भारत से दोस्ती के चलते अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान में सुननी पड़ रही गालियां
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पाकिस्तान में अफगान शरणार्थी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और रोजमर्रा की जिंदगी व बाजार में दुर्व्यवहार की वजह से देश छोड़ने के मूड में हैं। भारत के साथ अफगानिस्तान के मजबूत रिश्तों की वजह से इस शरणार्थियों को पाकिस्तान में गालियां सुननी पड़ रही है। पहले तो पाकिस्तानी इन्हें ‘काबुली’ कहकर बुलाते थे लेकिन जब से भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती और प्रगाढ़ हुई हैं, पाकिस्तानियों ने हदें पार कर दी हैं। अब पाकिस्तानियों ने अफगान शरणार्थियों को ‘हिंदू’ कहकर बुलाना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों का एक परिवार पेशे से दर्जी है, उसके मुखिया समिहुल्लाह ने देश छोड़ने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि बाजार में उन्हें लगातार दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तरी पाकिस्तान के शहर मनशेहरा में शरणार्थियों के परिवार में जन्में समिहुल्लाह और उनके परिवार के लोगों को कभी पाकिस्तान की नागरिकता नहीं मिली और हमेशा उन्हें अफगान माना जाता है।
बदसलूकी से आजिज आए अफगान शरणार्थी
लेकिन जब से भारत के साथ अफगानिस्तान के रिश्ते मजबूत हुए उनकी मुश्किलें बढ़ गईं हैं क्योंकि ज्यादातर पाकिस्तानियों का मानना है कि भारत हमारा दुश्मन हैं औरदोनों परमाणु संपन्न देशों में तलखियां बढ़ने से हाल के दिनों में उनके रवैये में और कठोरता आई है। समिहुल्लाह ने कहा, ‘अफगानों को पाकिस्तान में ‘काबुली’ नाम से पुकारते हैं। लेकिन जब से भारत के साथ अफगानिस्तान का आर्थिक करार हुआ है तब से पाकिस्तानियों ने हमें ‘हिंदू’ कहना शुरू कर दिया है। मेरी तरह ही हर अफगानियों को यहां दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।’
32 वर्षीय समिहुल्लाह ने दो शादी की है। उसकी एक अफगानी और एक पाकिस्तानी पत्नी है। इसके बावजूद वह उन हजारों लोगों के साथ रह रहा है, जिन्हें अफगान जाना है और वे काबुल के नजदीक शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं।