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अनुच्छेद 370 पर फिर साथ आया नेपाल, बताया भारत का आंतरिक मामला
Wed, 04 Sep 2019 08:57 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, माले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, माले
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 04 Sep 2019 08:57 AM IST
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प्रदीप ज्ञावली
- फोटो : ANI
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले का बेवजह विरोध कर रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार मुंह की खा रहा है। कश्मीर मुद्दे पर उसे किसी भी देश का समर्थन नहीं मिल रहा। वहीं नेपाल ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के फैसले को भारत का आंतरिक मामला बताया है।
मालदीव में आयोजित हिंद महासागर सम्मेलन में नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि जम्मू कश्मीर के संविधान में परिवर्तन करना भारत सरकार का निजी मामला है। इसलिए, हम इसपर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे।
नेपाली विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी प्रमुख चिंता उस क्षेत्र में रह रहे नेपाली हैं लेकिन हम खुश हैं कि वे सुरक्षित हैं, उन्हें कोई समस्या नहीं है। हम रक्षा संबंधी मामलों में भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं।
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ज्ञावली ने कहा कि नेपाल भारत और पाकिस्तान के बीच जल्द तनाव कम होने की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा कि सार्क के वर्तमान अध्यक्ष होने के नाते हम सभी सदस्य देशों से बातचीत के माध्यम से विवादों को निपटाने का आग्रह करते हैं। तनाव का बढ़ना समाधान नहीं है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि संघर्ष सबसे खराब विकल्प हैं, जिनसे हर देश को बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आशा की कुछ किरणें होंगी, जो तनाव को कम कर सकती हैं और फिर क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए बातचीत शुरू कर सकती हैं।
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मालदीव में आयोजित हिंद महासागर सम्मेलन में नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि जम्मू कश्मीर के संविधान में परिवर्तन करना भारत सरकार का निजी मामला है। इसलिए, हम इसपर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे।
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नेपाली विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी प्रमुख चिंता उस क्षेत्र में रह रहे नेपाली हैं लेकिन हम खुश हैं कि वे सुरक्षित हैं, उन्हें कोई समस्या नहीं है। हम रक्षा संबंधी मामलों में भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं।
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ज्ञावली ने कहा कि नेपाल भारत और पाकिस्तान के बीच जल्द तनाव कम होने की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा कि सार्क के वर्तमान अध्यक्ष होने के नाते हम सभी सदस्य देशों से बातचीत के माध्यम से विवादों को निपटाने का आग्रह करते हैं। तनाव का बढ़ना समाधान नहीं है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि संघर्ष सबसे खराब विकल्प हैं, जिनसे हर देश को बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आशा की कुछ किरणें होंगी, जो तनाव को कम कर सकती हैं और फिर क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए बातचीत शुरू कर सकती हैं।