लैस किया। अफगानी वायु सेना तक के रखरखाव का जिम्मा भी अमेरिकी सैनियों ने ही संभाला। इस पूरे अभियान में अमेरिका को अपने 2300 सैनिकों को भी गंवाना पड़ा।
एनर्जी ड्रिंक से लेकर बख्तरबंद वाहन तक छोड़ दिया पीछे
अमेरिकी सैनिकों ने 20 साल के संघर्ष के बाद सबसे बड़ी सैन्य चौकी बगराम एयर बेस पीछे छोड़ दिया है। जिसमें एनर्जी ड्रिंक से लेकर बख्तरबंद वाहनों, हेलीकॉप्टर, सैन्य वाहन, नागरिक वाहन, हथियार और गोला-बारूद तक हैं। हालांकि 984 सी-17 परिवहन विमान से भारी मात्रा में सामग्री देश से बाहर भी भेजी गई।
जबकि अमेरिकी सैनिकों ने कुछ हथियारों को वापस ले जाने या इन्हें अफगानी सेना को सौंपने के बजाए बाबा मीर के विशाल कबाड़खाने में टैंक, तोपखाने और अन्य हथियारों के टुकड़ों को नष्ट कर दिया। अंतराष्ट्रीय मीडिय रिपोर्ट्स के मुताबिक अनुमान है कि अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान छोड़ने से पहले करीब 1500 से1700 उन सैन्य उपकरण नष्ट कर दिए जिन्हें वापस स्वदेश ले जाना संभव नहीं था। इसमें से 387 मिलियन पाउंड (176 मिलियन किलोग्राम) स्क्रैप पहले ही अफगान सरकार को 46.5 मिलियन डॉलर में बेचा जा चुका है। जबकि कुछ हथियार अफगान सैनिकों को सौंपे गए।
अमेरिका ने जो छोड़ा उस हथियार का अब क्या होगा?
ऐसे में सवाल उठा कि आखिर अमेरिका ने जो अफगानी सैनिकों को जो उपकरण और हथियार दिए, उसका क्या होगा। इसका जवाब तालिबान का सोशल मीडिया अकाउंट्स देखने पर साफ हो जाता है। अमेरिका का छोड़ा हुआ हथियार अब तालिबानियों के कब्जे में है। तालिबान का सोशल मीडिया अकाउंट्स तालिबान लड़ाकों के हथियारों के जखीरे को जब्त करने के वीडियो से भरा हुआ है।
उत्तरी शहर कुंदुज़ में आत्मसमर्पण करने वाले अफगान सैनिकों के फुटेज में सेना के वाहनों को भारी हथियारों से लदे और विद्रोही रैंक और फ़ाइल के हाथों में सुरक्षित रूप से तोपखाने की तोपों से लैस दिखाया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबानियों ने छोटी दूरी के 13 मोर्टार, 122-मिलीमीटर डी -30 के 17 हॉवित्जर जैसे घातक हथियारों पर कब्जा कर लिया है। जून के महीने में तालिबान ने दर्जनों बख्तरबंद वाहनों और 700 ट्रकों पर कब्जा कर लिया था।
ये हथियार तालिबानियों के लिए वरदान साबित होंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हथियार अब विद्रोहियों को आश्चर्यजनक रूप से सफलता देगा। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटार्यड) गुरमीत सिंह कहते हैं कि अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद बिना एक पैसा खर्च किए तालिबान के पास अमेरिका से भेजे गए उपकरणों पर कब्जा हो गया है। ये सारे हथियार साफ तौर पर तालिबानियों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने वाला है।" वे कहते हैं कि सिर्फ अमेरिकी सैनिकों के छोड़े गए हथियार ही नहीं बल्कि तालिबानियों के पास पाकिस्तान से भेजे गए हथियारों का बड़ा जखीरा भी है। 1979 से तालिबानियों को सिर्फ हथियार ही मिले हैं।
अमेरिका की ट्रेनिंग हुई नाकाम
अमेरिका ने बीते दो दशक में अफगानी सैनिकों को जो ट्रेनिंग दी वो नाकाम साबित हुई। क्योंकि अफगान सुरक्षा बलों में लड़ाई की भूख ही कम दिखाई दी। वे आसानी से हजारों की संख्या में तालिबानियों के आगे अपने हथियार डाल रहे हैं। अमेरिकी सैनिकों ने उन्हें जो ट्रेनिंग दी वह सब बहुत आसानी से ताश के पत्तों की ढह गया। इसकी एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि अफगानी सुरक्षा बलों के पास गोले-बारूद भी नहीं थे। इसलिए उनके अंदर खौफ बैठ गया और वे आसानी से हार मान गए।